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शारीरिक कमजोरियों को दरकिनार कर रागिनी और हर्षित ने फहराए झंडे, जीते हैं शूटिंग के कई नेशनल गोल्ड मेडल

रागिनी चौधरी और हर्षित सिंह ने दिव्यांगता को धता बताते हुए शूटिंग चैंपियनशिप में कई बार गोल्ड मेडल जीते.

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रागिनी चौधरी और हर्षित सिंह ने गाड़े सफलता के झंडे. (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : January 11, 2026 at 11:39 AM IST

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Updated : January 11, 2026 at 11:50 AM IST

7 Min Read
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गोरखपुर (मुकेश पाण्डेय): प्रतिभा कभी उम्र की मोहताज नहीं होती, हौसले के बल पर दिव्यांग भी ऊंचा पहाड़ चढ़ सकता है. ऐसी कहावत को गोरखपुर के दो निशानेबाज खिलाड़ी सच साबित कर दिखाए हैं. इसमें एक पुरुष और एक महिला हैं.

रागिनी चौधरी 48 साल की एक ऐसी घरेलू महिला हैं, जिन्होंने 10 से 30 मीटर एयर पिस्टल की शूटिंग प्रतियोगिता में अब तक 6 बार नेशनल गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं.

रागिनी और हर्षित ने शूटिंग के कई नेशनल गोल्ड मेडल जीते हैं. (ETV Bharat)

उन्होंने यह कारनामा कुल ढाई साल की ट्रेनिंग में ही हासिल कर लिया. इससे निशानेबाजी के इस खेल को लेकर उनका उत्साह चरम पर है. वह कहती है मौका मिलेगा, तो देश के लिए ओलंपिक में भी वह पदक जीत कर ले आएंगी.

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शूटर रागिनी चौधरी. (ETV Bharat)

वहीं, दूसरे खिलाड़ी का नाम हर्षित सिंह है, जो दोनों पैरों से दिव्यांग हैं. अभी वह ग्रेजुएशन का छात्र है. लेकिन पिछले 5 वर्षों से शूटिंग में उसने हाथ आजमाना शुरू किया, तो उसे पैरा निशानेबाजी की स्टेट और नेशनल लेवल की प्रतियोगिता में उसे कई गोल्ड मेडल जीतने का अवसर प्राप्त हुआ.

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शूटर हर्षित सिंह. (ETV Bharat)

हर्षित इस समय वह इंटरनेशनल पैरा निशानेबाजी के लिए ट्रायल दे रहा है. उसकी खेल प्रतिभा से प्रभावित होकर ओएनजीसी ने उसे अपने से अनुबंधित कर लिया है.

इन दोनों निशानेबाजों की कहानी काफी रोचक हैं. रागिनी चौधरी, तो इस खेल से एक्सीडेंटल जुड़ीं और सफलता की सीढ़ियां चढ़ गईं.

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शूटिंग प्रतियोगिता. (ETV Bharat)

वह कहती हैं कि "मेरी बेटी इंजीनियरिंग की छात्रा थी और फाइनल ईयर की परीक्षा देने के बाद घर पर खाली बैठी थी. इस दौरान वह किसी गतिविधि से जुड़ना चाह रही थी. उसे निशानेबाजी का शौक था, तो उसे हमने एक शूटिंग एकेडमी ज्वॉइन कराई. इस दौरान वह कैट की परीक्षा कंप्लीट करके आईआईएम इंदौर एमबीए करने चली गई. इसके बाद उसकी जगह शूटिंग अकादमी मैंने ज्वॉइन की और निशानेबाजी पर प्रैक्टिस शुरू की."

गौर करें तो कोच गजेंद्र राय की देखरेख में रागिनी की ट्रेनिंग लगातार बेहतर होती चली गई और फिर पैरा स्टेट चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल हासिल करने का मौका मिला और यहीं से फिर नेशनल चैंपियनशिप में उन्हें एंट्री मिली, जहां से वह अपने आयु वर्ग में दनादन 6 गोल्ड मेडल पर निशाना लगाया.

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शूटिंग प्रतियोगिता. (ETV Bharat)

रागिनी कहती हैं कि जब वह प्रैक्टिस कर रही थीं उसके बाद शामिल होने चली तो पास पड़ोस और परिवार के लोग भी कहे कि इस उम्र में भला कोई शूटिंग करता है. लेकिन जब हम गोल्ड मेडल जीतने में कामयाब हुए, तो सभी ने मुझे खूब प्यार दिया. अब तो मैं इसी प्यार और समर्थन की बदौलत अपनी शूटिंग को निरंतर जारी रखी हूं, जहां तक सफलता मिल सके.

अब बात पैरा निशानेबाजी के खिलाड़ी हर्षित सिंह की करते हैं. हर्षित के पिता उत्तर प्रदेश सरकार में उप जिलाधिकारी के पद पर कार्यरत हैं. वह अपने बेटे पर दिव्यांगता के संकट को हावी होने नहीं देना चाहते थे. वह कहते हैं कि "जब उनकी मेरठ मंडल में पोस्टिंग थी, तो देखने को मिलता था कि तमाम दिव्यांग खिलाड़ी विभिन्न पैरा खेलों में अपने बेहतरीन खेल की बदौलत पदक हासिल कर रहे थे. वह भी अपने बेटे को इन खिलाड़ियों के बीच ले जाते थे."

