सरगुजा में कुत्ते के काटे हुए बकरे का मांस गांव वालों ने खाया, रेबीज के खतरे को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने दी राहत
स्वास्थ्य विभाग ने कैंप लगाकर साफ किया कि अगर बकरे में रेबीज होता, तो उसमें लक्षण जरूर दिखते, लेकिन ऐसा कुछ नहीं था.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : December 31, 2025 at 8:56 PM IST
सरगुजा: जिले के अंबिकापुर से लगे सरगंवा गांव में उस समय हड़कंप मच गया, जब यह जानकारी सामने आई कि जिस बकरे का मटन गांव वालों ने खाया था, उसे कुछ महीने पहले एक कुत्ते ने काटा था. इसके बाद गांव में रेबीज फैलने का डर पैदा हो गया. हालांकि इस मामले में अब स्वास्थ्य विभाग ने कैंप लगाकर पूरी स्थिति साफ कर दी है. जानिए पूरी रिपोर्ट
400 लोगों ने खाया था बकरे का मांस: दरअसल, गांव में हर तीन साल में होने वाली निकाली पूजा का आयोजन 28 दिसंबर को किया गया था. इस पूजा में परंपरा के अनुसार बकरे की बलि दी जाती है. इस बार पूजा में 12 से 15 बकरे काटे गए थे और उनका मांस करीब 400 ग्रामीणों में बांटा गया था. परंपरा के अनुसार यह मांस सिर्फ पुरुषों और बच्चों ने ही खाया.
रेबीज की अफवाह से गांव में मचा डर: भोज के बाद किसी ने बताया कि बलि दिए गए बकरों में से एक को पागल कुत्ते ने काटा था. यह सुनते ही गांव में अफरा-तफरी मच गई और लोग रेबीज संक्रमण को लेकर डर गए.

स्वास्थ्य विभाग ने किया गांव में कैंप: ग्रामीणों की चिंता को देखते हुए सरपंच और उप सरपंच ने स्वास्थ्य विभाग को सूचना दी. इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव पहुंची और स्क्रीनिंग कैंप लगाया गया. सभी ग्रामीणों से सवाल पूछे गए और स्वास्थ्य जांच की गई.
4 महीने पुरानी थी घटना: महामारी नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. शैलेन्द्र गुप्ता ने बताया जिस बकरे को कुत्ते ने काटा था, वह घटना 4 महीने पुरानी थी. अगर बकरे में रेबीज होता, तो उसमें लक्षण जरूर दिखते, लेकिन ऐसा कुछ नहीं था. रेबीज वायरस हवा में आते ही कुछ मिनटों में निष्क्रिय हो जाता है.
बकरे का मांस अच्छी तरह पकाकर खाया गया, और इतना तापमान रेबीज वायरस को खत्म कर देता है.- डॉ. शैलेन्द्र गुप्ता, नोडल अधिकारी

किन लोगों को वैक्सीन की सलाह: डॉक्टरों ने बताया कि जिन लोगों ने बकरे को काटते समय हाथ में जख्म होने या आंखों के संपर्क की आशंका जताई, उन्हें सावधानी के तौर पर रेबीज वैक्सीन लगाने की सलाह दी गई है.
बकरे को कुत्ते ने 4 महीने पहले काटा था, उस समय बकरे का इलाज और इंजेक्शन भी कराया गया था. बकरा पूरी तरह स्वस्थ था. गांव वाले कल तक डरे हुए थे, लेकिन अब राहत महसूस कर रहे हैं.- बकरे के मालिक मांगू राम
ग्रामीणों ने ली राहत की सांस: स्वास्थ्य विभाग की जांच के बाद यह साफ हो गया कि गांव में रेबीज का कोई खतरा नहीं है. करीब 400 ग्रामीण अब निश्चिंत हैं और गांव में हालात सामान्य हैं.

