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सुक्खू सरकार के 'हिम चंडीगढ़' प्रोजेक्ट का विरोध शुरू, जमीन अधिग्रहण को लेकर भड़के ग्रामीण

सुक्खू सरकार के ऐतिहासिक 'हिम चंडीगढ़' प्रोजेक्ट का विरोध शुरू हो गया है. ग्रामीणों ने इस प्रोजेक्ट का विरोध किया है.

HIM CHANDIGARH PROJECT
ग्रामीणों ने किया सुक्खू सरकार के 'हिम चंडीगढ़' प्रोजेक्ट का विरोध (ETV BHARAT)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : January 6, 2026 at 9:35 PM IST

2 Min Read
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सोलन: हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार द्वारा बद्दी क्षेत्र में प्रस्तावित 'हिम चंडीगढ़' परियोजना का स्थानीय स्तर पर विरोध शुरू हो गया है. मलपुर और संडोली पंचायतों के ग्रामीणों ने न्यू टाउनशिप के खिलाफ खुलकर नाराजगी जताई है.लोगों का कहना है कि इस योजना से वे भूमिहीन हो जाएंगे और उनका भविष्य खतरे में पड़ जाएगा.

न्यू टाउनशिप के खिलाफ एकजुट हुए ग्रामीण

मंगलवार को शीतलपुर में आयोजित बैठक में मलपुर और संडोली पंचायतों के लोगों ने एक स्वर में न्यू टाउनशिप का विरोध किया. ग्रामीणों का कहना है कि उनकी जमीन पहले ही फोरलेन और रेलवे परियोजनाओं में चली गई है. अब बची हुई जमीन को भी टाउनशिप के नाम पर अधिकृत किया जा रहा है. लोगों ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने जबरन जमीन ली तो वे आंदोलन करेंगे और अदालत का दरवाजा भी खटखटाएंगे.

ग्रामीणों ने किया सुक्खू सरकार के 'हिम चंडीगढ़' प्रोजेक्ट का विरोध (ETV BHARAT)

ग्रामीणों को भूमिहीन होने का डर

संडोली पंचायत के पूर्व प्रधान भाग सिंह कुंडलस ने कहा कि टाउनशिप बनने से स्थानीय लोग पूरी तरह भूमिहीन हो जाएंगे. उन्होंने कहा कि इलाके के लोगों का मुख्य व्यवसाय खेती-बाड़ी और दूध उत्पादन है. जमीन खत्म होने से ये पुश्तैनी काम अपने आप समाप्त हो जाएंगे.

पहले ही जा चुकी है काफी जमीन

नंबरदार चरण दास ने कहा कि फोरलेन और रेलवे परियोजनाओं में कई किसान पहले ही अपनी जमीन खो चुके हैं. कई परिवारों के पास अब मकान बनाने तक की जमीन नहीं बची है.उन्होंने कहा कि नई टाउनशिप से दोनों पंचायतें उजड़ने की कगार पर पहुंच जाएंगी.

वहीं, नंबरदार भगत राम ने कहा कि जो सरकारी शामलात जमीन है, उस पर स्थानीय लोगों का पारंपरिक अधिकार है. टाउनशिप बनने से लोग इस अधिकार से भी वंचित हो जाएंगे.

क्या है 'हिम चंडीगढ़' प्रोजेक्ट?

हिम चंडीगढ़ परियोजना के तहत सरकार बद्दी और चंडीगढ़ सीमा से सटे इलाके में चंडीगढ़ की तर्ज पर एक नया आधुनिक शहर बसाना चाहती है. इस योजना में करीब 9 हजार बीघा सरकारी जमीन और 10 हजार बीघा से अधिक स्थानीय लोगों की जमीन शामिल है. सरकार इसे नियोजित शहरी विकास, आधुनिक सुविधाओं और औद्योगिक विस्तार का मॉडल बता रही है.

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