भिवानी में स्ट्रॉबेरी की खेती से मालामाल हो रहे हैं किसान, प्रति एकड़ इतनी हो रही है कमाई
भिवानी में स्ट्रॉबेरी की खेती कर किसान लखपति बन रहे हैं. एनसीआर नजदीक होने के कारण किसान सीधे खुद मंडी में फसल बेचते हैं.

Published : February 16, 2026 at 4:36 PM IST
|Updated : February 16, 2026 at 5:04 PM IST
भिवानी: हरियाणा के भिवानी जिले के बीरण गांव निवासी किसान मनफूल सैनी स्ट्रॉबेरी की खेती कर प्रति एकड़ ढाई से तीन लाख मुनाफा कमा रहे हैं. मनफूल सैनी बीते 10 सालों से बापोड़ा गांव में स्ट्रॉबेरी की खेती करते हैं. इनके अलावा कई किसान स्ट्रॉबेरी की खेती से लाखों रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं.

प्रति एकड़ 5 लाख के करीब आता है खर्चाः किसान मनफूल सैनी ने बताया कि "मैंने 13 एकड़ में स्ट्रॉबेरी लगाई हुई है. एक एकड़ में लगभग 5 लाख के करीब खर्चा आता है. अगर फ्रूट अच्छा हो और मंडी में भाव अच्छा मिले तो प्रति एकड़ ढाई से तीन लाख रुपए की बचत हो जाती है. स्ट्रॉबेरी की बिजाई सितंबर में की जाती है."
सिंचाई के लिए पानी का टीडीएस 250 होना चाहिएः "महाराष्ट्र के पूना से स्ट्रॉबेरी के पौधे मंगाता हूं. स्ट्रॉबेरी में फ्रेश पानी की आवश्यकता होती है, जिसका टीडीएस कम से कम 250 होना चाहिए और जमीन उपजाऊ होना चाहिए. इसके अलावा रेतीले एरिया में भी स्ट्रॉबेरी की खेती हो सकती है. शुरुआत में खेत की अच्छे से जुताई करनी चाहिए. देशी खाद डालकर खेत तैयार किया जाता है और फिर पौधों की रोपाई की जाती है."

13 एकड़ में बेच चुके हैं 80 लाख की स्ट्रॉबेरीः मनफूल सैनी ने बताया कि "13 एकड़ में बिजाई की गई स्ट्रॉबेरी में से करीब 80 लाख की स्ट्रॉबेरी बेची जा चुकी है. खेत में बिजाई की गई स्ट्रॉबेरी को खुद ही पैक करते हैं. खुद परिवार और लेबर से स्ट्रॉबेरी को पैक करवाया जाता है."

सीधे दिल्ली के आजादपुर मंडी में खुद बेचते हैं स्ट्रॉबेरीः मनफूल सैनी ने बताया कि "स्ट्रॉबेरी खुद की गाड़ी में दिल्ली लेकर जाते हैं और दिल्ली की आजादपुर मंडी में बेचते हैं. इसकी खेती में फंगस की ज्यादा दिक्कत है. हालांकि सरकार के द्वारा सहायता भी दी जाती है। अगर कोई दूसरा स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू करना चाहे तो वह शुरुआत में थोड़ी जमीन पर खेती कर सकते हैं. अगर वे खुद 13 एकड़ की बात करते तो वे पट्टे पर लेकर स्ट्रॉबेरी की खेती करते हैं."

ओलावृष्टि के कारण इस साल हुआ है व्यापक नुकसानः दिनोद गांव निवासी किसान धर्मबीर ने बताया कि "मैं पिछले करीब 27 साल से स्ट्रॉबेरी की खेती कर रहा हूं. इस बार मैंने 8 एकड़ में स्ट्रॉबेरी की बिजाई की है. स्ट्रॉबेरी की फसल अच्छे से चल रही थी, लेकिन पिछले दिनों ओलावृष्टि हुई थी. उससे नुकसान हुआ है. ओलावृष्टि से 50 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है. ओलावृष्टि से पहले बहुत अच्छे से फूल चल रहा था और मजदूर भी काम लगे थे. ओलावृष्टि के कारण नुकसान हुआ है."

अच्छी फसल हो तो प्रति एकड़ 2-3 लाख का मुनाफाः किसान धर्मबीर ने कहा कि "हमारे यहां एक एकड़ में स्ट्रॉबेरी की खेती में करीब 10 लाख रुपए खर्च हो जाता है. शुरुआत से लेकर आखिर तक. इस बार ओलावृष्टि के कारण किसान न लाभ-न हानि की स्थिति में हैं, क्योंकि काफी नुकसान हुआ है. अगर अच्छे से स्ट्रॉबेरी की फसल पूरी हो तो प्रति एकड़ 2-3 लाख रुपए की बचत होती है, लेकिन इस बार ओलावृष्टि के कारण नुकसान हुआ है."

बच्चों की तरह स्ट्रॉबेरी की फसल का करते हैं देखभालः स्ट्रॉबेरी की फसल की देखरेख के बारे में किसान धर्मबीर ने बताया कि "स्ट्रॉबेरी को वे दिल्ली की आजादपुर मंडी में बेचते हैं. एक एकड़ में अच्छी फसल हो तो 8-10 हजार ट्रे पैदा हो जाती है. हमारे यहां कई किसानों ने स्ट्रॉबेरी की खेती की हुई है. आसपास के इलाके में करीब 60 एकड़ में स्ट्रॉबेरी की बिजाई की हुई है. इसमें फंगस की आशंका रहती है, जिसकी स्प्रे करनी पड़ती है और खाद डालनी पड़ती है. बच्चे के तरह पालना पड़ता है. इसमें ड्रिप सिस्टम से सिंचाई की जाती है."
ओलावृष्टि से नुकसान के लिए प्रति एकड़ 2 लाख का मुआवजा मिलेः धर्मबीर ने सरकार से मुआवजे की मांग की है. धर्मवीर ने कहा कि "पट्टे पर लेकर स्ट्रॉबेरी बिजाई की गई है. अगर घर की जमीन हो तो सरकार सब्सिडी देती है. सरकार को हर साल सब्सिडी देनी चाहिए. सरकार द्वारा विशेषज्ञों और चिकित्सकों की भी सहायता नहीं मिलती. खुद के दम पर सभी व्यवस्थाएं करनी पड़ती हैं. ओलावृष्टि से हुए नुकसान का कोई मुआवजा नहीं दिया गया है. सरकार को नुकसान की भरपाई के लिए 2 लाख प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा देना चाहिए."

