खास है कोडरमा का केसरिया कलाकंद, अब मिला GI टैग, जानिए क्या है इसका पाकिस्तान कनेक्शन
कोडरमा की केसरिया कलाकंद मिठाई को GI टैग मिला है. इस मिठाई की भी दिलचस्प कहानी है. भोला शंकर सिंह की रिपोर्ट.

Published : June 26, 2026 at 5:17 PM IST
कोडरमा: झारखंड के कोडरमा जिले का झुमरी तिलैया कभी रेडियो पर अपने फरमाइशी गीतों के लिए मशहूर था. लेकिन अब ये शहर केसरिया कलाकंद के लिए भी जाना जाएगा. यहां के केसरिया कलाकंद को जीआई टैग मिला है जिससे यहां के लोग काफी खुश हैं.
कोडरमा में बनने वाली केसरिया कलाकंद मिठाई झारखंड का एकमात्र ऐसा खाद्य पदार्थ है, जिसे जीआई टैग मिला है. जीआई टैग मिलने से अब कोडरमा का केसरिया कलाकंद विश्व के मानचित्र पर भी नजर आएगा. अब तक सिर्फ इस कलाकंद का स्वाद चख चुके लोग ही इसकी चर्चा करते थे, लेकिन अब जीआई टैग मिलने से कोडरमा में बने इस खास तरह की मिठाई को अन्य जगहों के लोग भी जान सकेंगे और इसका स्वाद ले सकेंगे.
कोडरमा में बने केसरिया कलाकंद की कहानी विभाजन के दंश से जुड़ा हुआ है. विभाजन के बाद दो भाई हंसराज भाटिया और मुल्कराज भाटिया पाकिस्तान से आकर कोडरमा में बस गए. एक भाई ने रांची में पंजाब स्वीट्स के नाम से दुकान खोली, वहीं दूसरे भाई ने कोडरमा में रहकर कलाकंद के जरिये व्यवसाय शुरू किया. भाटिया परिवार के किशोरी लाल भाटिया ने बताया कि 60 के दशक में उनके पिता ने कलाकंद की शुरुआत की थी. आज इस कलाकंद को जीआई टैग के साथ अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल गई है, जिससे उन्हें काफी खुशी है.

शुरुआती दिनों में कोडरमा में सिर्फ दो ही दुकानों में कलाकंद बनाया जाता था, उनमें से एक आनंद विहार आज भी लोगों की जिंदगी में मिठास घोलने का काम कर रहा है. आनंद विहार के संचालक संजीव खेतान ने बताया कि कोडरमा का पानी ही कोडरमा के केसरिया कलाकंद को अपने आप में अलग और खास बनाता है.

उन्होंने बताया कि दिल्ली में भी एक बार कलाकंद बनाने की शुरुआत हुई थी, लेकिन कोडरमा के केसरिया कलाकंद का टेस्ट वहां नहीं आ पाया. केसरिया कलाकंद दूध का बना एक ऐसा मिठाई है, जो छेना और खोवा का मिश्रण है. उन्होंने बताया कि जीआई टैग मिलने से कलाकंद के व्यवसाय को एक नई उड़ान मिलेगी.

कलाकंद के बढ़ते व्यवसाय के साथ कोडरमा जिले में कलाकंद की कई दुकानें खुल गई हैं. इसके अलग-अलग वैरायटी भी इन दुकानों में उपलब्ध हैं. विभाजन का दंश झेल चुके एक परिवार के द्वारा शुरू किए गए इस खास मिठाई को आज अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल गई है.
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