कोचिंग संस्थान ने एजुकेशन लोन दिलवा हड़प ली एडमिशन फीस, रिफंड को जनसुनवाई पहुंचे छात्र
रतलाम में जनसुनवाई पहुंचे निजी कोचिंग संस्थान द्वारा फीस रिफंड न करने से परेशान अभिभावक और छात्र. दिव्यराज सिंह राठौर की रिपोर्ट.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : September 1, 2026 at 5:30 PM IST
रतलाम: रतलाम में जनसुनवाई के दौरान निजी कोचिंग संस्थान से परेशान अभिभावक और छात्र पहुंचे. एडमिशन निरस्त करवाने पर निजी कोचिंग संस्थान ने छात्रों द्वारा जमा करवाई गई पूरी राशि ही जब्त कर ली. खास बात यह है कि आर्थिक रूप से कमजोर इन बच्चों को संस्थान की 1 साल की फीस 60 से 70 हजार रुपये का लोन भी कोचिंग इंस्टिट्यूट ने ही दिलवाया था.
बच्चों द्वारा एडमिशन वापस लिए जाने पर उन्हें फीस रिफंड नहीं की गई है जबकि एजुकेशन लोन फाइनेंस करने वाली कंपनी की किस्त अभिभावकों को भरनी पड़ रही है. निजी कोचिंग संस्थान की इस मनमर्जी से परेशान होकर छात्र और उनके अभिभावक मंगलवार को जनसुनवाई में पहुंचे.
निजी परेशानियों की वजह से कुछ छात्रों ने कुछ दिन बाद ही छोड़ दिया संस्थान
दरअसल नीट परीक्षा की तैयारी के लिए ग्रामीण क्षेत्र के इन छात्रों ने निजी कोचिंग संस्थान में एडमिशन लिया था. संस्थान ने एक मुश्त राशि जमा नहीं करवा पाने वाले अभिभावकों को निजी फाइनेंस कंपनी से एजुकेशन लोन भी दिलवा दिया. ग्रामीण क्षेत्र से प्रतिदिन अप-डाउन नहीं कर पाने और आर्थिक स्थिति कमजोर होने की वजह से कुछ छात्रों ने दो-तीन दिन के बाद ही कोचिंग संस्थान छोड़ दिया.
कंपनी की रिफंड पॉलिसी का हवाला देकर कोचिंग संस्थान के मैनेजमेंट ने फीस रिफंड करने से ही इनकार कर दिया. वहीं, कोर्स किए बिना ही एजुकेशन लोन की किस्त भी शुरू हो गई है जिन्हें छात्रों के अभिभावकों को मजबूरी में भरना पड़ रहा है. इसके बाद इन छात्रों और अभिभावकों ने जनसुनवाई में फीस वापस करवाने की गुहार लगाई है.
संस्थान 70 हजार में से मात्र 14 हजार रुपये का ही रिफंड को तैयार
एक छात्रा के अभिभावक मुकेश राठौर ने जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने बेटी का नीट की तैयारी के लिए निजी कोचिंग संस्थान में एडमिशन करवाया था. जिसके लिए 20 हजार नगद रजिस्ट्रेशन शुल्क और 50 हजार रुपये एजुकेशन लोन इंस्टीट्यूट द्वारा ही दिलवाया गया था. जिसकी पहली किस्त मेरे बैंक खाते से कट भी चुकी है और दूसरे किस्त आने वाली है. मेरी बेटी केवल चार-पांच दिन कोचिंग जाने के बाद वहां से असंतुष्ट होकर एडमिशन निरस्त करवा चुकी है. पहले तो कोचिंग संस्थान वालों ने रिफंड करने से ही मना कर दिया था लेकिन अब 70 हजार के बदले में मात्र 14 हजार रुपये का ही रिफंड देने की बात कोचिंग संस्थान प्रबंधन कह रहा है.
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वहीं, एक अन्य छात्रा विनीता बोरिया ने बताया "मैंने 64 हजार फीस के रूप में जमा करवाए थे. जिसमें 10 हजार रजिस्ट्रेशन शुल्क और 54 हजार रुपये का फाइनेंस कंपनी से लोन इंस्टीट्यूट द्वारा ही करवाया गया था. आर्थिक स्थिति कमजोर होने और रावटी से प्रतिदिन अप डाउन नहीं कर सकने की वजह से एक हफ्ते बाद ही एडमिशन निरस्त करवा लिया था. लेकिन हमें कई चक्कर लगवाने के बाद भी कोचिंग संस्थान वाले फीस रिफंड नहीं कर रहे हैं."
"एक बार जनसुनवाई में जाने पर अधिकारियों ने इन्हें कॉल किया था, जिसमें 65 हजार के बदले में केवल 14 हजार रुपए ही रिफंड करने की बात कह रहे हैं. वहीं किस्त जमा करने के लिए फाइनेंस कंपनी की तरफ से लगातार फोन आ रहे हैं."
दोनों पक्षों को सुनने के बाद की जाएगी आवश्यक कार्रवाई
अभ्यास कोचिंग सेंटर रतलाम प्रबंधक विनीत सोनी ने इस बारे में सवाल किए जाने पर कहा "फीस रिफंड करने के मामले में कंपनी पॉलिसी के अनुसार कॉरपोरेट ऑफिस से निर्णय लिया जाता है." वहीं, जनसुनवाई कर रहे अधिकारी संजय शर्मा ने बताया "इस मामले में छात्रों एवं उनके अभिभावकों सहित कोचिंग संस्थान के प्रबंधन के लोगों को बुधवार को कार्यालय में बुलाया गया है. दोनों पक्षों की सुनवाई कर आवश्यक कार्यवाही की जाएगी."
बहरहाल निजी कोचिंग संचालकों द्वारा फाइनेंस कंपनियों से महंगी दरों पर एजुकेशन लोन दिलवाकर छात्रों से मोटी फीस वसूली जा रही है और एडमिशन निरस्त करवाने पर फीस रिफंड करने में भी आनाकानी की जाती है. एजुकेशन लोन की किस्त नहीं जमा करवाने की स्थिति में फाइनेंस कंपनी के वसूली एजेंट के फोन कॉल और धमकियों को भी इन छात्रों एवं अभिभावकों को झेलना पड़ रहा है.

