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हिमाचल सरकार के खजाने को मिलेगी सुख की सांस, कुल्लू की तीन परियोजनाओं से होगी इतने करोड़ की कमाई

हिमाचल प्रदेश में स्थापित बिजली परियोजनाओं से सरकार लैंड रेवन्यू वसूलेगी.

CM Sukhvinder Singh Sukhu
सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू (FILE)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : December 19, 2025 at 8:40 PM IST

3 Min Read
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शिमला: भारी कर्ज में डूबे छोटे पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश के लिए यहां की नदियां बहते पैसे सरीखी साबित होने वाली हैं. हिमाचल में स्थापित बिजली परियोजनाओं से राज्य सरकार दो फीसदी लैंड रेवेन्यू वसूलेगी. ऊर्जा निदेशालय से तकनीकी मदद के बाद बंदोबस्त यानी सेटलमेंट डिपार्टमेंट ने बिजली परियोजनाओं के औसत बाजार मूल्य का आकलन किया है. उसके आधार पर यानी परियोजना के औसत बाजार मूल्य के आधार पर दो फीसदी लैंड रेवेन्यू वसूला जाना है. इसे लेकर सारी प्रक्रिया पूरी हो गई है.

इसी कड़ी में शुक्रवार को कांगड़ा मंडल के भू-व्यवस्था अधिकारी की तरफ से कुल्लू में स्थापित तीन परियोजनाओं का औसत बाजार मूल्य व लैंड रेवेन्यू का आकलन कर अधिसूचना जारी कर दी है. इस अधिसूचना के अनुसार मलाणा-दो, सैंज हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट व नेशनल हाइड्रो पावर कारपोरेशन लिमिटेड के पार्वती-दो प्रोजेक्ट से 148 करोड़ रुपए से अधिक का राजस्व आएगा.

इनमें पहली दो परियोजनाओं से क्रमश: 14.84 करोड़ प्रति परियोजना व एनएचपीसी की पार्वती-दो से 118. 72 करोड़ रुपए लैंड रेवेन्यू आएगा. पहली दो परियोजनाओं का औसत बाजार मूल्य 742 करोड़ रुपए प्रति परियोजना है. इसका दो फीसदी लैंड रेवेन्यू 14.84 करोड़ रुपए प्रति प्रोजेक्ट बनता है. इसी प्रकार पार्वती-दो परियोजना का औसत बाजार मूल्य 5936 करोड़ रुपए है. इसका लैंड रेवेन्यू 118.72 करोड़ रुपए बनता है.

बिजली परियोजनाओं से लैंड रेवन्यू के तहत होगी कमाई
बिजली परियोजनाओं से लैंड रेवन्यू के तहत होगी कमाई (Notification)

सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने हिमाचल में बिजली परियोजनाओं से करीब दो हजार करोड़ रुपए का रेवेन्यू जुटाने का इंतजाम किया है. हिमाचल में संचालित की जा रही 188 बिजली परियोजनाओं पर बाजार मूल्य का दो प्रतिशत भू-राजस्व लागू किया गया है. यानी हिमाचल में बिजली प्रोजेक्टों को अपनी परियोजना के औसत बाजार मूल्य का दो प्रतिशत लैंड रेवेन्यू चुकाना होगा.

ऊर्जा निदेशालय ने जो आकलन किया है, उसके अनुसार लैंड रेवेन्यू की रकम कम से कम दो हजार करोड़ रुपए बनती है. पूर्व में राज्य सरकार के मुख्य सचिव संजय गुप्ता की तरफ से इस बारे में अधिसूचना जारी की गई थी. अधिसूचना के मुताबिक पूर्व में कांगड़ा व शिमला मंडलों के सेटलमेंट ऑफिसर्स यानी बंदोबस्त अधिकारियों को ऊर्जा विभाग से जरूरी तकनीकी सहायता मिलने के बाद उन्होंने परियोजनाओं के औसत बाजार वैल्यू को अंतिम रूप दिया था. पहली जनवरी 2026 से ये प्रावधान लागू होंगे.

ईटीवी भारत में 12 दिसंबर को कुछ परियोजनाओं से आने वाले लैंड रेवेन्यू से जुड़ी अधिसूचना वाली खबर प्रकाशित की थी. अब एक और अधिसूचना में तीन परियोजनाओं के लैंड रेवेन्यू का आकलन कर दिया गया है. पूर्व में किन्नौर जिला में स्थापित परियोजनाओं से 454.55 करोड़, शिमला जिला में स्थापित बिजली परियोजनाओं से 314,26 करोड़, बिलासपुर जिला की परियोजनाओं से 346.177 करोड़, सिरमौर जिला से 10.68 करोड़ रुपए से अधिक रेवेन्यू का आकलन हुआ था.

किन्नौर की 1000 मेगावाट की करछम वांगतू परियोजना से 155 करोड़ रुपए से अधिक रेवेन्यू मिलेगा. डेढ़ हजार मेगावाट की नाथपा-झाकड़ी परियोजना से 222 करोड़ रुपए से अधिक मिलेंगे. शिमला जिला के रामपुर में स्थापित एसजेवीएनएल परियोजना से 222.60 करोड़ की भू-राजस्व मिलेगा. रामपुर में ही एसजेवीएनएल की एक अन्य परियोजना से 61 करोड़ रुपए से अधिक हासिल होंगे. बिलासपुर जिला में बीबीएमबी से 227.45 व एनटीपीसी परियोजना से 118.72 करोड़ का भू-राजस्व खजाने में आएगा. अब तीन परियोजनाओं का और ब्यौरा आया है, जिनसे 148 करोड़ रुपए से अधिक का भू-राजस्व खजाने में आएगा.

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