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नेपाल त्रासदी पर BHU में छात्रों ने दी श्रद्धांजलि, मदद को बढ़ाएंगे हाथ

श्रद्धांजलि सभा का आयोजन, दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की.

नेपाल में हुई त्रासदी पर बीएचयू में छात्रों ने दी मृतकों को श्रद्धांजलि
नेपाल में हुई त्रासदी पर बीएचयू में छात्रों ने दी मृतकों को श्रद्धांजलि (Photo credit;ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : August 30, 2026 at 12:19 PM IST

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वाराणसी: नेपाल में आई भीषण त्रासदी से प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त करने एवं दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय इकाई द्वारा शनिवार को इंटरनेशनल बॉयज हॉस्टल में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया. इस दौरान उपस्थित विद्यार्थियों एवं कार्यकर्ताओं ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की तथा शोकाकुल परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की

एक-दूसरे के साथ खड़ा होना मानवीय जिम्मेदारी: प्रांत संगठन मंत्री आकाश गौर ने कहा की नेपाल में हुई यह त्रासदी अत्यंत पीड़ादायक और हृदयविदारक है. इस कठिन समय में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद नेपाल के पीड़ित नागरिकों एवं उनके परिवारों के साथ पूरी संवेदना के साथ खड़ी है. भारत और नेपाल के संबंध केवल दो देशों के संबंध नहीं हैं, बल्कि हमारी साझा संस्कृति, परंपराओं और आत्मीयता से जुड़े हुए हैं. संकट की इस घड़ी में एक-दूसरे के साथ खड़ा होना ही हमारी मानवीय जिम्मेदारी है.

हम सभी को गहरे दुःख में डाल दिया: वहीं अभाविप काशी हिन्दू विश्वविद्यालय इकाई के इकाई अध्यक्ष पल्लव सुमन ने कहा की नेपाल में आई इस भीषण त्रासदी ने हम सभी को गहरे दुःख में डाल दिया है. इस कठिन समय में हम नेपाल के प्रत्येक पीड़ित परिवार के साथ अपनी एकजुटता और संवेदना प्रकट करते हैं. अभाविप सदैव मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक उत्तरदायित्व को सर्वोपरि मानती है. हम ईश्वर से दिवंगत आत्माओं की शांति तथा प्रभावित लोगों को इस संकट से उबरने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना करते हैं.

इस दौरान नेपाल के शोध छात्र अमृत ने कहा, नेपाल में हुई इस त्रासदी ने हम सभी को भीतर तक झकझोर दिया है. इस कठिन समय में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों एवं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा आयोजित यह श्रद्धांजलि सभा नेपाल के प्रति उनकी संवेदनशीलता और आत्मीयता को दर्शाती है. भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक एवं पारिवारिक संबंध हैं. आज जब नेपाल कठिन परिस्थिति से गुजर रहा है, तब भारत से मिल रही संवेदना और सहयोग हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है.

विद्यार्थियों ने भी इसमें सहभागिता की: श्रद्धांजलि सभा की विशेष बात यह रही कि नेपाल के साथ-साथ काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में अध्ययनरत विभिन्न अन्य देशों के विद्यार्थियों ने भी इसमें सहभागिता की. विदेशी विद्यार्थियों ने दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए नेपाल के पीड़ित नागरिकों और उनके परिवारों के प्रति अपनी संवेदना और एकजुटता व्यक्त की. विभिन्न देशों के विद्यार्थियों की सहभागिता ने यह संदेश दिया कि मानवीय संवेदनाओं की कोई सीमा नहीं होती और संकट की घड़ी में पूरी मानवता पीड़ितों के साथ खड़ी होती है.

अभाविप कार्यकर्ताओं ने कहा कि आपदा एवं संकट की घड़ी में मानवता, संवेदना और परस्पर सहयोग ही सबसे महत्वपूर्ण हैं. श्रद्धांजलि सभा के माध्यम से नेपाल के प्रभावित नागरिकों के प्रति एकजुटता व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्माओं की शांति तथा प्रभावित परिवारों को इस दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की गई.


वहीं पिछले दिनों हुई भारी वर्षा के कारण सर सुंदरलाल चिकित्सालय, काशी हिंदू विश्वविद्यालय परिसर, छात्रावासों एवं आवासीय परिसरों के विभिन्न क्षेत्रों में उत्पन्न गंभीर जलभराव की समस्या के समाधान को लेकर बीएचयू के छात्रों ने संबंधित अधिकारियों के साथ मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लिया तथा उन्हें उत्पन्न समस्याओं से अवगत कराया. इस दौरान विश्वविद्यालय निर्माण विभाग (यूडब्ल्यूडी) के प्रभारी प्रोफेसर प्रो. आंचल श्रीवास्तव सहित विभाग के संबंधित अधिकारियों को चिकित्सालय परिसर, विश्वविद्यालय परिसर, विभिन्न छात्रावासों एवं आवासीय परिसरों में जलभराव तथा जल निकासी की समस्या से अवगत कराया गया.

जलभराव के कारण विद्यार्थियों, रोगियों, उनके परिजनों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों को हो रही कठिनाइयों को भी अधिकारियों के समक्ष प्रमुखता से रखा गया. समस्या के स्थायी समाधान के लिए छात्र नेता आशुतोष सिंह ‘यीशु’ की ओर से विश्वविद्यालय निर्माण विभाग को लिखित पत्र भी सौंपा गया, जिसमें जल निकासी व्यवस्था को सुदृढ़ करने, जलभराव वाले स्थानों को चिह्नित कर आवश्यक कार्य कराने और भविष्य में भारी वर्षा के दौरान इस प्रकार की स्थिति की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए स्थायी एवं प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की गई.

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