Special: शिक्षा व्यवस्था का सच, कॉलेज का भवन है, विद्यार्थी और शिक्षक भी हैं, बस पढ़ाई होती नहीं
लोहरदगा के बरही में लड़कियों का एकमात्र कॉलेज शिक्षकों की कमी के कारण शिक्षा देने में असमर्थ है.

Published : September 1, 2026 at 4:31 PM IST
लोहरदगा: जिले के एकमात्र महिला कॉलेज की स्थिति शर्मसार करती है. कॉलेज है बस नाम का, ना तो पढ़ाई होती है और ना ही नियमित रूप से कॉलेज का ताला खुलता है. कागजों में यह कॉलेज चल रहा है. ऐसा नहीं है कि यहां पर शिक्षक नहीं हैं, भवन नहीं है या फिर विद्यार्थी नहीं हैं. सब कुछ है, फिर भी पढ़ाई नहीं होती है. जिस कॉलेज के भवन के नाम के साथ वर्तमान राष्ट्रपति और तब की झारखंड की राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू का नाम जुड़ा हुआ है, वह शिक्षा के लिए तरस रहा है.
2021 में द्रौपदी मुर्मू ने किया था उद्घाटन
इस कॉलेज में तीन शिक्षक हैं. उसमें से भी एक कॉलेज समन्वयक की भूमिका में हैं. यहां पर कुल 703 छात्राओं का नामांकन है. छात्राएं कॉलेज नहीं आती. मजबूरी है कि नियमित रूप से विषयों की पढ़ाई नहीं होती है. विद्यार्थियों की उपस्थिति औसत रूप से शून्य नजर आती है. यहां कहने के लिए हिंदी, अंग्रेजी, इतिहास, अर्थशास्त्र, मनोविज्ञान, राजनीतिक विज्ञान, नागपुरी की पढ़ाई होती है, लेकिन वास्तविकता में यहां पर सिर्फ नागपुरी, अंग्रेजी और राजनीतिक विज्ञान के ही शिक्षक हैं.
कॉलेज में शिक्षकों की कमी है कारण
राजनीतिक विज्ञान की जो शिक्षिका हैं, वह कॉलेज की समन्वयक भी हैं. कुल मिलाकर पूरे कॉलेज में तीन ही शिक्षक हैं. जिनके भरोसे कॉलेज चलाने की जिम्मेदारी है. कॉलेज के जो प्रभारी प्राचार्य हैं, वह बलदेव साहू महाविद्यालय के भी प्रभारी प्राचार्य हैं. दो-दो कॉलेज की जिम्मेदारी उन पर है. सब कुछ होते हुए भी सिर्फ शिक्षकों की कमी की वजह से यह कॉलेज नियमित रूप से संचालित नहीं हो पा रहा है. सिर्फ नामांकन और परीक्षा के लिए ही यह कॉलेज सीमित रह गया है.

कॉलेज के पास अपना कोई फंड नहीं
लोहरदगा, बरही का एकमात्र महिला महाविद्यालय विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा में यह अपनी भूमिका नहीं निभा पा रहा है, जबकि यह जिले का एक मात्र महिला कॉलेज है. तत्कालीन राज्यसभा सदस्य धीरज प्रसाद साहू ने कॉलेज के लिए दो बस उपलब्ध कराई थीं. जिससे कि छात्राओं को कॉलेज आने-जाने में न्यूनतम खर्च हो. दुर्भाग्यपूर्ण रूप से कॉलेज के पास इन बसों के संचालन के लिए कोई आवंटन नहीं है. बस बेकार पड़ी हुई है. कॉलेज के पास अपना कोई खुद का फंड नहीं है. जिससे कि बस का संचालन किया जा सके.

हाल ऐसा है कि कॉलेज के कर्मचारियों को भी कई महीनों से वेतन नहीं मिला है. हालांकि कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य डॉक्टर शशि कुमार गुप्ता कहते हैं कि कॉलेज में शिक्षकों की कमी को दूर करने और बस के संचालन के लिए रांची विश्वविद्यालय को लगातार पत्राचार किया गया है. इसके बावजूद अब तक समस्या हल नहीं हुई है. फिर भी कॉलेज को सीमित संसाधनों में ही संचालित किया जा रहा है.

द्रौपदी मुर्मू ने किया था कॉलेज का उद्घाटन
इस कॉलेज के निर्माण का शिलान्यास 14 सितंबर 2017 को तत्कालीन केंद्रीय राज्य मंत्री और लोहरदगा के सांसद सुदर्शन भगत, साथ ही तत्कालीन झारखंड सरकार की कल्याण मंत्री लुईस मरांडी ने किया था. झारखंड सरकार की राज्य योजना मद के अंतर्गत 9 करोड़ 18 लख रुपए की लागत से इस भवन का निर्माण किया गया. भवन का निर्माण कार्य साल 2021 में पूरा हुआ था. जिसके बाद तत्कालीन झारखंड की राज्यपाल और वर्तमान में देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 27 जनवरी 2021 को इस कॉलेज का उद्घाटन किया था. उम्मीद थी कि इस कॉलेज के माध्यम से छात्राओं के लिए शिक्षा को बेहतर बनाया जा सकेगा और छात्राओं की शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा और यह शिक्षा के क्षेत्र में एक ऊंचाई को छुएगा, परंतु दुर्भाग्यपूर्ण रूप से कॉलेज अपनी पहचान को स्थापित नहीं रख पा रहा है.

कॉलेज में सिर्फ नामांकन और परीक्षा की प्रक्रिया
लोहरदगा जिला में छात्राओं के लिए उच्च शिक्षा व्यवस्था की तस्वीर अच्छी नहीं है. जिले का एकमात्र महिला कॉलेज दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति से गुजर रहा है. कॉलेज के पास सब कुछ होने के बावजूद नियमित रूप से कक्षाएं नहीं होती हैं. कॉलेज में सिर्फ नामांकन और परीक्षा की प्रक्रिया ही पूरी हो पा रही है. एक लंबे समय से कॉलेज के पास शिक्षकों की कमी है. विद्यार्थी नियमित कक्षा के लिए कॉलेज नहीं आ पाते हैं. विश्वविद्यालय का ध्यान इस ओर नहीं जा रहा है. अब देखना यह है कि इस कॉलेज में अध्यापकों की कमी को कब पूरा किया जाएगा.
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