आसमान के सफाईकर्मी बढ़े, पन्ना टाइगर रिजर्व में रिकॉर्ड 785 गिद्ध, पिछले साल से 54 ज्यादा
पन्ना टाइगर रिजर्व में गिद्धों की ग्रीष्मकालीन गणना संपन्न, 785 गिद्ध वल्चर दर्ज किए गए, भारतीय गिद्ध की संख्या 604 रही.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : May 25, 2026 at 8:21 AM IST
|Updated : May 25, 2026 at 8:50 AM IST
पन्ना: मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व में हर साल अप्रैल एवं मई माह में गिद्धों की गणना की जाती है. इस वर्ष भी यह गणना की गई. यह गणना 22, 23 और 24 मई को संपन्न हुई. इस वर्ष, साल 2025 से 54 गिद्ध अतिरिक्त संख्या में पाए गए हैं. वन विभाग द्वारा ग्रीष्मकालीन में गिद्धों की गणना इसलिए कराई जाती है क्योंकि गिद्ध ग्रीष्मकालीन में पानी के स्रोतों के पास और चट्टानों के पास उपलब्ध रहते हैं.
पन्ना टाइगर रिजर्व में गिद्धों की 7 प्रजातियां
पन्ना टाइगर रिजर्व के जंगल जैव विविधता के कारण विश्व विख्यात हैं. यहां पर अनेक प्रकार की वनस्पति, औषधीय एवं तरह-तरह के वन्य प्राणी निवास करते हैं. पन्ना टाइगर रिजर्व में गिद्धों की 7 प्रजातियां पाई जाती हैं. इस वर्ष 2026 में पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन द्वारा गिद्धों की गणना कराई गई जिसमें सकारात्मक उपलब्धि हासिल हुई है.
गणना में मिले 785 गिद्ध
इस वर्ष 54 गिद्ध पिछली बार से अधिक मिले हैं. जिसमें वयस्क गिद्ध 731 एवं उप वयस्क गिद्ध 43 पाए गए. टोटल गिद्धों की संख्या इस 785 पाई गई जो पिछली बार से 54 अधिक है. इसमें प्रजाति वार भी गिद्ध चिन्हित किए गए. जिसमें भारतीय गिद्ध की संख्या 604 रही. मिस्र के गिद्ध (Egyptian vulture) 46, सफेद पीठ वाले गिद्ध (White-rumped) 43 और राज गिद्ध (King vulture) 21 पाए गए.

गिद्धों की गणना के लिए पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन द्वारा विशेष दल गठित किए गए थे. उनके द्वारा तीन दिनों की गिद्ध गणना की गई. गर्मी की मौसम में गिद्धों की गणना करना आसान होता है. क्योंकि पानी के स्रोतों एवं चट्टानों एवं घने जंगलों में आसानी से दिख जाते हैं और सर्दियों में प्रवासी गिद्ध की संख्या ज्यादा बढ़ जाती है.

पन्ना टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर बी.के.पटेल ने जानकारी देते हुए बताया कि, ''पिछले वर्ष 2025 में ग्रीष्मकालीन गिद्धों की गणना में 731 गिद्ध पाए गए थे. 2026 में ग्रीष्मकालीन गिद्धों की गणना में 785 गिद्ध पाए गए जो पिछली बार से 54 अधिक हैं. यह पन्ना टाइगर रिजर्व की जैव विविधता, पर्यावरण संरक्षण एवं प्रतिकूल जलवायु और सुरक्षित रहवास का प्रमाण है.''

- जनगणना में सागर की बड़ी उपलब्धि, मकान सूचीकरण और गणना में मिला प्रदेश में पहला स्थान
- प्रदेशभर में होगी कुदरत के सफाईकर्मियों की गिनती, कान्हा टाइगर रिजर्व में खास तकनीक का इस्तेमाल
- मुरैना के पहाड़गढ़ में मिले सबसे अधिक गिद्ध, स्वच्छता दूतों की संख्या दे रही शुभ संकेत
गिद्ध संरक्षण के लिए चला अभियान
दक्षिण पन्ना में गिद्ध संरक्षण को लेकर विगत डेढ़ वर्षों में कई नवाचारी पहलें संचालित की गई हैं. 'वल्चर फ्रेंडली गौशाला सर्टिफिकेशन' अभियान के तहत गौशालाओं, पशु चिकित्सालयों, मेडिकल स्टोर्स एवं ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक जनजागरूकता चलाई गई. इस दौरान गिद्धों के लिए घातक प्रतिबंधित पशु औषधियों जैसे डाइक्लोफेनाक, एसिक्लोफेनाक, केटोप्रोफेन एवं निमेसुलाइड के स्थान पर सुरक्षित विकल्पों के उपयोग को बढ़ावा दिया गया. साथ ही नए गिद्ध बहुल क्षेत्रों की पहचान, घोंसला स्थलों की निगरानी, नियमित फील्ड मॉनिटरिंग एवं संवेदनशील क्षेत्रों में संरक्षण गतिविधियां निरंतर संचालित की गईं.

प्रकृति को साफ रखते हैं गिद्ध
गिद्ध प्रकृति के अत्यंत महत्वपूर्ण सफाईकर्मी माने जाते हैं. ये मृत पशुओं के शवों को तेजी से साफ कर पर्यावरण में संक्रमण फैलाने वाले जीवाणुओं एवं बीमारियों को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. गिद्धों की बढ़ती संख्या किसी भी क्षेत्र के स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र एवं बेहतर जैव विविधता का संकेत मानी जाती है. दक्षिण पन्ना वनमण्डल में गिद्धों की यह उल्लेखनीय उपस्थिति क्षेत्र में किए जा रहे सतत संरक्षण प्रयासों की सफलता को दर्शाती है. जो मध्य भारत में गिद्ध संरक्षण के लिए एक सकारात्मक उदाहरण के रूप में उभर रही है.

