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हिमाचल में ATS और DTC साथ लगाए तो खुल जाएगा सब्सिडी का खजाना, जानिए कितने करोड़ मिलेंगे?

हिमाचल प्रदेश की सुखविंदर सरकार अब ऑटोमेटिक टेस्टिंग स्टेशन और ड्राइविंग टेस्टिंग सेंटर को क्लस्टर में एक साथ स्थापित करने की योजना लेकर आई है.

डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री
डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : February 25, 2026 at 4:05 PM IST

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Updated : February 25, 2026 at 5:20 PM IST

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शिमला: हिमाचल प्रदेश में परिवहन व्यवस्था को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है. प्रदेश सरकार अब ATS (ऑटोमेटिक टेस्टिंग स्टेशन) और DTC (ड्राइविंग टेस्टिंग सेंटर) को क्लस्टर में एक साथ स्थापित करने की योजना लेकर आई है. शिमला में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि इस महत्वाकांक्षी पहल के तहत निजी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सरकार करीब 4 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी दे रही ही है.

डिप्टी सीएम ने बताया, 'हिमाचल में कांगड़ा और बिलासपुर में DTC स्थापित किए जा रहे हैं. हिमाचल पहाड़ी क्षेत्र है. यहां लैंड होल्डिंग कम है, इसलिए हमने केंद्र सरकार से ATS और DTC लगाने के लिये जमीन के लिए तय किये गैर मानकों में छूट देने का आग्रह किया है. इसके साथ ही हमने ATS और DTC के अलग-अलग जगहों पर लगाने की भी सेंक्शन देने की मांग की है'.

फैंसी नंबरों की ई-नीलामी से कमाए इतने करोड़

डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि 1 जनवरी, 2023 से 23 फरवरी 2026 तक फैंसी नंबरों की ई-नीलामी के माध्यम से सरकार को कुल 80.82 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ है. प्रदेश सरकार ने विशेष पंजीकरण संख्या 0001 को ई-नीलामी के माध्यम से आम जनता के लिए 10 नवंबर 2023 से खोला है. अभी तक ई-नीलामी के माध्यम से कुल 47 वाहनों को विशेष पंजीकरण संख्या 0001 आवंटित किया गया है, जिससे कुल 4.44 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ है.

हिमाचल के डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री (ETV Bharat)

नए वाहनों का डीलर स्तर पर स्थायी पंजीकरण

डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि वाहन स्वामियों के हित की सुविधा भविष्य में नए वाहनों का स्थायी पंजीकरण डीलर स्तर पर ही किया जाएगा. इस संबंध में एक नई कार्यप्रणाली तैयार की जा रही है, जिसके अंतर्गत अधिकृत मोटर वाहन डीलरों को ही नए वाहनों का पंजीकरण करने की सुविधा प्रदान की जाएगी. इससे वाहन क्रेताओं को पंजीकरण प्रक्रिया के लिए अलग से परिवहन कार्यालयों (RLA/RTO) के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे. उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था लागू होने पर नए वाहन क्रेताओं को वाहन डिलीवरी के साथ ही स्थायी पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी और अस्थायी पंजीकरण (temporary registration) की व्यवस्था को समाप्त किया जा सकेगा.

विंटेज गाड़ियों की पहली बार होगी रजिस्ट्रेशन

हिमाचल में अब 50 साल पुरानी गाड़ियों को विंटेज घोषित किया गया हैं. डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री ने कहा, 'हम भविष्य में विंटेज गाड़ियों की रजिस्ट्रेशन शुरू करने जा रहे हैं. अंग्रेजों के समय में पुरानी गाड़ियों को विंटेज माना जाता था, लेकिन अब देश आजाद हो गया है. इसलिए हिमाचल में 1975 से पहले यानि 50 साल पुरानी गाड़ियों को विंटेज घोषित किया गया है. जिसके लिए AVA नाम की प्लेट जारी होगी. हिमाचल में वाहनों की स्क्रेपिंग सुविधा वैज्ञानिक और पर्यावरण अनुकूल तरीके से की जा रही है. अभी तक प्रदेश में इस माध्यम से 2257 वाहनों की स्क्रैपिंग की जा चुकी है.

ट्रांसपोर्ट डिपार्मेंट बना कमाऊ पूत

डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि हमारी सरकार के समय में ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट में 3 सालों में 2744 करोड़ का रेवेन्यू अर्जित किया हैं. वहीं, पूर्व की सरकार के समय में तीन सालों का यही राजस्व 1564 करोड़ का था. इस तरह से विभाग के राजस्व में 75 फीसदी की वृद्धि हुई है.

उन्होंने कहा कि विभाग ने एक साल में ही 1 हजार करोड़ का रेवेन्यू कमाया है. वहीं, केंद्र सरकार के सभी मानकों को पूरा करते हुए हमें 93 करोड़ की प्रोत्साहन राशि भी मिली है. उन्होंने कहा कि वर्ष 2023-24 में हमें 25 करोड़, वर्ष 2024-25 करोड़ में हमें 28.71 करोड़ और वर्ष 2025-26 में हमें 93 करोड़ की मिले हैं.

इस नंबर की बिक्री से कमाए 4.50 करोड़

डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि 0001 की बिक्री से भी ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट को 4.50 करोड़ की कमाई हुई है. इसमें अगर तीन अधिक महंगे नंबरों की बात करें तो 3 जून 2024 को HP 97 001 नंबर 20 लाख में बिका था. इसी तरह से RTO सोलन के तहत HP 64 0001 नंबर की बिक्री से 18.50 लाख की आय प्राप्त हुई थी. वहीं, थुनाग में HP 87 0001 नंबर 18 लाख में नीलाम हुआ था.

टैक्सी परमिट की अवधि हुई 15 साल

डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि की टैक्सियों की लाइव 15 साल होती थी. जबकि इनको परमिट 12 साल का जारी किया जाता था. लेकिन टैक्सी चालकों की लगातार मांग पर हमने पहल करते हुए केंद्र सरकार से मामला उठाया. अब केंद्र सरकार ने नोटिफाई करते हुए इसका परमिट 15 साल कर दिया है. उन्होंने कहा कि लोग अब ट्रैकों के नेशनल परमिट को भी 15 साल करने की मांग कर रहे हैं. इसे भी केंद्र सरकार के समक्ष उठाया जाएगा.

डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री ने कहा, 'लोगों को ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट की लंबी कतारें न लगानी पड़े, इसके लिए हमने गुड्स नेशनल और टूरिस्ट परमिट को ऑटो अप्रूवल पर लाया है. अब किसी को भी आरटीओ के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे. प्रदेश में 65,743 लोग इस प्रणाली का लाभ उठा चुके हैं.

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Last Updated : February 25, 2026 at 5:20 PM IST