हर्षित आज के समय में बीए सेकंड ईयर के छात्र हैं और वह शूटिंग की प्रैक्टिस में पिछले 5 वर्ष से जुड़े हैं और इतना बेहतरीन प्रदर्शन किया कि आज वह अपने खेल का नेशनल चैंपियन है. उसके गले में गोल्ड मेडल है. वह इंटरनेशनल क्वॉलीफाई मैच मैं अपना प्रदर्शन दे रहे हैं.

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शूटिंग में हाथ आजमाते खिलाड़ी. (ETV Bharat)

हर्षित का कहना है कि उसके परिवार का उसे पूरा सपोर्ट मिला. वह कभी भी अपने पैरों की पोजीशन को लेकर असहज नहीं हुआ. वह जब शूटिंग की ट्रेनिंग में होता था, तो पूरी एकाग्रता से लक्ष्य को भेदने में जुटता था. उसे भी कोच गजेंद्र राय ने ट्रेनिंग में निखारा. लक्ष्य उसका भी बड़ा है. वह भी पैरा ओलंपिक चैंपियन बनना चाहता है. वह कहता है कि जब हाथ में ढाई लाख की अपनी पिस्तौल होती है. साथ में चार-चार घंटे के कड़े अभ्यास का परिश्रम तो लक्ष्य को भेदने का साहस बढ़ जाता है.

रागिनी चौधरी हों या हर्षित सिंह या कुछ और निशानेबाज खिलाड़ी. आजकल यह सभी "गोरखपुर महोत्सव" में चल रही शूटिंग की प्रतियोगिता में प्रतिभा करने के लिए जुटे हुए हैं. इसमें जो भी चैंपियन होगा, वह गोल्ड, सिल्वर और ब्रांज मेडल से नवाजा जाएगा. यह पुरस्कार उसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों 13 जनवरी को मिलेगा.

ऐसे ही खिलाड़ियों में एक खिलाड़ी गुलमोहर सराफ हैं, जो शौक में शूटिंग अकादमी ज्वॉइन किए और आज वह स्टेट चैंपियनशिप के मेडलिस्ट खिलाड़ी हैं. ढाई साल की प्रैक्टिस में वह भारत के निशानेबाजों की सूची में शामिल हैं.

इन खिलाड़ियों के कोच गजेंद्र राय हैं, जो एशियन गेम्स में निशानेबाजी में गोल्ड मेडल हासिल कर चुके हैं. वह साल 2011 से 2017 तक 6 साल तक लगातार भारतीय निशानेबाजी टीम के सदस्य रहे. वह दिल्ली में कर्णी सिंह शूटिंग अकादमी से प्रशिक्षित हुए, जो सपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया की शाखा है.

राय गोरखपुर के रहने वाले हैं और कोरोना में पिता के देहांत के बाद दिल्ली छोड़कर वह गोरखपुर चले आए. स्थितियां जब सामान्य हुईं, तो वह गोरखपुर में ही शूटिंग अकादमी स्थापित करने के बारे में प्रयास किए तो उनकी अकादमी से लोग जुड़ते भी गए.

वह कहते हैं कि उनके शूटिंग अकादमी से करीब 95 लोग का निरंतर प्रशिक्षण लेते हैं और 200 लोग इसके मेंबर हैं. वह दिल्ली के हंसराज कॉलेज से इकोनॉमिक्स ऑनर्स के स्टूडेंट रहे हैं. उनकी शूटिंग अकादमी में 13 लोग एक बार में शूटिंग प्रशिक्षण कर सकते हैं. कोई भी यहां पर ₹30000 सालाना की फीस जमाकर प्रशिक्षण प्राप्त कर सकता है.

उन्होंने कहा कि उनकी शूटिंग अकादमी से 4 साल के भीतर स्टेट लेवल से लेकर नेशनल लेवल के मेडलिस्ट निकले हैं. यह की बात है. वह कहते हैं कि गोरखपुर जैसे क्षेत्र में शूटिंग के क्षेत्र में लोगों को कैरियर बनाते देखकर उन्हें काफी ऊर्जा मिलती है. इससे जो सफलता मिल रही है, वह उन्हें निरंतर अच्छा करने की प्रेरणा दे रहा है.

मौजूदा समय में गजेंद्र राय यूपी स्टेट शूटिंग एसोसिएशन गवर्निंग बॉडी के 2026 में मेंबर भी निर्वाचित हुए हैं. निशानेबाजी के खेल में वह गोरखपुर में वर्ष 2015 में सिटी मजिस्ट्रेट रहे रवि शंकर गुप्ता से प्रभावित हुए, जो एक निशानेबाज थे. उन्होंने कहा कि आदित्य प्रताप, अंशिका पांडे, हर्ष राय समेत कई ऐसे खिलाड़ी हैं, जो उनके कोचिंग से नेशनल और स्टेट लेवल पर मेडल हासिल कर चुके हैं.

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Last Updated : January 11, 2026 at 11:50 AM IST