कंवरलाल की दया याचिका और नरेश मीणा की रिहाई की मांग को लेकर समर्थकों ने किया प्रदर्शन
प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि पूर्व विधायक कंवरलाल मीणा की राज्यपाल के समक्ष लंबित दया याचिका पर शीघ्र निर्णय कराया जाए.

Published : August 25, 2026 at 4:59 PM IST
बूंदी: जिले के केशवरायपाटन में मंगलवार दोपहर को पूर्व विधायक कंवरलाल मीणा की लंबित दया याचिका पर तत्काल निर्णय कराने और नरेश मीणा की रिहाई की मांग को लेकर आदिवासी समाज का आक्रोश सड़कों पर दिखाई दिया. आदिवासी समाज से जुड़े समर्थकों ने प्रदर्शन करते हुए सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और दोनों नेताओं के मामलों में निष्पक्ष एवं न्यायपूर्ण कार्रवाई की मांग उठाई. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि लंबे समय से जेल में बंद कंवरलाल मीणा की दया याचिका पर निर्णय में देरी और नरेश मीणा की गिरफ्तारी को लेकर समाज में भारी नाराजगी है.
प्रदर्शन के दौरान सर्व आदिवासी समाज से जुड़े रवि मीणा ने बताया कि आदिवासी समाज अपने नेताओं के साथ खड़ा है और उनके साथ किसी भी तरह का अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की है कि पूर्व विधायक कंवरलाल मीणा की राज्यपाल के समक्ष लंबित दया याचिका पर शीघ्र निर्णय कराया जाए. साथ ही उन्हें स्थायी पैरोल दिए जाने के मामले पर भी मानवीय एवं संवैधानिक आधार पर विचार किया जाए.
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एक साल से अधिक समय से लंबित दया याचिका: प्रदर्शनकारियों ने बताया कि अंता विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक कंवरलाल मीणा को वर्ष 2005 के एक मामले में तीन वर्ष की सजा हुई थी. उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय द्वारा सजा को बरकरार रखे जाने के बाद मई 2025 में उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हो गई थी. इसके बाद से वह कारागृह में हैं. समर्थकों का कहना है कि उनकी दया याचिका संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत राज्यपाल के समक्ष एक वर्ष से अधिक समय से लंबित है. ऐसे में अब इस पर जल्द फैसला होना चाहिए.
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नरेश मीणा की गिरफ्तारी पर उठाए सवाल: प्रदर्शन में नरेश मीणा समर्थकों ने कहा कि 25 जुलाई, 2025 को झालावाड़ के मनोहरथाना तहसील के पीपलोदी गांव में स्कूल की छत गिरने से बच्चों की मौत और गंभीर रूप से घायल होने के बाद पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए झालावाड़ के एसआरजी अस्पताल में धरना दिया गया था. प्रदर्शनकारियों के अनुसार नरेश मीणा पर अस्पताल के आपातकालीन द्वार को अवरुद्ध करने और आईसीयू व्यवस्था बाधित करने के आरोप लगाए गए, जबकि उनका दावा है कि नरेश मीणा घटनाक्रम के दौरान आपातकालीन द्वार पर मौजूद ही नहीं थे.
उनका कहना है कि घटनास्थल की वीडियोग्राफी और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकती है. प्रदर्शनकारियों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि वीडियो फुटेज और स्वतंत्र साक्ष्यों की जांच की जाए, तो वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो जाएगी. प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने सरकार पर आदिवासी नेताओं को दबाने का आरोप लगाते हुए कहा कि दोनों मामलों को लेकर समाज में लगातार आक्रोश बढ़ रहा है.

