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किराए के कमरे में भविष्य! निजी भवन में 22 हजार किराया देकर पढ़ाई कर रहे छात्र, आपदा में ढह गया था स्कूल भवन

जहां आपदा प्रभावित परिवार को घर बनने तक किराए का प्रावधान है वहां छात्र किराया देकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं. बालकृष्ण शर्मा की रिपोर्ट.

kullu Students paying monthly rent
किराए के कमरे में भविष्य (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : August 24, 2026 at 4:36 PM IST

7 Min Read
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कुल्लू: हिमाचल प्रदेश में बीते साल आई प्राकृतिक आपदा के चलते जहां सैकड़ों भवन क्षतिग्रस्त हुए तो वहीं सरकारी संपत्ति को भी से खासा नुकसान पहुंचा. जिला कुल्लू के उपमंडल बंजार की तीर्थन घाटी के सीनियर सेकेंडरी स्कूल गुशैनी की अगर बात करें तो इसका भवन भी पिछले साल सितंबर माह में आई आपदा के कारण पूरी तरह से नष्ट हो गया था. ऐसे में अब स्कूल निजी भवन में चल रहा है. हैरानी की बात यह है कि यहां पर बच्चे अपनी जेब से पैसा देकर निजी भवन में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं. स्कूल प्रबंधन समिति के माध्यम से प्रतिमाह 22,000 रुपए किराया दिया जा रहा है. हालांकि, नए स्कूल भवन निर्माण के लिए करीब 5 बीघा भूमि का चयन किया गया है. लेकिन, अभी तक उसे एफआरए की क्लीयरेंस नहीं मिल पाई है. ऐसे में निजी भवन में शिक्षा ग्रहण करने के लिए अभिभावकों की जेब भी ढीली हो रही है.

किराया देकर शिक्षा ग्रहण कर रहे छात्र

सीनियर सेकेंडरी स्कूल गुशैनी में पांच पंचायत के दर्जनों गांव के छात्र शिक्षा ग्रहण करने के लिए आते हैं. वर्तमान में स्कूल में 390 से अधिक छात्र और छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं. पहले यह स्कूल गुशैनी बाजार के पास चलता था. लेकिन, नया भवन करीब 2 किलोमीटर दूरी पर है. ऐसे में तीर्थन घाटी में बरसात के चलते कई सड़कें भी बंद पड़ी हुई हैं. कई छात्रों को करीब 10 किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल पहुंचना पड़ता है. स्कूल पहुंचने के लिए उन्हें कड़ी मशक्कत का सामना करना पड़ता है और निजी भवन में शिक्षा ग्रहण करने के लिए भी उन्हें ही पैसा देना पड़ रहा है.

स्कूल प्रबंधन समिति और अभिभावकों ने भी शिक्षा विभाग और सरकार से मांग रखी है कि जिस जगह पर नए भवन का निर्माण होना है. उस भूमि की एफआरए क्लीयरेंस की प्रक्रिया भी तेज की जाए, ताकि बच्चे अपने स्कूल में शिक्षा ग्रहण कर सकें. अभिभावकों का कहना है कि, एक ओर प्रदेश में आपदा में क्षतिग्रस्त माकन मालिकों को मकान निर्माण तक किराया देने के प्रावधान है, वहीं, दूसरी ओर स्कूल क्षतिग्रस्त होने के बाद अभिभावकों को किराया देना पड़ रहा है.

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आपदा में ढह गया था स्कूल भवन (ETV Bharat)

सीनियर सेकेंडरी स्कूल गुशैनी का है मामला

अभिभावक शेर सिंह का कहना है कि, "सितंबर माह से यह स्कूल निजी भवन में चल रहा है और बीते साल सितंबर माह से लेकर मार्च महीने तक भवन मालिक के द्वारा इस बच्चों के भविष्य को देखते हुए कोई किराया नहीं लिया गया. अब इस भवन का किराया अभिभावकों को मिलकर देना पड़ रहा है .बच्चे कई किलोमीटर दूर से पैदल चलकर आते हैं और कई जगह पर बच्चों को बसों के भी सुविधा नहीं मिल रही है. ऐसे में कई बार बच्चे टैक्सियों के माध्यम से भी स्कूल पहुंच रहे हैं. सरकार और प्रशासन से आग्रह है कि वह स्कूल प्रबंधन समिति के द्वारा दिए जा रहे किराए को लेकर भी बजट का प्रावधान करें."

