Success Story: 21 साल की उम्र और लाखों की आमदनी, फूलों की खेती से सरगुजा की महिला किसान ने बदली किस्मत
सरगुजा की महिला किसान रत्ना मजूमदार की कहानी आपको खेती किसानी में नए प्रयोग के लिए प्रेरित करेगी.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : March 3, 2026 at 8:59 PM IST
सरगुजा: छत्तीसगढ़ का वनांचल संभाग सरगुजा खेती किसानी के लिए पूरे प्रदेश में फेमस है. यहां का मौसम और वातावरण कृषि के लिए काफी फायदेमंद है. सरगुजा में युवा किसान परंपरागत खेती से अलग हटकर अन्य फसलों की खेती कर रहे हैं जिससे उन्हें बंपर कमाई हो रही है. इसी कड़ी में डिगमा की एक 21 वर्ष की महिला ने मिसाल पेश की है. युवा अवस्था में ही इसने अपने परिवार के साथ मिलाकर लाखों की आमदनी की व्यवस्था कर ली है. परिवार में परम्परागत खेती को बदलकर आधुनिक तकनीक से खेती शुरू की और आज गेंदे के फूल की खेती से साल भर अच्छा मुनाफा कमा रही है.
गेंदा फूल की खेती से बदली किस्मत
ये कहानी है रत्ना मजूमदार की, रत्ना रायगढ़ की बेटी थी जो बहू बनकर सरगुजा आई. वे यहां जिस परिवार में ये आई वो खेती किसानी करके अपना जीवन यापन करता था. बहू ने अपने परिवार की आमदनी बढाने की सोची. इसके बाद नेशनल रूरल लाइवलीहुड मिशन के तहत महिला समूह से जुड़ गई. उन्होंने महिला समूह से लोन लेकर आधुनिक खेती शुरू की. मक्का, धान की परम्परागत खेती छोड़कर उन्होंने गेंदे के फूल की खेती शुरू की. इससे वे आज लाखों की आमदनी कमा रहीं हैं.
दो एकड़ में गेंदा फूल की खेती
रत्ना दो एकड़ में गेंदे के फूल की खेती कर रही हैं, प्रति एकड़ करीब 1 लाख की लागत होती है और कमाई करीब दोगुनी की है. प्रति एकड़ करीब 2 लाख का फूल होता है जिसमे 50 प्रतिशत की आमदनी हो जाती है. बड़ी बात ये है की दो एकड़ में गेंदा फूल की खेती की जा रही है. तीन महीने में एक फसल टूट जाती है. अब ये परिवार साल के 12 महीना गेंदा फूल की खेती कर रहा है.

रत्ना मजूमदार ने गेंदा फूल खेती की दी जानकारी
रत्ना मजूमदार कहती हैं मैं ग्राम डिगमा से हूं. मैं मां महामाया समूह की सदस्य हूं. मेरी उम्र 21 साल है. मैं रायगढ़ से शादी कर सरगुजा के डिमगा आई. जब मैं इस परिवार में आई तो मैंने देखा कि परिवार छोटी मोटी खेती कर रहा है. उसके बाद मैं महिला समूह में जुड़ गई. समूह के माध्यम से और समूह से लोन लेकर इस काम को फिर आगे बढ़ाया. रत्ना मजूमदार ने बताया कि अभी हम लोग दो एकड़ में गेंदे फूल का खेती कर रहे हैं. ठंड के सीजन में हम लोग चेरी की भी खेती करते हैं.

हम लोग अभी दो एकड़ में यह खेती कर रहे हैं. दो एकड़ में कम से कम हम लोगों का लागत डेढ़ से दो लाख होता है. दो एकड़ में हम लोग की कमाई इसका 50 फीसदी तक होता है. जिस टाइम दिवाली रहता है उस टाइम हम लोग की कमाई 60% भी हो जाती है. उस टाइम रेट ज्यादा रहते हैं तो हम लोग की कमाई बढ़ जाती है- रत्ना मजूमदार, महिला किसान

फूलों की खेती का विचार कैसे आया ?
रत्ना मजूमदार कहती हैं मैं ग्राम डिगमा से हूं. मैं मां महामाया समूह की सदस्य हूं. मेरी उम्र 21 साल है. सबसे पहले इस परिवार में शादी हुआ. तो सास ससुर पहले से इस कार्य को छोटा-मोटा तरीका से कर रहे थे. उसके बाद मैं समूह में जुड़ी समूह के माध्यम से समूह से लोन लेकर इस काम को फिर आगे बढ़ाए हम लोग.अभी हम लोग दो एकड़ में गेंदे फूल का खेती कर रहे हैं. और एक सीजन ठंडी सीजन के लिए हम लोग चेरी का भी खेती करते हैं. हम लोग अभी दो एकड़ में है तो दो एकड़ में कम से कम हम लोग का लागत डेढ़ से दो लाख लग जाता है. दो एकड़ में हम लोग का कमाई जैसे इसका 50% हम लोग का रह जाता है और जिस टाइम दिवाली रहता है उस टाइम हम लोग का 60% भी हो जाता है. उस टाइम रेट ज्यादा रहते हैं तो हम लोग का कमाई भी बढ़ जाता है.

कैसे करते हैं फूलों की खेती ?
रत्ना मजूमदार ने बताया कि सबसे पहले हम गेंदा फूल के बीज यानि पौधे कोलकाता से लेकर आते हैं. सबसे पहले गेंदा जब हम लोग फर्स्ट टाइम लगाते हैं तो एक महीने तक इसमें एकदम अच्छे फूल आते हैं. फिर सेकंड महीना से थोड़ा कम और थर्ड महीना थोड़ा कम गेंदा फूल उगता है. तीन महीना तक इसको हम लोग बेचने के उपयोग में लाते हैं. फिर उसके बाद हम लोग इसी खेत में फिर नया पौधा लगाते हैं. इसकी खेती में हम ड्रिप माध्यम से सिंचाई करते हैं. इससे गेंदा फूल की खेती में काफी मदद मिलती है.

गेंदा फूल की खेती में मेहनत कम है और फायदा बहुत अच्छा है. ड्रिप माध्यम से सिंचाई करने से गेंदा फूल की खेती में और मदद मिलती है- रत्ना मजूमदार, महिला किसान
सरगुजा की महिला किसान बनी नजीर
सरगुजा के एक परिवार में एक लड़की विवाह करके आती है. इस परिवार में पहले ही परंपरागत किसान खेती किसानी होती थी. जब ये युवती यहां पहुंची तो इसने अपने परिवार की जिम्मेदारी उठाई और खेती को आधुनिक बनाया. आज दो एकड़ में गेंदे की खेती करते हैं. हर तीन महीने में उस फसल को तोड़ते हैं और फिर से नई फसल लगाते हैं और लाखों की आमदनी ये कर रही हैं. लगभग 50 से 60% का प्रॉफिट इस व्यवसाय में है. आज रत्ना मजूमदार उन किसानों के लिए नजीर बन गई हैं जो खेती किसानी में अच्छी आमदनी की तलाश में हैं.

