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10 लाख में बेच रहे थे बीएएमएस की फर्जी डिग्री, STF ने प्रयागराज से अंतरराज्यीय गिरोह के सरगना को गिरफ्तार किया

आरोपी करेली में सावित्रीबाई फुले मेडिकल रिसर्च सेंटर भी खोल रखा था. फर्जी डिग्री पर मरीजों का इलाज कर रहा था.

STF ने आरोपी को किया गिरफ्तार.
STF ने आरोपी को किया गिरफ्तार. (Photo Credit; STF)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : January 10, 2026 at 8:29 PM IST

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प्रयागराज : स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने बीएएमएस की फर्जी डिग्री और मार्कशीट बनाकर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है. गिरोह के मुख्य सरगना मोहम्मद तारूक को करेली से गिरफ्तार किया गया है. आरोपी लंबे समय से फर्जी आयुर्वेदिक डिग्रियों के सहारे न केवल युवाओं को गुमराह कर रहा था, बल्कि खुद को डॉक्टर बताकर मरीजों का इलाज भी कर रहा था.

एएसपी एसटीएफ शैलेंद्र सिंह ने बताया, 9 जनवरी की रात करीब 11 बजे करेली स्थित आरोपी के कार्यालय व क्लीनिक ‘सावित्रीबाई फुले मेडिकल रिसर्च सेंटर’ पर छापा मारकर गिरफ्तार किया गया है. तलाशी में एक कंप्यूटर सीपीयू, मोबाइल फोन, 32 जीबी की पेन ड्राइव और 68 फर्जी मार्कशीट व सर्टिफिकेट की प्रतियां बरामद हुईं हैं.

10 लाख में देता था फर्जी डिग्री : जांच में सामने आया कि आरोपी एक बीएएमएस डिग्री के बदले 6 से 10 लाख रुपये तक वसूलता था. इस फर्जीवाड़े का पता तब चला जब मिर्जापुर निवासी ब्रह्मानन्द की शिकायत की जांच शुरू की गई. आरोपी ने ब्रह्मानन्द से करीब छह लाख रुपये लेकर बीएएमएस की फर्जी डिग्री और प्रमाणपत्र उपलब्ध कराए. पूछताछ में आरोपी ने बताया कि सावित्रीबाई फुले मेडिकल रिसर्च सेंटर नाम से कार्यालय और क्लीनिक संचालित करता था. लोगों से लाखों रुपये लेकर बीएएमएस की फर्जी मार्कशीट और डिग्री उपलब्ध कराता था.

अलग-अलग संस्था के नाम से दी फर्जी डिग्री : जांच में सामने आया कि आरोपी ने मिर्जापुर निवासी ब्रह्मानन्द से अलग-अलग तिथियों में करीब छह लाख रुपये अपने बैंक खाते में लेकर शिवालिक आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज, बिजरवा आजमगढ़ और वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर के नाम से बीएएमएस की फर्जी मार्कशीट और डिग्री दी थी. इसी तरह रिया केसरवानी को उत्कल यूनिवर्सिटी, भुवनेश्वर (ओडिशा) के नाम से फर्जी डिग्री दी गई. अनिल धनीराम थलालप को महर्षि चरक आयुर्वेदिक रिसर्च विद्यापीठ, नारूल शुभम ईश्वर को वर्ल्ड काउंसिलिंग फॉर रूरल एजुकेशन डेवलपमेंट, लक्ष्मन रजक को महात्मा ज्योतिबा फुले एजुकेशनल रिसर्च ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट तथा संकल्प गुप्ता को बीएएमएस की मार्कशीट, पासिंग और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट उपलब्ध कराए गए.

पत्नी के नाम से भी तैयार की थी फर्जी डिग्री और मार्कशीट : इसके अलावा सादिक अली, मोहम्मद दानिश, मुकेश गौड़, मोहम्मद अमन, अबुल बसर और आशा को महर्षि चरक इंस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल साइंस के नाम से फर्जी मार्कशीट और डिग्री तैयार कर दी गई थी. जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रो होमियोपैथी मेडिकल रिसर्च डेवलपमेंट ऑफ इंडिया के नाम से स्वयं और अपनी पत्नी राशिदा परवीन के नाम फर्जी मार्कशीट और सर्टिफिकेट बनवाए थे.

फर्जी डिग्री पर कर रहा था इलाज : वहीं उत्तराखंड आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय, देहरादून के नाम से भी दोनों के लिए बीएएमएस की फर्जी डिग्री और मार्कशीट तैयार कराई गई थी. एएसपी एसटीएफ शैलेंद्र सिंह ने बताया, आरोपी इन्हीं फर्जी डिग्रियों के सहारे क्लीनिक चलाकर गंभीर रोगों से ग्रसित मरीजों का इलाज करता था और एक डिग्री के एवज में छह से दस लाख रुपये तक वसूले जाते थे.

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