सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले पर CJP प्रवक्ता सौरभ दास का बड़ा बयान, बोले- "युवाओं के भविष्य की जीत..."
देशभर में CJP प्रदर्शन से जुड़ी सभी FIR रद्द करने का आदेश; 5 सितंबर का इंडिया गेट मार्च रद्द.

Published : September 1, 2026 at 5:27 PM IST
नई दिल्ली: NEET पेपर लीक के खिलाफ हुए आंदोलन में छात्रों और युवाओं को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने की मांग के बीच सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में 20 से 25 जुलाई के बीच हुए छात्र प्रदर्शनों से संबंधित एफआईआर को खत्म करने का आदेश दिया है. कोर्ट के इस फैसले के बाद CJP ने 5 सितंबर को इंडिया गेट से दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक प्रस्तावित शांतिपूर्ण मार्च को रद्द कर दिया है.
CJP की प्रमुख मांगों में शामिल थी FIR खत्म करने की मांग
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने बताया कि NEET पेपर लीक के खिलाफ हुए आंदोलन के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों में छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थीं. CJP लगातार इन मामलों को वापस लेने की मांग कर रही थी. संगठन का कहना था कि इन मामलों के कारण छात्रों और युवाओं के भविष्य पर असर पड़ सकता है. सौरव दास ने बताया कि 25 जुलाई को केंद्र सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों के साथ हुई बातचीत में भी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने का आश्वासन दिया गया था. इसके साथ ही NEET पेपर लीक से प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने की मांग भी रखी गई थी.
अनुच्छेद 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट ने लिया फैसला
मंगलवार को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल किया. अदालत ने 20 से 25 जुलाई के बीच हुए संबंधित छात्र प्रदर्शनों को लेकर देशभर में दर्ज एफआईआर को बंद करने का आदेश दिया. इस फैसले के बाद इन मामलों में जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई पर रोक लग गई है. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इसी अवधि के प्रदर्शन से जुड़ी घटनाओं को लेकर भविष्य में नई एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी.
दिल्ली समेत कई राज्यों ने अदालत में दाखिल किए थे आवेदन
इस मामले में दिल्ली पुलिस के अलावा असम, बिहार, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र की ओर से भी सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दाखिल किए गए थे. इन राज्यों ने अदालत से प्रदर्शन से संबंधित एफआईआर को खत्म करने का अनुरोध किया था. सुप्रीम कोर्ट ने राहत को केवल इन राज्यों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि संबंधित प्रदर्शनों से जुड़े मामलों के लिए देशभर में आदेश जारी किया. इससे अलग-अलग राज्यों में दर्ज मामलों का एक साथ समाधान हुआ.
CJP ने 5 सितंबर को मार्च का किया था ऐलान
सीजेपी ने 24 अगस्त को 5 सितंबर को शांतिपूर्ण मार्च निकालने की घोषणा की थी. सौरव दास ने बताया कि सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने और प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने के आश्वासन को पूरी तरह लागू नहीं किया गया है. प्रस्तावित मार्च इंडिया गेट से शुरू होकर दिल्ली पुलिस के नए मुख्यालय तक जाना था. उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ FIR के मामले में बड़ा आदेश दिया है. ऐसे में CJP अब 5 सितंबर को इंडिया गेट से दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक मार्च नहीं करेगी.
गंभीर अपराध के आरोपों वाले लोगों पर जांच रहेगी जारी
सौरव दास ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश में गंभीर आपराधिक मामलों से जुड़े लोगों के लिए अलग व्यवस्था की गई है. दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान 2,873 ऐसे लोगों की पहचान किए जाने की बात कही थी, जिनकी आपराधिक पृष्ठभूमि गंभीर बताई गई. सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे मामलों की जांच जारी रखने की अनुमति दी है. दास ने बताया कि सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने यह भी कहा कि यदि प्रदर्शन से जुड़ा कोई FIR सूची में शामिल होने से छूट गया है और बाद में वह मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने आता है तो सरकार उसके खिलाफ FIR खत्म करेगी.
प्रभावित परिवारों को मुआवजे का मुद्दा भी अहम
सौरव दास ने बताया कि CJP की दूसरी प्रमुख मांग NEET पेपर लीक से प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने की रही है. संगठन लगातार इन परिवारों के संपर्क में रहा है और सरकार से सम्मानजनक मुआवजे की मांग करता रहा है. सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने का आश्वासन भी अदालत के सामने रखा गया. सरकार ने इसके लिए 90 दिनों की समयसीमा बताई है. सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के इस आश्वासन को अपने आदेश में दर्ज किया है.
CJP ने फैसले को बताया युवाओं की जीत
CJP ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को देश के छात्रों और युवाओं की बड़ी जीत बताया है. संगठन का कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य केवल विरोध करना नहीं था, बल्कि छात्रों के भविष्य को FIR और पुलिस कार्रवाई के असर से बचाना भी था. सौरव दास ने कहा कि युवाओं के सामने अब FIR का डर नहीं रहेगा और सरकार के सामने प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने की जिम्मेदारी है.
ये भी पढ़ें:

