सफाई कर्मी के बेटे का संघर्ष : परिवार के हालात बदलने के लिए कोटा कोचिंग की मदद से JEE MAIN में हुआ सफल
पोषक कांत राय के जेईई मेन में पहले 22 परसेंटाइल अंक आए थे. कोटा में पढ़कर इस परिणाम को 90.14 परसेंटाइल तक लेकर गया है.

Published : February 23, 2026 at 1:58 PM IST
कोटा: इंजीनियरिंग और मेडिकल एंट्रेंस का मक्का कोटा कोचिंग कही जाती है. इन परीक्षा में सफलता दिलाने के लिए यह सबसे मजबूत भी है. ऐसे सैंकड़ों उदाहरण कोटा कोचिंग के लगातार सामने आते हैं, जिसमें एक नया नाम उत्तर प्रदेश के संविदा सफाई कर्मी के बेटे पोषक कांत राय का जुड़ गया है. परिवार के हालात बदलने के लिए पोषक कांत ने पढ़ाई के लिए कोटा कोचिंग को चुना.
ऐसे में जहां पहले उसके जेईई मेन में 22 परसेंटाइल अंक आए थे, कोटा कोचिंग की मदद से इसमें अच्छा खासा बदलाव किया है. कोटा के मोशन कोचिंग संस्थान में पढ़कर इस परिणाम को 90.14 परसेंटाइल तक लेकर गया है. अप्रैल सेशन में भी अच्छी मेहनत से तैयारी में जुटा हुआ है. उसका लक्ष्य जेईई एडवांस्ड में सफलता है, ताकि किसी आईआईटी में प्रवेश ले सके. वह अपने परिवार का पहला बच्चा होगा, जो किसी आईआईटी में पढ़ने के लिए जाएगा.
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पोषक कांत का कहना है कि वह वाल्मिकी समाज से है और अनुसूचित जाति में आता है. उसके पिता कमलेश कुमार नगर पालिका में संविदा सफाई कर्मी हैं. जबकि उसके दादा रणजीत सिंह भी अस्पताल में सफाई के काम से जुड़े थे. मोशन कोचिंग संस्थान के सीईओ नितिन विजय का कहना है कि कोटा इस तरह के बच्चों की मदद पढ़ाई में करता है. ऐसे लाखों बच्चों का भविष्य कोटा ने संवार दिया है.
पढ़ाई नहीं करोगे तो सफाई करनी पड़ेगी : पोषक कांत का कहना है कि बचपन में पिता कहते थे- पढ़ाई नहीं करोगे तो हमारी तरह ही सफाई के काम से जुड़ना होगा. इसीलिए हालात बदलने के लिए मैंने पढ़ाई को हथियार बनाने में जुट गया. परिवार ने भी मदद की है. पोषक कांत का कहना है कि उन्होंने पांचवीं की पढ़ाई उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के अंडा गांव में ही की है. पढ़ाई में अच्छा होने के चलते पास के कोंच कस्बे में पिता साइकिल से मुझे छोड़ देते थे. यह 5 किलोमीटर की दूरी पर था. पिता भी इस कस्बे में सफाई के लिए जाते थे. यहां आठवीं तक पढाई की है, फिर मैं पढ़ाई में थोड़ा ठीक था. इसलिए मुझे कक्षा 9 में निजी स्कूलों में दाखिला दिलाया. यह अंग्रेजी माध्यम का स्कूल था. बाद में कक्षा 10 में मुझे जालौन शहर में ही पढ़ाई के लिए रख दिया, लेकिन रिजल्ट मेरा 54% ही आया था.
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गलत बच्चों से दोस्ती, ठीक से नहीं पढ़ा : पोषक कांत का कहना है कि मैंने 11वीं की पढ़ाई भी की, लेकिन ठीक से नहीं पढ़ पाया. इसीलिए वापस गांव में बुला लिया गया. मेरी दोस्ती कुछ गलत बच्चों से हो गई थी. इसलिए मुझे वापस बुलाया गया था. मुझे अफसोस भी था, लेकिन बचपन के दोस्त देवांशु ने मुझे कहा कि तुम ठीक से पढ़ोगे तो आगे बढ़ जाओगे. इसके बाद मैंने अपनी पढ़ाई के लिए दोबारा घर पर बात की. बड़ी मुश्किल से सहमति मिली. जिसके बाद दोबारा पढ़ाई शुरू की और साल 2025 में 12वीं में 67% अंक से पास हुआ.
भाई ने दी कोटा से पढ़ने की सलाह : जेईई मेन जनवरी सेशन 2025 में मुझे 22 और अप्रैल में 32 परसेंटाइल अंक मिले. मैं फिर निराश हो गया, लेकिन मेरा भाई विष्णुकांत कोटा से ही पढ़कर सफल हुआ था. उसने कानपुर के सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रवेश ले लिया था. उसने मुझे सलाह दी और कहा वहां पर सफलता जरूर मिलेगी, लेकिन तुम्हें मेहनत करनी होगी. इसके बाद में 2025 में कोटा आया और यहां पर पढ़ाई शुरू की.
मोबाइल और सोशल मीडिया से दूरी : पोषक कांत का कहना है कि मैंने मोबाइल और सोशल मीडिया से यहां पर दूरी बना ली. केवल उन्हीं चैप्टर पर फोकस किया, जिनमें कमजोर था. मैंने सभी पर पकड़ बना ली. इसके साथ ही मेरे पहले से मजबूत चैप्टर को भी मैंने छोड़ा नहीं, उनकी लगातार प्रैक्टिस करता रहा. मुझे कोटा मोशन कोचिंग के शिक्षकों ने सही दिशा में मेहनत करना सिखाया और इसी की बदौलत जेईई मेन के जनवरी सेशन में 90.14 परसेंटाइल रिजल्ट आया है. इसने मुझे भी चौंका दिया है. मेरे पिता कमलेश कुमार को भी इस परिणाम से खुशी हुई है. मां दीपा कुमारी भी काफी खुश हैं.

