अब सुक्खू सरकार खुद लेगी सभी छह यूनिवर्सिटीज के वित्तीय फैसला, वित्त सचिव होंगे कमेटी के मुखिया, मानसून सेशन में कुल छह बिल
हिमाचल प्रदेश विधानसभा मानसून सत्र के दौरान सुखविंदर सरकार ने सदन में पेश किए 6 महत्वपूर्ण बिल.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : September 1, 2026 at 10:07 PM IST
शिमला: पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश के सभी छह विश्वविद्यालयों से जुड़े वित्तीय फैसले अब सरकार खुद लेगी. यूनिवर्सिटीज में फाइनेंस कमेटी के मुखिया अब राज्य सरकार के वित्त सचिव होंगे. इससे पहले फाइनेंस कमेटी की अगुवाई वाइस चांसलर या उनके किसी नॉमिनी की तरफ से की जाती रही है. राज्य सरकार ने इस फैसले को लेकर विधानसभा के मानसून सेशन में बिल पेश किया है. इस मानसून सेशन में कुल छह बिल रखे गए हैं. सेशन तीन सितंबर को खत्म हो रहा है. ऐसे में दो दिन की अवधि में ये बिल पारित करने होंगे.
राज्य सरकार ने तय किया है कि प्रदेश के सभी छह यूनिवर्सिटीज में अब नई भर्तियों की प्रक्रिया हिमाचल प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन या फिर राज्य चयन आयोग हमीरपुर के माध्यम से होंगी. सुक्खू सरकार का मकसद है कि यूनिवर्सिटीज में वित्तीय अनुशासन और भर्तियों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बिल सदन के पटल पर रखा जाए. इसके लिए सुक्खू सरकार ने विधानसभा में हिमाचल प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक-2026 पटल पर रखा है. इस बिल को कल यानी बुधवार 2 सितंबर को सदन में चर्चा के लिए लिया जाएगा.
हिमाचल विधानसभा के मानसून सेशन में मंगलवार पहली सितंबर को कुल छह बिल पटल पर रखे गए. सेशन की अवधि अब केवल दो दिन की है. ऐसे में ये सभी बिल दो दिन के भीतर पारित होने हैं. यदि राज्य में यूनिवर्सिटीज से संबंधित बिलों की बात की जाए तो इसके दायरे में एचपीयू शिमला, चौधरी सरवण कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर, डॉ. वाईएस परमार यूनिवर्सिटी ऑफ हार्टीकल्चर एंड फॉरेस्ट्री नौणी सोलन, सरदार पटेल यूनिवर्सिटी मंडी, हिमाचल प्रदेश तकनीकी यूनिवर्सिटी हमीरपुर, अटल मेडिकल रिसर्च यूनिवर्सिटी नेरचौक मंडी शामिल है.
इसके अलावा हिमाचल सरकार ने भारतीय स्टाम्प अधिनियम 1899 में संशोधन के लिए भी एक बिल सदन में लाया है. इसके लिए 2023 और 2026 में हिमाचल विधानसभा में रखे गए 2 बिलों को वापस ले लिया गया है. नए बिल के माध्यम से स्टाम्प अधिनियम के शेड्यूल-वन में संशोधन होगा. इसमें सभी तरह के स्टाम्प शुल्क बढ़ाए जाएंगे. मानसून सेशन में प्रदेश सरकार की तरफ से कुछ महीने पहले जारी किए गए दो आर्डिनेंस भी बिल के रूप में सदन के पटल पर रखे गए हैं. इसमें पंचायती राज एक्ट में चुनाव से पहले एक संशोधन हुआ था. उस संशोधन में प्रावधान था कि यदि ससुर ने अवैध कब्जे किए हैं तो उस स्थिति में बहू को भी चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित कर दिया था.
दूसरी तरफ शिमला रोड यूजर्स एक्ट में संशोधन कर परमिट की फीस को 15000 से घटाकर 8000 रुपये कर दिया था. इन दोनों से जुड़े प्रावधानों वाले बिलों को भी सदन में पेश कर दिया गया है. इसके अलावा मानसून सेशन में एक बिल जीएसटी संशोधन का है. साथ ही राज्य सरकार हिमाचल प्रदेश युद्ध पुरस्कार अधिनियम 1972 में संशोधन के साथ ही युद्ध जागीर की राशि को सात हजार रुपए से बढ़ाकर दस हजार रुपए करने से जुड़ा बिल भी है.
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