ETV Bharat / state

रघुवर दास के बयान पर आई सुबोधकांत सहाय की प्रतिक्रिया, बोले- माइक्रो लेवल पर होगा झारखंड को नुकसान

पूर्व सीएम रघुवर दास के बयान पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री सुबोधकांत सहाय ने प्रतिक्रिया दी है. उपेंद्र कुमार की रिपोर्ट.

mmdr amendment bill 2026
रघुवर दास- सुबोधकांत सहाय (Etv Bharat)
author img

By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : August 26, 2026 at 6:30 PM IST

3 Min Read
Choose ETV Bharat

रांची: MMDR संशोधन बिल को लेकर पूर्व सीएम रघुवर दास द्वारा आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए आरोपों पर पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री सुबोधकांत सहाय ने पलटवार किया है. उन्होंने कहा कि अगर रघुवर दास, कानून की थोड़ी बहुत जानकारी भी रखते, तो इस तरह की बयानबाजी नहीं करते.

माइक्रो लेवल पर होगा झारखंड को नुकसान

सुबोधकांत सहाय ने कहा कि MMDR संशोदन बिल, 2026 का सबसे ज्यादा नुकसान माइक्रो लेवल पर झारखंड को होगा. झारखंड विधानसभा से पेसा कानून नियमावली पारित हुई थी, उसमें रेवेन्यू कलेक्शन का अधिकार ग्राम सभा को था, जो रेवेन्यू आता है, उससे गांव विकसित होता है, वहां के लोगों को संसाधन का लाभ मिलता. अपने गांव को विकसित करने का अधिकार गांवों को मिला था, अब उसका क्या होगा?

रघुवर दास के बयान पर सुबोधकांत सहाय की प्रतिक्रिया (Etv Bharat)

कहां से होगी बजट की रिकवरी?

सुबोधकांत सहाय ने बताया कि झारखंड के वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में 14000 करोड़ का जो बजटीय प्रावधान, जो कुल बजट का 7.3% होता है, उस बजट की रिकवरी अब कहां से होगी? इससे लगा हुआ हमारा सवाल है कि जो सोशल सेक्टर को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाना था, उसके लिए पैसा कहां से मिलेगा? इसका जवाब रघुवर दास को देना चाहिए.

पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री रह चुके व्यक्ति को यह बताना चाहिए कि पहली बार स्टेट पुलिस के अधिकार भी सीमित कर दिए गए हैं. राज्य पुलिस का काम जब सीपीओ करेगी, तो राज्य के लिए क्या कुछ रह जाएगा.

छत्तीसगढ़ के रहने वाले थे रघुवर दास: सुबोधकांत सहाय

सुबोधकांत सहाय ने कहा कि झारखंड, रघुवर दास की लड़ाई से नहीं बना है, क्योंकि वो तो छत्तीसगढ़ के रहने वाले थे, जिन लोगों ने आजादी के पहले से अलग झारखंड की लड़ाई लड़ी है, उनके कलेजे पर आज क्या लोट रहा होगा.

राज्य कैसे करेगा विकास?

यह सिर्फ 14000 करोड़ रुपए का मामला नहीं है, यह साढ़े 3 करोड़ झारखंडियों का भविष्य का मामला है, जिनका मेजर माइनर माइंस पर अधिकार नहीं होगा. जब हेमंत सरकार, राज्य को विकास के पथ पर ले जाना चाहती है, औद्योगीकरण के बल पर राज्य में रोजगार पैदा करना चाहती है. वैसे में जब हमारा ना कोयला होगा ना लोहा होगा, तो फिर राज्य विकास कैसे करेगा?

अपने आदमियों को फायदा पहुंचाने वाले को समझ में नहीं आएगी बात: पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री

उन्होंने आरोप लगाया कि जो शख्स मुख्यमंत्री रहते हुए राज्य का नुकसान और अपने आदमियों को फायदा पहुंचाता है, उन्हें यह बात समझ में नहीं आएगी कि पेसा कानून के तहत मिले अधिकार को कैसे एमएमडीआर कानून से खत्म किया जा रहा है, वो इसे बढ़िया बता रहे हैं.

झारखंड को लूटखंड बनाने का आरोप

बता दें कि बीजेपी नेता रघुवर दास ने झारखंड को 'लूटखंड' में तब्दील करने का आरोप लगाया था कि MMDR पर भाजपा और केंद्र सरकार को किसी सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है. कांग्रेस और झामुमो का यह विरोध राज्य हित में नहीं बल्कि अपने अवैध सिंडिकेट और जेब में आ रहे काले धन को बचाने के लिए है, इसलिए इन नेताओं में छटपटाहट है.

ये भी पढ़ें- MMDR संशोधन बिल को लेकर सांसद निशिकांत दुबे ने कहा- हेमंत सरकार आंदोलन करे, बीजेपी करेगी स्वागत

बन्ना गुप्ता का केंद्र पर हमला, एमएमडीआर बिल को बताया झारखंड के अधिकारों पर प्रहार

MMDR संशोधन बिल पर कांग्रेस करेगी चरणबद्ध आंदोलन, प्रखंड स्तर तक उठेगा चंदा चोरी का मुद्दा