सूरजकुंड मेला 2026: मुरादाबाद के इकराम हुसैन ने पीतल पर उकेरी विरासत, नक्काशी ने जीता सबका दिल
सूरजकुंड मेले में मुरादाबाद के कारीगर इकराम हुसैन की पीतल नक्काशी ने देश-विदेशी पर्यटकों का दिल जीत लिया है.

Published : February 10, 2026 at 1:42 PM IST
|Updated : February 10, 2026 at 2:20 PM IST
फरीदाबाद: सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय आत्मनिर्भर क्राफ्ट मेला एक बार फिर देशभर की कला, संस्कृति और पारंपरिक हस्तशिल्प का जीवंत संगम बनकर उभरा है. इस मेले में भारत के कोने-कोने से आए कारीगर अपनी कला और हुनर का प्रदर्शन कर रहे हैं. कहीं लकड़ी की नक्काशी है, तो कहीं कपड़ों पर हाथ की कढ़ाई, कहीं मिट्टी की खुशबू है तो कहीं धातु की चमक. इसी बीच उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से आए कारीगर इकराम हुसैन अपनी पीतल की बारीक नक्काशी के कारण दर्शकों के बीच खास आकर्षण बने हुए हैं.
पीतल के बर्तनों में झलकती है जीवंत कला: इकराम हुसैन के तैयार किए गए पीतल के बर्तन केवल उपयोग की वस्तुएं नहीं हैं, बल्कि वे कला के जीवंत नमूने हैं. उनकी नक्काशी में फूल-पत्तियों, पारंपरिक भारतीय आकृतियों और सांस्कृतिक प्रतीकों की सुंदर झलक देखने को मिलती है. हर डिजाइन इतनी बारीकी से उकेरा गया होता है कि देखने वाला ठहरकर उसे निहारने को मजबूर हो जाता है. यही वजह है कि उनकी दुकान पर दिनभर देशी और विदेशी पर्यटकों की भीड़ लगी रहती है.
चार पीढ़ियां कला से जुड़ी: ईटीवी भारत से बातचीत के दौरान इकराम हुसैन ने बताया कि, "हम इस कला से जुड़े चौथी पीढ़ी हैं. यह हुनर हमें विरासत में मिला है. मेरे दादा और परदादा ने इस काम को बड़ी मुश्किलों में जिंदा रखा, लेकिन उस दौर में मेहनत के अनुरूप आमदनी नहीं हो पाती थी. उन्हीं संघर्षों को देखकर हमने पढ़ाई छोड़कर पूरी तरह इस कला को अपनाने का फैसला किया. आज वही फैसला मेरी पहचान बन चुका है."
नक्काशी के काम में धैर्य जरूरी: इकराम हुसैन ने आगे बताया कि, "पीतल पर नक्काशी का काम बेहद मेहनत और धैर्य की मांग करता है. एक-एक डिजाइन को उभारने में कई दिन, कभी-कभी हफ्ते लग जाते हैं. जरा-सी चूक पूरी मेहनत खराब कर सकती है. यही कारण है कि इस कला में मन और हाथ दोनों का संतुलन जरूरी होता है. डिजाइन तभी निखर कर सामने आता है, जब कारीगर पूरी तल्लीनता और सब्र के साथ काम करे."

कला से जुड़ाव के कारण नहीं की शादी: इकराम हुसैन ने बातचीत के दौरान एक भावुक पहलू भी साझा किया. उन्होंने बताया कि, "मुझे अपने काम से इतना प्रेम है कि मैंने शादी तक नहीं की. आज मेरी उम्र 61 वर्ष है, लेकिन इस उम्र में भी वे पूरे जोश और लगन के साथ काम कर रहा हूं. मैं देश-विदेश के कई मेलों और प्रदर्शनियों में हिस्सा ले चुका हूं, जहां मेरी कला को खूब सराहा गया है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है."
राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर मिले कई सम्मान: इकराम हुसैन की कारीगरी को समय-समय पर कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा गया है. इस बारे में उन्होंने बताया कि, "साल 2004 में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पुरस्कार मिला. इसके बाद 2010 में डॉ. भीमराव अंबेडकर पुरस्कार, 2013 में डॉ. राम मनोहर लोहिया विशेष हस्तशिल्प पुरस्कार मिला. इसी वर्ष उन्हें भारत सरकार की ओर से नेशनल अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया. इसके अलावा 2021 में एक बार फिर उन्हें नेशनल अवॉर्ड प्राप्त हुआ."

56 हाथियों वाली प्लेट ने दिलाया गिनीज रिकॉर्ड: इकराम हुसैन की कला का सबसे अनोखा नमूना वर्ष 2015 में सामने आया, जब उन्होंने एक विशेष प्लेट तैयार की. इस प्लेट पर 56 हाथियों की बारीक आकृतियां उकेरी गई थीं और उसमें गोल्ड का भी प्रयोग किया गया था. इस प्लेट को बनाने में उन्हें पूरे चार साल का समय लगा. इसकी कीमत चार लाख रुपये रखी गई है. इसी अद्वितीय कृति के कारण उनका नाम वर्ष 2015 में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ.

दाम से नहीं करते समझौता: इकराम हुसैन बताते हैं कि आज भी कई लोग उस खास प्लेट को खरीदना चाहते हैं. एक व्यक्ति ने ढाई लाख रुपये तक की पेशकश की थी, लेकिन उन्होंने साफ मना कर दिया. उनका कहना है कि, "यह प्लेट केवल बिक्री की वस्तु नहीं, बल्कि उनकी वर्षों की मेहनत और पहचान है, इसलिए वे इसकी कीमत से कोई समझौता नहीं करेंगे."

ग्राहकों ने की जमकर तारीफ: मेले में खरीदारी करने दिल्ली से आई नमिता मिश्रा ने बताया कि, "इकराम हुसैन की कारीगरी बेहद बारीक और शानदार है. ऐसे कारीगर अब बहुत कम देखने को मिलते हैं. कीमतें थोड़ी ज्यादा हैं, लेकिन मेहनत के हिसाब से उचित हैं." वहीं, उत्तर प्रदेश से आई रीमा ने कहा कि, "वे बचपन से ही इस तरह की नक्काशी देखती आ रही हैं और इकराम हुसैन के प्रोडक्ट्स की गुणवत्ता बेहतरीन है, इसलिए वे यहां से खरीदारी कर रही हैं."
सूरजकुंड मेला कारीगरों को देता है नई पहचान: सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय क्राफ्ट मेला न सिर्फ कला का उत्सव है, बल्कि यह उन कारीगरों के लिए भी एक बड़ा मंच है, जो वर्षों से अपने हुनर को संजोए हुए हैं. इकराम हुसैन जैसे कलाकार इस मेले के जरिए अपनी कला को नई पहचान दिला रहे हैं और यह मेला आत्मनिर्भर भारत की भावना को भी सशक्त रूप से आगे बढ़ा रहा है.

