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मंडी में फोरलेन निर्माण के दौरान बड़ा हादसा, पहाड़ी से गिरे पत्थर की चपेट में आकर सुपरवाइजर की मौत

हादसे के तुरंत बाद उन्हें कुल्लू अस्पताल से एम्स बिलासपुर रेफर किया गया. हालांकि इलाज के दौरान मोहर सिंह ने दम तोड़ दिया.

SUPERVISOR DIED IN AUT MANDI
पहाड़ी से गिरे पत्थर की चपेट में आकर सुपरवाइजर की मौत (CONSTRUCTION COMPANY)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : February 8, 2026 at 5:28 PM IST

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Updated : February 8, 2026 at 5:36 PM IST

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मंडी: हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के औट तहसील के शालानाल क्षेत्र में फोरलेन निर्माण कार्य के दौरान एक दर्दनाक हादसा सामने आया है. पहाड़ी से अचानक गिरे भारी पत्थर की चपेट में आने से निर्माण कंपनी में कार्यरत एक सुपरवाइजर की मौत हो गई. इस घटना ने न केवल मृतक के परिवार को गहरे शोक में डुबो दिया है, बल्कि निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

कैसे हुआ हादसा?

जानकारी के अनुसार, 42 वर्षीय मोहर सिंह, निवासी शालानाल (टनीपरी), थलौट के पास फोरलेन निर्माण स्थल पर नाली सफाई कार्य की निगरानी कर रहे थे. इसी दौरान ऊपर पहाड़ी से अचानक एक विशाल पत्थर गिरा, जो सीधे मोहर सिंह को जा लगा. टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि वे मौके पर ही बुरी तरह घायल हो गए. हादसे के तुरंत बाद सहकर्मियों और स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें प्राथमिक उपचार के लिए कुल्लू अस्पताल ले जाया गया. वहां चिकित्सकों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें उच्च चिकित्सा सुविधा के लिए एम्स बिलासपुर रेफर कर दिया. दुर्भाग्यवश इलाज के दौरान मोहर सिंह ने दम तोड़ दिया. वे संबंधित निर्माण कंपनी में बतौर सुपरवाइजर अपनी सेवाएं दे रहे थे.

गांव और परिवार में मातम

मोहर सिंह की असामयिक मौत की खबर जैसे ही उनके पैतृक गांव पहुंची तो पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई. परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. स्थानीय लोग उन्हें एक जिम्मेदार और मेहनती व्यक्ति बताते हैं. एनएचएआई पीआईयू मंडी के परियोजना निदेशक वरुण चारी ने इसे एक आकस्मिक दुर्घटना बताया है. वहीं औट के तहसीलदार रमेश राणा ने पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना जताते हुए प्रशासन की ओर से 25,000 रुपये की फौरी राहत राशि प्रदान की है. प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि नियमानुसार आगे की सहायता और औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी.

सुरक्षा इंतजामों पर उठे सवाल

इस हादसे के बाद फोरलेन निर्माण स्थलों पर सुरक्षा उपायों को लेकर फिर से बहस शुरू हो गई है. स्थानीय लोगों और श्रमिक संगठनों ने मांग की है कि पहाड़ी क्षेत्रों में काम के दौरान सुरक्षा जाल, चेतावनी प्रणाली और श्रमिकों के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपकरण अनिवार्य किए जाएं, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके.

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Last Updated : February 8, 2026 at 5:36 PM IST