ETV Bharat / state

हिमाचल पंचायत चुनाव मामला: सुप्रीम कोर्ट ने 31 मई 2026 से पहले चुनाव कराने के दिए आदेश

SC ने हिमाचल में 31 मई से पहले पंचायत चुनाव करवाने के दिए आदेश. चुनाव संबंधी प्रक्रिया इस दिन तक होनी चाहिए पूरी.

SC on Himachal Panchayat election
सुप्रीम कोर्ट (IANS)
author img

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : February 13, 2026 at 12:09 PM IST

3 Min Read
Choose ETV Bharat

शिमला: हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट से बड़ा अपडेट आया है. सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को प्रदेश में 31 मई से पहले पंचायती राज चुनाव संपन्न करवाने के आदेश दिए हैं. इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को चुनाव संबंधी प्रक्रिया को 31 मार्च तक पूरा करने के लिए कहा है. सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने मामले पर सुनवाई करते हुए ये आदेश दिए हैं. इससे पहले हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने 30 अप्रैल तक राज्य में चुनाव संपन्न करवाने का आदेश दिए थे. राज्य की कांग्रेस सरकार ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के इस फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटिशन (SLP) दायर की थी. राज्य सरकार की एसएलपी पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अगुवाई वाली डिवीजन बेंच ने यह फैसला सुनाया है.

हाईकोर्ट ने 30 अप्रैल तक चुनाव कराने के दिए थे आदेश

हिमाचल प्रदेश में 31 जनवरी तक पंचायती राज संस्थाओं का कार्यकाल पूरा होना था, लेकिन इससे पहले चुनाव को लेकर कोई अधिसूचना जारी नहीं की गई थी. ऐसे में मामला हिमाचल हाईकोर्ट पहुंचा. अधिवक्ता डिक्कन कुमार ठाकुर की ओर से जनहित याचिका दायर की गई. इस पर हिमाचल हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को 30 अप्रैल से पहले प्रदेश में पंचायती राज चुनाव संपन्न करवाने के निर्देश दिए. हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटाया. जिस पर आज सर्वोच्च न्यायालय ने सुनवाई की. मामले में जनहित याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता डिक्कन कुमार ठाकुर और प्रदेश के सभी 12 जिलों के जिलाधीश (DC) को भी प्रतिवादी बनाया गया था. जिलाधीशों को जिला चुनाव अधिकारी होने के नाते उन्हें मामले में पक्षकार बनाया गया था.

आपदा प्रबंधन अधिनियम का हवाला

हिमाचल प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा है कि प्रदेश में हाल ही में भारी बारिश और आपदा के कारण नुकसान हुआ है. कई स्थानों पर बहाली (रेस्टोरेशन) का कार्य अभी जारी है. सरकार का कहना है कि प्रदेश में आपदा प्रबंधन अधिनियम लागू है, इसलिए इस समय चुनाव कराना संभव नहीं है. सरकार ने यह भी तर्क दिया है कि आपदा प्रबंधन अधिनियम संसद द्वारा बनाया गया कानून है, जबकि पंचायती राज कानून राज्य विधानसभा का है. ऐसे में संसद का कानून प्राथमिकता रखता है. राज्य सरकार का कहना है कि हाईकोर्ट ने चुनाव कराने के लिए जो समय सीमा तय की है, वह पर्याप्त नहीं है. चुनाव प्रक्रिया पूरी करने के लिए अधिक समय की जरूरत है. सरकार का यह भी कहना है कि इन सभी पहलुओं पर हाईकोर्ट ने पूरी तरह विचार नहीं किया. अब इस पूरे मामले पर अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगा.

ये भी पढ़ें: RERA को लेकर SC की कड़ी टिप्पणी 'बंद कर देनी चाहिए संस्था', मामले में हिमाचल हाईकोर्ट के आदेशों पर लगाई रोक