अरावली संरक्षण के लिए संघर्ष, दादरी में स्कूली बच्चों की भूख हड़ताल, बोले- "पर्यावरण बचाने के लिए कठोर कानून की जरुरत"
अरावली के संरक्षण में अब स्कूली बच्चे भी मैदान में उतर गए हैं. दादरी में बच्चों ने भूख हड़ताल कर पर्यावरण संरक्षण की मांग की.


Published : January 3, 2026 at 12:49 PM IST
|Updated : January 3, 2026 at 1:27 PM IST
चरखी दादरी: अरावली की पहाड़ियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अपने ही फैसले पर जो स्टे लगाया है, उसे लेकर राजनीति से लेकर आम जनता तक ने खुशी जाहिर की है. इस बीच सारी दुनिया नए साल 2026 का जश्न मना रही थी, उस दौरान चरखी दादरी जिले के गांव कारी दास व कारी रूपा के स्कूली बच्चे कड़कड़ाती ठंड के बीच पर्यावरण संरक्षण व अरावली बचाने की मुहिम के दौरान गांव शिशवाला की पहाड़ियों में भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं. इस दौरान स्कूली बच्चों ने सरकार व कोर्ट से अरावली के अलावा पर्यावरण बचाने का आह्वान किया है.
भूख हड़ताल पर नन्हें बच्चे: गांव शिशवाला की अरावली पहाड़ियों पर भूख हड़ताल पर बैठे स्कूली बच्चों की अगुवाई 9वीं कक्षा के छात्र पर्यावरण कार्यकर्ता यश कारी ने की. इस दौरान बच्चों ने भूख हड़ताल के माध्यम से सरकार व न्यायालय से अरावली के अलावा पर्यावरण बचाने की मांग उठाई है. छात्रों ने कहा कि "एक दिवसीय भूख हड़ताल के माध्यम से पीएम मोदी, केंद्रीय वन व पर्यावरण मंत्री और मुख्यमंत्री नायब सैनी तक संदेश देने का काम किया है. ताकि पर्यावरण संरक्षण अधिनियम में कुछ बदलाव किए जा सकें और पर्यावरण को बचाया जा सके".
"जरुरत पड़ने पर लंबी भूख हड़ताल करेंगे": वहीं, नन्हें पर्यावरण प्रहरियों ने कहा कि "पर्यावरण संरक्षण के लिए कठोर नियमों की आवश्यकता है. यदि हमें लंबी भूख हड़ताल पर भी बैठना पड़ा, तो हम बैठेंगे". बता दें कि पहले सुप्रीम कोर्ट ने 100 मीटर से छोटी पहाड़ियों पर खनन की मंजूरी दी थी, लेकिन बाद में अपने ही ऑर्डर पर रोक लगा दी थी. जिसके बाद लोगों में अरावली संरक्षण की उम्मीद जगी है और अब लोगों का कहना है कि कोर्ट इस पर रोक लगाए रखें. ताकि अरावली का संरक्षण किया जा सके. फिलहाल मामले की अगली सुनवाई 21 जनवरी को होनी है.
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