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लातेहार में स्ट्रॉबेरी की खेती ने बदली किसान की किस्मत, हो रही बंपर कमाई, पढ़ें इनकी सक्सेस स्टोरी

लातेहार में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना अंतर्गत स्ट्रॉबेरी की खेती कर किसान अपनी आय बढ़ा रहे हैं.

Strawberry cultivation in Latehar
लातेहार में स्ट्रॉबेरी की खेती. (फोटो-ईटीवी भारत)
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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : February 17, 2026 at 4:50 PM IST

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लातेहारः जहां चाह ,वहां राह. लातेहार के कुलगड़ा गांव निवासी रमेश भुइयां ने इस बात को पूरी तरह चरितार्थ कर दिखाया है. मात्र थोड़ी सी जमीन में स्ट्रॉबेरी की खेती कर रमेश बंपर कमाई कर रहे हैं. वर्तमान समय में रमेश भुइयां ग्रामीणों के लिए आईकॉन बन गए हैं.

दरअसल, रमेश भुइयां एक सीधे-साधे ग्रामीण किसान हैं. इनके पास जमीन भी काफी कम है. इस कारण खेती से ज्यादा मुनाफा नहीं हो पाता था. हालांकि रमेश हमेशा यह प्रयास करते थे कि थोड़ी से ही जमीन में बेहतर खेती कर अपने परिवार का बेहतर पालन-पोषण कर सकें. रमेश बताते हैं कि कुछ वर्ष पहले प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत गांव में जल छाजन समिति गठित की जा रही थी. रिचूघुटा जल छाजन समिति का उन्हें सचिव बनाया गया.

लातेहार में स्ट्रॉबेरी की खेती पर रिपोर्ट और किसानों का बयान. (वीडियो-ईटीवी भारत)

कैसे जगी उन्नत खेती के प्रति दिलचस्पी

जल छाजन समिति का सचिव बनने के बाद रमेश भुइयां भी उन्नत खेती के प्रति दिलचस्पी दिखाने लगे. जिला भूमि संरक्षण पदाधिकारी विवेक मिश्रा के प्रयास से गत वर्ष रमेश ने अपनी थोड़ी सी जमीन में स्ट्रॉबेरी की खेती आरंभ की थी. गत वर्ष खेती से उन्हें अच्छी आमदनी हुई. जिससे प्रभावित होकर उन्होंने इस वर्ष लगभग 5 डिसमिल जमीन में स्ट्रॉबेरी के पौधे लगाए हैं. प्रारंभिक दौर में ही इन्हें अब तक 30 से 40 हजार की आमदनी हो चुकी है. जबकि अभी भी खेतों में 50 हजार रुपये से अधिक के फल लगे हुए हैं.

विभागीय सहयोग मिला तो कर सके बेहतर खेती

रमेश भुइयां बताते हैं कि जिला भूमि संरक्षण पदाधिकारी विवेक मिश्रा के साथ-साथ तकनीकी विशेषज्ञ जेके श्रीवास्तव और बुद्धदेव पाल आदि लोगों ने स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए उन्हें काफी प्रोत्साहित किया और तकनीकी जानकारी दी. गत वर्ष उन्होंने स्ट्रॉबेरी की खेती थोड़ी सी जमीन में की थी. जिसमें अच्छा मुनाफा हुआ था. इसी से प्रभावित होकर इस वर्ष उन्होंने 5 डिसमिल जमीन में स्ट्रॉबेरी की खेती की है. वर्तमान समय में 25 हजार रुपये से अधिक की स्ट्रॉबेरी की बिक्री कर चुके हैं, जबकि अभी भी बड़े पैमाने पर स्ट्रॉबेरी के फल खेत में लगे हैं. उन्होंने कहा कि अपने खेतों में किसी भी प्रकार के रासायनिक खाद का प्रयोग नहीं करते हैं. इसी कारण खेती में लागत भी काफी कम आती है. जबकि फल का स्वाद काफी अच्छा होता है. उन्होंने कहा कि अगले वर्ष लगभग 20 डिसमिल जमीन में स्ट्रॉबेरी की खेती करेंगे. वही रमेश की पत्नी मीना देवी ने बताया कि पिछले दो वर्षों से स्ट्रॉबेरी की खेती आरंभ किए हैं. काफी अच्छा मुनाफा हो रहा है.

Strawberry cultivation in Latehar
लातेहार में स्ट्रॉबेरी की खेती. (फोटो-ईटीवी भारत)

किसानों की सहायता के लिए विभाग तत्परः डीएलसीओ

इधर, इस संबंध में जिला भूमि संरक्षण पदाधिकारी विवेक मिश्रा ने बताया कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना फेस 2 के अंतर्गत लातेहार जिले के सात पंचायत में कृषि विकास के कार्य संचालित किए जा रहे हैं. इसके तहत किसानों को उन्नत खेती से जोड़ा जा रहा है और उन्हें तकनीकी जानकारी के साथ-साथ अन्य प्रकार की सहायता भी दी जा रही है. उन्होंने बताया कि लातेहार डीसी उत्कर्ष गुप्ता और उप विकास आयुक्त सैयद रियाज अहमद के द्वारा इस कार्य में विभाग को हर प्रकार की मदद की जा रही है, जिससे विभाग किसानों को बेहतर सहायता उपलब्ध करा रहा है. उन्होंने बताया कि रमेश भुइयां पूरी तरह जैविक विधि से स्ट्रॉबेरी की खेती कर रहे हैं. जिससे उन्हें काफी अच्छी आमदनी हो रही है, खरीदार भी खुद उनके खेतों तक पहुंच रहे हैं.

Strawberry cultivation in Latehar
स्ट्रॉबेरी की हार्वेस्टिंग करते किसान रमेश भुइयां. (फोटो-ईटीवी भारत)

300 से 400 रुपये प्रति किग्रा बिक रही स्ट्रॉबेरी

खुले बाजार में स्ट्रॉबेरी 300 से लेकर 400 रुपये प्रति किलो की दर से बिक्री हो रही है. 5 डिसमिल में स्ट्रॉबेरी की खेती करने वाले रमेश प्रत्येक दिन 4 से 5 किलोग्राम स्ट्रॉबेरी की बिक्री कर रहे हैं. स्ट्रॉबेरी के फल 3 महीने तक निकलेंगे. प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना फेस 2 के नोडल ऑफिसर लातेहार भूमि संरक्षण पदाधिकारी विवेक मिश्रा लगातार यह प्रयास कर रहे थे कि किसानों को तकनीकी खेती से जोड़कर उनकी आमदनी बढ़ाई जाए. किसानों को नई-नई खेती से जोड़ने का प्रयास भी किया जा रहा था.

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