हिमाचल में सुक्खू सरकार का नया प्लान, इतने हजार किसान होंगे मालामाल!
हिमाचल में प्राकृतिक खेती और किसानों को समृद्ध बनाने को लेकर सुक्खू सरकार ने नई योजना तैयार की है.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : May 20, 2026 at 12:53 PM IST
|Updated : May 20, 2026 at 12:59 PM IST
शिमला: हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक खेती को लेकर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार ने ऐसा बड़ा दांव खेला है, जिसने प्रदेश के हजारों किसानों और बागवान परिवारों के लिए समृद्धि के नए रास्ते खोल दिए हैं. इस साल सुक्खू सरकार ने 63 हजार किसानों से प्राकृतिक खेती के उत्पाद महंगे दामों पर खरीदने का लक्ष्य तय किया है, जो गांवों की आर्थिक तस्वीर बदलने का जरिया बन सकता है. प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी “राजीव गांधी प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना” ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बनती दिख रही है. जलवायु परिवर्तन, बढ़ती खेती लागत, मिट्टी की घटती उर्वरता और जंगली जानवरों से फसलों को होने वाले नुकसान के बीच प्राकृतिक खेती किसानों के लिए राहत की नई राह बनकर उभरी है.
MSP तय करने वाला बना पहला राज्य
खास बात यह है कि हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य बन चुका है, जिसने प्राकृतिक खेती से तैयार फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया है. इससे किसानों को बाजार की मार से सुरक्षा मिलने के साथ-साथ प्राकृतिक खेती अपनाने का बड़ा हौसला भी मिला है. सरकार ने इस दिशा में बड़ा लक्ष्य तय करते हुए इस साल एक लाख नए किसानों को “हिम परिवार रजिस्टर” से जोड़ने की योजना बनाई है. अब तक 70 हजार से ज्यादा किसान इस रजिस्टर से जुड़ चुके हैं. यह व्यवस्था हिमाचल प्रदेश के किसानों तक सरकारी योजनाओं का सीधा और पारदर्शी लाभ पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रही है.
इतने किसानों ने अपनाई प्राकृतिक खेती
सीएम सुक्खू ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि आने वाले सालों में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) योजना से जुड़ने वाले किसानों की संख्या लगातार बढ़ाई जाए, ताकि गांवों की अर्थव्यवस्था मजबूत हो और गांव की पूंजी गांव में ही टिक सके. प्रदेश में फिलहाल 2 लाख 23 हजार से ज्यादा कृषक और बागवान परिवार पूरी या आंशिक रूप से प्राकृतिक खेती अपना चुके हैं. यह अभियान अब 99.3 प्रतिशत ग्राम पंचायतों तक पहुंच चुका है. वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में सरकार ने प्राकृतिक गेहूं 80 रुपए प्रति किलो, मक्की 50 रुपए, कच्ची हल्दी 150 रुपए, पांगी घाटी की जौ 80 रुपए और अदरक 30 रुपए प्रति किलो की दर से खरीदी जा रही है.
अब तक किसानों के खाते में ₹6.40 करोड़ ट्रांसफर
हिमाचल सरकार के आंकड़ों के अनुसार अब तक 7,382 किसानों से 11,329 क्विंटल गेहूं, मक्की, हल्दी और जौ की खरीद की जा चुकी है, जिसके बदले किसानों के खातों में 6.40 करोड़ रुपये सीधे ट्रांसफर किए गए हैं. वहीं, इस साल कृषि विभाग ने करीब 63 हजार किसानों से प्राकृतिक खेती की उपज खरीदने का लक्ष्य रखा है. खास बात यह भी है कि प्राकृतिक गेहूं खरीद में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज हुई है. पिछले साल जहां 838 किसानों से गेहूं खरीदा गया था. वहीं, इस बार यह आंकड़ा बढ़कर करीब 2,022 तक पहुंच गया है.
प्राकृतिक खेती से हिमाचल में आर्थिक क्रांति
वहीं, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का कहना है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) केवल फसलों की कीमत तय करने का फैसला नहीं, बल्कि किसानों के विश्वास और मेहनत का सम्मान है. यही वजह है कि छोटे और सीमांत किसान तेजी से प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ रहे हैं. सरकार अब प्राकृतिक उत्पादों के मूल्य संवर्द्धन और विपणन पर भी जोर दे रही है, ताकि किसानों को उनकी उपज का और बेहतर दाम मिल सके. पिछले साल खरीदे गए प्राकृतिक उत्पादों में से 420 क्विंटल गेहूं का आटा, 1,370 क्विंटल दलिया, 1,628 क्विंटल मक्की आटा और 59 क्विंटल जौ का आटा तैयार कर खाद्य आपूर्ति निगम और कृषि विभाग के जरिए बाजार में उतारा गया. हिमाचल में प्राकृतिक खेती अब सिर्फ खेती का तरीका नहीं, बल्कि गांवों की आर्थिक क्रांति का नया अध्याय बनती नजर आ रही है.

