मिड डे मील के दौरान बच्चों के बीच आवारा डॉग, बच्चों की सुरक्षा और स्वच्छता पर उठे सवाल
बलौदाबाजार के सरकारी स्कूल में मध्यान्ह भोजन के समय आवारा डॉग के बच्चों के बीच में घूमने का मामला सामने आया है.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : February 16, 2026 at 5:41 PM IST
बलौदाबाजार : सरकारी स्कूल में बच्चों की सुरक्षा एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं. कुछ दिन पहले पलारी विकासखंड के लच्छनपुर स्कूल में बच्चों को कथित तौर पर कुत्तों का जूठा भोजन परोसे जाने का मामला सामने आया था. उस घटना की गूंज अभी थमी भी नहीं थी कि अब बलौदा बाजार विकासखंड के स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय, लाहौद का एक नया वीडियो सामने आया है. वीडियो में मध्यान्ह भोजन कर रहे बच्चों के बीच एक आवारा कुत्ता खुलेआम घूमता दिखाई दे रहा है. यह दृश्य सिर्फ एक लापरवाही नहीं, बल्कि उन निर्देशों की अनदेखी भी है जो सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के आदेशों के बाद लोक शिक्षण संचालनालय ने जारी किए थे.
अभिभावकों ने बनाया वीडियो
अभिभावकों ने स्कूल परिसर में वीडियो बनाया है.जिसमें बच्चे पंक्तिबद्ध बैठकर मध्यान्ह भोजन कर रहे हैं. कुछ बच्चे खेलते हुए नजर आ रहे हैं. इसी दौरान एक आवारा कुत्ता बच्चों के बेहद करीब घूमता दिखाई देता है. कुत्ता बच्चों के बीच से गुजरता है, आसपास मंडराता है और किसी भी स्तर पर उसे रोकने या बाहर निकालने की कोई तत्परता नजर नहीं आती.वीडियो में यह भी स्पष्ट है कि स्कूल परिसर खुला है और पशुओं के प्रवेश को रोकने के लिए कोई ठोस व्यवस्था दिखाई नहीं दे रही.
प्राचार्य का दावा निर्देश का हो रहा पालन
इस मामले में स्कूल के प्राचार्य केशव प्रसाद साहू का कहना है कि स्कूल में एक शिक्षक को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है.उनके अनुसार, निर्देशों का पालन किया जा रहा है और स्कूल प्रबंधन बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर है. हालांकि वीडियो में जो दृश्य सामने आया है, वह इन दावों से मेल नहीं खाता. यदि नोडल अधिकारी नियुक्त है, तो फिर मध्यान्ह भोजन के दौरान कुत्ता परिसर में कैसे पहुंच गया.वहीं जिलाशिक्षाधिकारी ने कार्रवाई करने का भरोसा दिलाया.
पहले भी इस तरह की घटना सामने आ चुकी है.सभी स्कूलों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे. यदि लाहौद स्कूल में लापरवाही पाई जाती है तो कार्रवाई की जाएगी और निर्देश दोबारा जारी किए जाएंगे- डॉ संजय गुहे,जिला शिक्षा अधिकारी
अभिभावकों में नाराजगी
वीडियो सामने आने के बाद अभिभावकों में नाराजगी है. कई अभिभावकों का कहना है कि वे अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में इसलिए भेजते हैं ताकि उन्हें बेहतर शिक्षा और सुरक्षित वातावरण मिल सके. लेकिन इस तरह की घटनाएं भरोसा तोड़ने का काम करती हैं. कुछ अभिभावकों ने कहा कि मध्यान्ह भोजन योजना बच्चों के पोषण के लिए है, लेकिन यदि भोजन के दौरान ही स्वच्छता और सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो पा रही, तो यह गंभीर चिंता का विषय है.

पहले भी हो चुका है विवाद
जिले में हाल ही में लच्छनपुर स्कूल का मामला सामने आया था, जहां बच्चों को कथित तौर पर कुत्तों का जूठा भोजन परोसे जाने की बात सामने आई थी.उस घटना ने पूरे जिले में आक्रोश पैदा किया था और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे थे. इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी और अन्य अधिकारियों ने सख्त निर्देश जारी किए थे. सभी स्कूलों को चेतावनी दी गई थी कि परिसर की स्वच्छता और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा. लेकिन लाहौद का ताजा मामला बताता है कि जमीनी स्तर पर हालात अब भी संतोषजनक नहीं हैं.

क्या है शिक्षा विभाग का आदेश ?
लोक शिक्षण संचालनालय छत्तीसगढ़ ने पत्र क्रमांक 709 के माध्यम से स्पष्ट निर्देश जारी किए गए थे कि प्रत्येक स्कूल में एक प्रभारी नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाए. उसकी जिम्मेदारी होगी कि स्कूल परिसर के अंदर और बाहर कुत्तों की आवाजाही पर निगरानी रखी जाए और आवश्यक कदम उठाए जाएं. इन निर्देशों की पृष्ठभूमि में न्यायालयों के आदेश भी हैं, जिनमें स्कूल परिसरों में बच्चों की सुरक्षा और स्वच्छता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही गई है. स्पष्ट कहा गया है कि स्कूल परिसर में आवारा पशुओं का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित होना चाहिए. लेकिन लाहौद के इस स्कूल का वीडियो यह सवाल खड़ा कर रहा है कि क्या ये आदेश सिर्फ कागजों तक सीमित हैं?
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