आपदा के बाद भी नहीं सुधरी स्कूलों की हालत
आपदा के बाद भी नहीं सुधरी स्कूलों की हालत (ETV Bharat)

आपदा में ढह गया था स्कूल भवन

अभिभावक प्रताप सिंह कहते हैं कि, पहले जो स्कूल गुशैनी में चलता था. वह बाजार में था और अब यह भवन करीब 2 किलोमीटर दूरी पर स्थित है. ऐसे में बसों की सुविधा न होने के चलते बच्चों को 2 किलोमीटर का पैदल सफर तय करना पड़ता है. कई बार शाम को बच्चे पैदल ही अपने घरों की ओर रवाना होते हैं. निजी भवन का किराया भी एसएमसी के माध्यम से दिया जा रहा है. ऐसे में अब सरकार को चाहिए कि वह जल्द से जल्द स्कूल का अपना भवन बनाने की दिशा में कार्य करें.

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किराया देकर शिक्षा ग्रहण कर रहे छात्र (ETV Bharat)

एसएमसी के माध्यम से दिया जा रहा 22 हजार प्रतिमाह

सीनियर सेकेंडरी स्कूल गुशैनी स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष महेंद्र सिंह ने बताया कि, "बीते साल सितंबर माह से लेकर मार्च महीने तक भवन का कोई किराया नहीं लिया गया. क्योंकि बरसात के चलते यहां सड़के भी बंद थी और बच्चों को शिक्षा ग्रहण करने के लिए किसी प्रकार की भी व्यवस्था नहीं थी. अब स्कूल प्रबंधन समिति के माध्यम से प्रतिमाह 22,000 रुपए किराया किया जा रहा है."

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निजी भवन में 22 हजार किराया देकर पढ़ाई कर रहे छात्र (ETV Bharat)

महेंद्र सिंह का कहना है कि स्कूल प्रबंधन समिति और शिक्षा विभाग के द्वारा मिलकर नई भूमि का चयन किया गया और एफआरए के लिए उसकी फाइल भी वन विभाग को भेजी गई है. शिक्षा विभाग और सरकार से आग्रह है कि वे भवन के किराए के लिए भी बजट का प्रावधान करें और भूमि के लिए जो अनापत्ति प्रमाण मिलना है, उसे भी जल्द जारी करें.

'आधिकारियों को समक्ष रखा गया है स्कूल किराया का मामला'

सीनियर सेकेंडरी स्कूल गुशैनी के प्रधानाचार्य के एल शर्मा का कहना है कि, "पहले स्कूल चलाने के लिए भवन मालिक के द्वारा कोई किराया नहीं लिया गया. लेकिन, अब यहां पर किराया दिया जा रहा है. स्कूल का पुराना भवन क्षतिग्रस्त हो गया है. नए भवन निर्माण को लेकर भी विभाग के द्वारा औपचारिकताएं पूरी की जा रही है. शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों के समक्ष भी किराए का मामला रखा गया है. लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को भी नए भवन में किराए संबंधी औपचारिकताएं पूरी करने के बारे में निर्देश जारी किए गए हैं. सभी औपचारिकताएं शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी."

निजी भवन में किराया देकर शिक्षा ग्रहण कर रहे छात्र (ETV Bharat)

आपदा के बाद भी हालात जस-के-तस, आज भी बजट का इंतजार

हिमाचल में 2023 और 2025 की आपदा में कुल्लू जिले के बंजार विधानसभा क्षेत्र के कई सरकारी स्कूलों को नुकसान पहुंचा था. क्षेत्र में कुल 132 राजकीय स्कूल भवन आपदा से क्षतिग्रस्त हुए थे. इनमें 10 भवन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए, जबकि 122 भवनों को आंशिक नुकसान पहुंचा था. हिमाचल विधानसभा के मानसून सत्र में प्रदेश सरकार की ओर से दिए गए जवाब के अनुसार, बंजार क्षेत्र में आपदा प्रभावित स्कूलों से जुड़े 39 कार्यों (8 स्कूल भवनों के निर्माण और 31 स्कूल भवनों की मरम्मत) के लिए बजट जारी किया गया है. आपदा प्रभावित कई स्कूलों के लिए अब तक बजट जारी नहीं हुआ है. बंजार से भाजपा विधायक सुरेंद्र शौरी ने दावा किया कि 81 स्कूलों के मरम्मत कार्यों के एस्टीमेट अभी भी बजट स्वीकृति का इंतजार कर रहे हैं.

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