लाल सलाम कहने वालों को मिला रेड कारपेट अभिनंदन, नई विधानसभा में बना नया विधान, आत्मसमर्पित नक्सलियों ने जाना विकास का संविधान
छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सरेंडर नक्सलियों ने विधानसभा की कार्यवाही देखी.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : February 27, 2026 at 5:15 PM IST
रायपुर: 27 फरवरी छत्तीसगढ़ विधानसभा के लिए काफी अहम रहा है. छत्तीसगढ़ के चल रहे मौजूदा बजट सत्र में इस बार बहुत कुछ बदला हुआ दिखा. 27 फरवरी को वे लोग बजट सत्र की कार्यवाही में हिस्सा लेने पहुंचे जिनके लिए विधानसभा के हर सत्र में सबसे ज्यादा चर्चा होती थी. छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान और उसके बाद के आए परिणाम अब विधानसभा परिसर तक देखे जा रहे हैं. संसदीय प्रणाली में विधानसभा सत्र की कार्यवाही कैसे होती है इसे देखने के लिए सरेंडर नक्सली विधानसभा पहुंचे थे. 125 से ज्यादा आत्म समर्पित नक्सली 27 फरवरी को विधानसभा की कार्यवाही में हिस्सा लिए और विधानसभा सत्र किस तरीके से चलता है इसे अपनी आंखों से देखा.
नई विधान सभा मे नया विधान
छत्तीसगढ़ का नया विधानसभा भवन अपने लिए एक इतिहास लिख रहा है. छत्तीसगढ़ के नए विधानसभा भवन में वित्तीय वर्ष 2027-28 का बजट पेश हुआ जो नए विधानसभा में पहली बार हुआ है. यह बजट सत्र विधानसभा के बनने के बाद का पहला बजट सत्र है जो अपनी कीर्तिमान को बना रहा है. इसके साथ ही विधानसभा में जो नया विधान बना वह भी अपने आप में काफी अहम है.
नए विधानसभा ने नया कीर्तिमान बनाया जिसमें 125 नक्सलियों ने नए विधानसभा के पहले बजट सत्र में उपस्थित होकर लोकतंत्र से नक्सलवाद के खात्मे की एक बड़ी कहानी को लिख दिया है. ये वे नक्सली हैं जिनको लेकर के सदन में चर्चा होती थी. नक्सल से घिरे क्षेत्र में विकास की बातें विधानसभा के पटल पर चर्चा बनकर रह जाती थी. यहां विकास पहुंचता नहीं था। लेकिन अब विकास वहां पहुंचे इसकी बुनियाद कैसे बनेगी इसे समझने के लिए वह लोग वहां पहुंचे थे जो लोग कभी संविधान को समझने के लिए तैयार नहीं थे. छत्तीसगढ़ के नए विधानसभा भवन के पहले बजट सत्र में यह नया विधान भी जुड़ गया है.

उप मुख्यमंत्री के घर लाल कारपेट
छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र की कार्यवाही में हिस्सा लेने पहुंचे नक्सलियों के स्वागत के लिए छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के आवास पर लाल कारपेट बिछाया गया था. जो लोग कभी लाल सलाम कहने के लिए हाथों की मुट्ठी बांधकर नारा लगाते थे उन लोगों के लिए उपमुख्यमंत्री के आवास पर लाल कारपेट बिछाया गया जिस पर वह चलकर भोजन करने पहुंचे थे. लाल सलाम की कहानी खत्म हो गई और रेड कार्पेट पर चलकर लाल आतंक के इतिहास को नक्सलियों ने अपने पैरों के नीचे दफन कर दिया. संविधान में लिखी हर बात का विरोध करने वाले लोग संविधान से चलने वाली व्यवस्था का समर्थन करने पहुंचे थे. यह छत्तीसगढ़ में खत्म होते नक्सलवाद की बहुत बड़ी कहानी है.

