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गन्ना किसानों के लिए खुशखबरी, नई उन्नत किस्म "कर्ण-18" से बंपर पैदावार के साथ होगी जबरदस्त कमाई

गन्ना प्रजनन संस्थान ने कर्ण-18 किस्म विकसित की है, जो सूखा, लवणीयता और रोग-कीट सहनशील, उच्च उत्पादन वाली है.

KARNA 18 SUGARCANE VARIETY
कर्ण-18 किस्म (Etv Bharat)
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By ETV Bharat Haryana Team

Published : January 10, 2026 at 1:08 PM IST

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करनाल: गन्ना प्रजनन संस्थान, क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र करनाल द्वारा गन्ने की एक नई उन्नत किस्म कर्ण-18 (सीओ-18022) विकसित की गई है, जो देश के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र के किसानों के लिए बेहद लाभकारी साबित होगी. यह किस्म जलवायु के अनुकूल होने के साथ-साथ लवणीयता और सूखे के प्रति सहनशील है. इसके अलावा यह लाल सड़न रोग (रेड रॉट) के प्रति प्रतिरोधी है तथा इसमें टॉप बोरर कीट का प्रकोप भी कम देखने को मिलेगा, जिससे किसानों को उत्पादन में होने वाले नुकसान से राहत मिलेगी.

उन्नत किस्म कर्ण 18 की खासियत: इस बारे में करनाल गन्ना प्रजनन संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉक्टर एम आर मीणा ने बताया कि, "गन्ने की नई उन्नत किस्म कर्ण 18 (सीओ-18022) आने वाले समय में भारत के गन्ना लगाने वाले किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित होने वाली है. इस वैरायटी की खास बात यह है कि यह भारत के सबसे ज्यादा मात्रा में गन्ना लगने वाले उत्तर पश्चिमी भारत के क्षेत्र के किसानों के लिए सौगात बड़ी सौगात है. यह हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब , उत्तराखंड के किसानों के लिए उपयुक्त मानी गई है.इससे बड़े स्तर पर किसानों को फायदा होने वाला है."

KARNA 18 SUGARCANE VARIETY
उत्तर-पश्चिम भारत के किसानों के लिए खुशखबरी (Etv Bharat)

जलवायु अनुकूल होने के साथ लवणीयता, सूखे के प्रति सहनशील:डॉक्टर एम आर मीणा ने आगे कहा कि, "इस वैरायटी की खास बात यह भी है कि यह जलवायु के अनुकूल है. जलवायु का इस पर कोई खास असर नहीं होता. इसके साथ-साथ लवणीयता और सुख के प्रति भी यह सहनशील है जिसके चलते इसका उत्पादन काफी अच्छा रहता है और लवणीयता व सुखे का इस पर ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ता. प्रोडक्शन अच्छा मिलता है."

गन्ने की नई उन्नत किस्म "कर्ण-18" हुई विकसित (Etv Bharat)

लाल सड़न रोग और टॉप बोरर कट से मिलेगी निजात: डॉक्टर एम आर मीणा ने बताया कि, "गन्ने की फसल में सबसे बड़ा रोग और कीट का इस वैरायटी पर प्रकोप नहीं होगा. गन्ना लगाने वाले किसानों के सामने उनकी फसल में लाल सड़न रोग और टॉप बोरर कीट की बीमारी सबसे बड़ी बीमारी होती है, जिसमें किसान को काफी नुकसान झेलना पड़ता है, क्योंकि उसमें उत्पादन में गिरावट आती है लेकिन यह वैरायटी लाल सड़न रोग के प्रति प्रतिरोधी है. इसमें टॉप बोरर किट का प्रकोप भी नहीं देखने को मिलेगा."

सीओ-05011 को करेगी रिप्लेस: डॉक्टर मीणा ने आगे कहा कि, "यह किस्म मौजूदा किस्म सीओ-05011 को रिप्लेस करेगी और इसकी मोड़ी फसल (रेटून) भी काफी अच्छी होगी. इस किस्म की औसत उपज 986 क्विंटल प्रति हेक्टेयर आंकी गई है, जबकि चीनी मिलों में रिकवरी लगभग 11 प्रतिशत रहने की उम्मीद है. इससे प्रति हेक्टेयर लगभग 12.6 टन चीनी उत्पादन की संभावना है. यह किस्म 12 महीने में पक कर तैयार हो जाती है. इसकी बसंतकालीन बुवाई फरवरी–मार्च तथा शरदकालीन बुवाई सितंबर–अक्टूबर में की जा सकती है. फरवरी के पहले सप्ताह से चीनी मिलों और कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से किसानों को इसका बीज उपलब्ध कराया जाएगा. कर्ण-18 गन्ने की यह नई किस्म किसानों के लिए उच्च उपज और बेहतर आय का एक मजबूत विकल्प साबित होगा. जो आने वाले समय में गन्ना लगाने वाले किसानों के लिए वरदान साबित होने वाली है."

केंद्रीय कृषि मंत्री ने किया था रिलीज: दरअसल, इस वैरायटी को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के द्वारा हाल ही में रिलीज किया गया है. उन्होंने अलग-अलग फसलों की 184 किस्म को जारी की है. जिनमें से गन्ने की नई किस्म कर्ण 18 भी एक है.इसलिए यह गन्ना लगाने वाले किसानों के लिए एक बड़ी सौगात है. इस वैरायटी को केंद्रीय वैरायटल रिलीज समिति (CVRC) द्वारा गजट नोटिफाई किया गया था जिसके चलते केंद्रीय मंत्री के द्वारा इसको रिलीज किया गया है.

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