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बनभूलपुरा रेलवे अतिक्रमण मामला: PMAY के तहत होगा सर्वे, 28 अप्रैल को होगी अगली सुनवाई

बनभूलपुरा रेलवे अतिक्रमण मामले में सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट आदेश सामने आया है, जिसमें कई बातें साफ की गई हैं.

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बनभूलपुरा रेलवे अतिक्रमण मामला (ETV Bharat AND IANS)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : February 28, 2026 at 7:39 PM IST

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हल्द्वानी: उत्तराखंड के चर्चित बनभूलपुरा रेलवे अतिक्रमण मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने बीती 24 फरवरी को जो आदेश जारी किया था, वो सामने आ गया है. चार दिन बाद आदेश की कॉपी सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट में अपलोड की गई है, जिसमें कोर्ट द्वारा महत्वपूर्ण आदेश पारित किए हैं.

आदेश में स्पष्ट किया गया है कि मामला हल्द्वानी रेलवे स्टेशन के आसपास स्थित लगभग 30 हेक्टेयर से अधिक सार्वजनिक भूमि पर बसे हजारों परिवारों की बेदखली से जुड़ा है. न्यायालय के समक्ष सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि लगभग 30.040 हेक्टेयर सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण कर करीब 4,365 मकान बनाए गए हैं, जिनमें 50 हजार से अधिक लोग निवास कर रहे हैं. रेलवे द्वारा नई लाइन बिछाने और परियोजना कार्यों के लिए भूमि की आवश्यकता जताई गई है, जिसके तहत 30.65 हेक्टेयर भूमि पुनर्संरेखण (रियलाइन्मेंट) के लिए जरूरी बताई गई है.

13 परिवारों की जमीन वैध: सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि संबंधित क्षेत्र में 13 परिवार ऐसे हैं, जिनके पास छोटे भूखंडों का वैध स्वामित्व है. यदि परियोजना के लिए उनकी भूमि की आवश्यकता होगी तो विधि अनुसार अधिग्रहण किया जाएगा. हालांकि, कोर्ट ने शेष निवासियों को अतिक्रमणकारी बताते हुए कहा गया कि उन्हें उसी स्थान पर पुनर्वास का अधिकार नहीं है, क्योंकि भूमि रेलवे परियोजना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है.

छह माह तक प्रति परिवार 2000 रुपये अनुग्रह राशि: भारत संघ और रेलवे प्राधिकरणों की ओर से दायर अनुपालन शपथ पत्र में बताया गया कि प्रत्येक प्रभावित परिवार के मुखिया को संरचनाओं के ध्वस्तीकरण के लिए छह माह तक प्रति माह 2,000 रुपए की अनुग्रह राशि (एक्स-ग्रेशिया) दी जाएगी. यह राशि केंद्र और राज्य सरकार संयुक्त रूप से वहन करेंगे.

PMAY के तहत आवेदन का मौका: अदालत ने माना कि बड़ी संख्या में निवासी आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के अंतर्गत आ सकते हैं. ऐसे में उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत आवेदन करने का अवसर दिया जाए. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि गतिरोध को अनिश्चितकाल तक जारी नहीं रखा जा सकता, इसलिए प्रत्येक परिवार की पात्रता का निर्धारण आवश्यक है.

USLSA लगाएगा पुनर्वास शिविर: अदालत ने Uttarakhand State Legal Services Authority (USLSA) को निर्देश दिया है कि 19 मार्च 2026 के बाद संबंधित क्षेत्र में पुनर्वास शिविर आयोजित किया जाए. शिविर में प्रत्येक परिवार के मुखिया को PMAY के तहत आवेदन करने के लिए प्रेरित किया जाएगा. सदस्य सचिव स्वयं मौजूद रहेंगे. साथ ही जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे.

इतना ही नहीं जिलाधिकारी नैनीताल, उप-जिलाधिकारी हल्द्वानी और अन्य राजस्व अधिकारी लॉजिस्टिक सहयोग देंगे. कोर्ट ने उम्मीद जताई है कि आवेदन प्रक्रिया 31 मार्च 2026 तक पूरी कर ली जाएगी. जरूरत पड़ने पर एक से अधिक शिविर भी लगाए जा सकते हैं.

घर-घर जाकर दी जाएगी योजना की जानकारी: अतिक्रमण क्षेत्र में USLSA परामर्शदाताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विशेषज्ञों की मदद से घर-घर जाकर लोगों को योजना की शर्तों और लाभों की जानकारी देगा. इसके बाद कलेक्टर या नामित अधिकारी प्रत्येक परिवार की पात्रता तय करेंगे और पात्र परिवारों की संख्या दर्शाते हुए रिपोर्ट सर्वोच्च न्यायालय में प्रस्तुत की जाएगी. साथ ही USLSA भी आवेदक परिवारों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करेगा.

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में दी गई अंतरिम सुरक्षा को सभी कथित अनधिकृत निवासियों पर लागू सामान्य आदेश नहीं माना जाएगा. अन्य मामलों में स्थगन (स्टे) प्रत्येक प्रकरण के तथ्यों के आधार पर अलग-अलग तय होगा.

अगली सुनवाई 28 अप्रैल 2026 को: मामले के आगे की सुनवाई और निर्देशों के लिए 28 अप्रैल 2026 को सूचीबद्ध किया गया है. सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद बनभूलपुरा क्षेत्र में पुनर्वास प्रक्रिया तेज होने की संभावना है और अब सबकी नजर 19 मार्च के बाद लगने वाले पुनर्वास शिविरों और पात्रता सर्वे पर टिकी है.

इस पूरे मामले पर नैनीताल जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने बताया कि, बनभूलपुरा मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश प्राप्त हुए हैं. आदेश के अनुसार ही आगे की कार्रवाई की जाएगी. इससे संबंधित अधिकारियों के साथ पूर्व में बैठक भी की जा चुकी है.

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