कौन हैं बिहार के सुमन शेखर, जिनका असम में बजा डंका, मुरीद हुए CM बिस्वा
बिहार के युवा इंजीनियर सुमन शेखर का डंका असम तक में बज रहा है, जिन्होंने असम विधानसभा को डिजिटल असेंबली बना दिया है.

Published : February 19, 2026 at 3:20 PM IST
औरंगाबाद: बिहार के औरंगाबाद के एक लाल असम की डिजिटल क्रांति के चेहरे बन गए हैं. उनकी कोशिशों से अब असम के विधायकों को पुराने दस्तावेजों के लिए महीनों इंतजार नहीं करना पड़ेगा और 1937 से लेकर अबतक की कार्यवाही की सारी जानकारी चुटकियों में उपलब्ध हो जाएगी.
असम विधानसभा का डिजिटलीकरण :औरंगाबाद जिले के कुटुम्बा प्रखंड के चिरइयांटांड़ गांव के रहने वाले युवा टेक्नोलॉजी उद्यमी सुमन शेखर ने ऐसा काम कर दिखाया है, जिसने पूरे जिले का मान बढ़ा दिया है. इंजीनियर सुमन शेखर के नेतृत्व में तैयार की गई प्रणाली ने असम विधानसभा को पूरी तरह डिजिटल स्वरूप देने में अहम भूमिका निभाई है.

बिहार के इंजीनियर का कमाल: दरअसल सुमन शेखर द्वारा बनाये गए ऐप को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने लांच किया है. ऐप की खासियत यह है कि उसमें 1937 से अब तक की विधानसभा कार्यवाही का डिजिटाइजेशन किया गया है, जिसे 4 भाषाओं में देखा जा सकता है. इस पहल को देश की सबसे उन्नत डिजिटल विधानसभाओं में गिना जा रहा है.
4 भाषाओं में संवाद: इस प्रोजेक्ट में इंजीनियर सुमन शेखर और उनकी टीम ने एआई व मशीन लर्निंग आधारित 'ALISA' ए आई फ़ॉर लेजिस्लेटिव इंटेलिजेंस सिस्टम ऑफ असम नामक एप्लिकेशन तैयार किया है. यह ऐप 4 भाषाओं हिंदी, अंग्रेजी, असमिया और बोडो में संवाद कर सकता है और आम उपयोगकर्ताओं के लिए भी बेहद सरल बनाया गया है.
असम के सीएम ने की प्रशंसा: सोमवार को असम विधानसभा कक्ष में इस एप्लिकेशन का औपचारिक शुभारंभ किया गया. कार्यक्रम में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और विधानसभा अध्यक्ष बिश्वजीत डिमरी ने संयुक्त रूप से अनावरण किया. मुख्यमंत्री ने इसे डिजिटल शासन की दिशा में बड़ा कदम बताते हुए सुमन और उनकी टीम की खुलकर सराहना की.
"अब विधायकों को पुराने दस्तावेजों के लिए महीनों इंतजार नहीं करना पड़ेगा सब कुछ चुटकियों में उपलब्ध होगा."- बिश्वजीत डिमरी, असम विधानसभा अध्यक्ष
अंबा से असम की जर्नी: सुमन शेखर का सफर भी प्रेरणादायक रहा है. मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे सुमन की शुरुआती पढ़ाई अम्बा क्षेत्र के स्कूलों में हुई. उसने इंटर की पढ़ाई सच्चिदानंद सिन्हा कॉलेज औरंगाबाद से की. इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए वह जयपुर गया, जहां से पढ़ाई करने के बाद गुरुग्राम में अपनी कंपनी अभास्त्रा फाउंडेशन की स्थापना की.
प्रकृति प्रेमी हैं सुमन शेखर: उस कम्पनी के तहत शिक्षा, लॉजिस्टिक्स, रेलवे और सरकारी तकनीकी समाधान जैसे क्षेत्रों में काम शुरू किया. साथ ही राजनीतिक तंत्र में डिजिटल तकनीक के उपयोग पर भी कई नवाचार जारी रखा. तकनीक के साथ-साथ सुमन शेखर का प्रकृति प्रेम भी मिसाल है. वह वर्षों से अपने गांव में पक्षियों के लिए लकड़ी के घोंसले लगवा रहा है. पौधारोपण अभियान चला रहा है और पर्यावरण संरक्षण को लेकर युवाओं को जागरूक कर रहा है.
माता-पिता को दिया सफलता का श्रेय: अपनी सफलता का श्रेय सुमन ने अपने माता-पिता, शिक्षकों और मित्रों को दिया है. पिछले कुछ दिनों से क्रिकेट खिलाड़ी ईशान किशन को लेकर चर्चा में रहा औरंगाबाद जिला फिर से चर्चा में है. भारत के विभिन्न क्षेत्र में जिले के युवा लगातार सफलता के झंडे गाड़ रहे हैं.
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