BSSC के खिलाफ फिर उबल रहा छात्रों का गुस्सा, 10 दिन का अल्टीमेटम, परीक्षा तिथि नहीं आई तो होगा बड़ा आंदोलन
क्या एक बार फिर पटना में आंदोलन देखने को मिलेगा? दरअसल जिस प्रकार से परिस्थिति बन रही है, वह तो इसी ओर इशारा करता है.


Published : June 29, 2026 at 3:14 PM IST
पटना : बिहार कर्मचारी चयन आयोग यानी बीएसएससी के खिलाफ अभ्यर्थियों का आक्रोश एक बार फिर मुखर होने लगा है. द्वितीय इंटर स्तरीय संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा और सीजीएल-4 की परीक्षा तिथि घोषित नहीं होने से नाराज छात्रों ने आंदोलन की चेतावनी दी है. छात्र नेता दिलीप ने आयोग को 10 दिनों का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि निर्धारित अवधि के भीतर परीक्षा कार्यक्रम जारी नहीं किया गया तो पटना की सड़कों पर बड़ा छात्र आंदोलन होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी आयोग और उसके अध्यक्ष की होगी.
'तीन साल में तारीख घोषित नहीं' : छात्र नेता दिलीप ने कहा कि द्वितीय इंटर स्तरीय भर्ती प्रक्रिया सितंबर 2023 में 12199 पदों के साथ शुरू हुई थी. बाद में सरकार ने पदों की संख्या बढ़ाकर 26426 कर दी, जिसके बाद आवेदन पोर्टल दोबारा खोला गया और फरवरी 2026 में आवेदन की प्रक्रिया पूरी हुई. उनके अनुसार इस भर्ती के लिए 33 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है, लेकिन लगभग तीन वर्ष बीत जाने के बावजूद परीक्षा की तारीख तक घोषित नहीं की गई है.
''लाखों युवाओं के भविष्य को अनिश्चितता में डालकर आयोग उनकी मानसिक स्थिति को प्रभावित कर रहा है. अभ्यर्थी वर्षों से तैयारी कर रहे हैं, लेकिन परीक्षा कब होगी, इसको लेकर कोई स्पष्टता नहीं है. इससे छात्रों में निराशा और असंतोष लगातार बढ़ रहा है.''- दिलीप, छात्र नेता
'युवाओं के सामने भविष्य को लेकर गंभीर संकट' : दिलीप ने बीएसएससी सीजीएल-4 भर्ती का मुद्दा भी उठाया. उनके मुताबिक 1883 पदों के लिए यह बहाली करीब 10 महीने पहले निकाली गई थी और नवंबर 2025 में आवेदन प्रक्रिया समाप्त हो चुकी है. लाखों अभ्यर्थियों ने आवेदन किया, लेकिन अब तक परीक्षा कार्यक्रम घोषित नहीं किया गया है. ऐसे में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के सामने भविष्य को लेकर गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है.
छात्र नेता दिलीप ने संविदा कर्मियों को दिए जा रहे अतिरिक्त वेटेज अंकों का भी विरोध किया. उनका कहना है कि इस व्यवस्था से सामान्य अभ्यर्थियों के लिए समान अवसर का सिद्धांत प्रभावित हो रहा है. उन्होंने मांग की कि संविदा आधारित अतिरिक्त अंक की व्यवस्था को समाप्त किया जाए, ताकि नियमित तैयारी करने वाले और संविदा पर कार्यरत अभ्यर्थियों को समान स्तर पर प्रतिस्पर्धा का अवसर मिल सके.
''वेटेज अंक का प्रावधान भविष्य में विवाद और कथित सेटिंग-गेटिंग को बढ़ावा दे सकता है. प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए सभी उम्मीदवारों के लिए एक समान नियम लागू होने चाहिए. यही कारण है कि छात्र संगठन इस व्यवस्था का खुलकर विरोध कर रहे हैं.''- दिलीप, छात्र नेता
'हजारों छात्र सड़कों पर उतरेंगे' : छात्र नेता दिलीप ने प्रथम इंटर स्तरीय भर्ती प्रक्रिया का उदाहरण देते हुए कहा कि वर्ष 2014 में निकली वैकेंसी की प्रक्रिया लंबे समय तक अटकी रही और वर्ष 2020 में बड़े छात्र आंदोलन के बाद ही आयोग सक्रिय हुआ था. उनका कहना है कि इतिहास खुद को दोहराता हुआ दिखाई दे रहा है और यदि आयोग ने समय रहते फैसला नहीं लिया तो एक बार फिर हजारों छात्र सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे.
10 दिनों का अल्टीमेटम : छात्र नेता दिलीप ने कहा कि अभ्यर्थी आंदोलन नहीं करना चाहते, बल्कि केवल समय पर परीक्षा और पारदर्शी प्रक्रिया की मांग कर रहे हैं. उन्होंने आयोग से तत्काल द्वितीय इंटर स्तरीय और सीजीएल-4 की परीक्षा तिथियां घोषित करने तथा संविदा वेटेज की व्यवस्था पर पुनर्विचार करने की अपील की. साथ ही चेतावनी दी कि 10 दिनों के भीतर सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए और परीक्षा की तिथि की घोषणा नहीं हुई तो राजधानी पटना में व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी आयोग प्रशासन की होगी.
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