हूल दिवस पर सिद्धो कान्हू पार्क में लगा रहा तांता, राजनीतिक-सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने दी श्रद्धांजलि
रांची में हूल दिवस पर सिद्धो-कान्हू पार्क में राजनीतिक दलों के नेताओं ने वीर शहीदों को श्रद्धांजलि दी.


Published : June 30, 2026 at 6:06 PM IST
रांची: हूल दिवस के मौके पर राजधानी रांची के सिद्धो-कान्हू पार्क में राजनीतिक-सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों का तांता लगा रहा. इस मौके पर भाजपा, कांग्रेस, आजसू, वामदल सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता और कार्यकर्ताओं द्वारा सिद्धो-कान्हू की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित की गई.
भाजपा नेताओं ने अर्पित की श्रद्धांजलि
हूल दिवस के मौके पर श्रद्धासुमन अर्पित करने पहुंचे भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, पूर्व सीएम अर्जुन मुंडा, भाजपा विधायक सीपी सिंह सहित कई नेताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की. भाजपा द्वारा अपने पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत अमर शहीद स्थल भोगनाडीह और राजधानी रांची स्थित मोरहाबादी के सिद्धो कान्हू पार्क तथा प्रदेश भाजपा कार्यालय के साथ-साथ राज्य के सभी मंडलों में हूल क्रांति के अमर शहीद महानायक सिदो-कान्हो, चांद-भैरव, फूलो-झानो की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई.
हूल दिवस स्वाभिमान और साहस का प्रतीक- आदित्य साहू
इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने कहा कि हूल दिवस जनजातीय समुदाय के कड़े संघर्ष और बलिदान का प्रतीक है. आजादी की लड़ाई में झारखंड के जनजातीय समुदाय के महानायकों की उल्लेखनीय और अग्रणी भूमिका रही है. हूल दिवस केवल एक ऐतिहासिक तिथि नहीं, बल्कि स्वाभिमान, साहस और स्वतंत्रता का अमर प्रतीक है.
30 जून 1855 को भोगनाडीह की धरती से वीर सिद्धो-कान्हू, चांद-भैरव, फूलो-झानो के नेतृत्व में हजारों संथालों ने ब्रिटिश शासन, शोषण और अन्याय के विरुद्ध 'हूल' का शंखनाद किया. सिद्धो-कान्हू, चांद-भैरव, फूलो-झानो सहित हजारों सपूतों ने अपनी कुर्बानी दी है. यह जनआंदोलन जल, जंगल, जमीन, संस्कृति और स्वाभिमान की रक्षा के लिए लड़ा गया, जिसने भारत के स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी.
आदित्य साहू ने कहा कि हूल क्रांति के महानायकों के अद्वितीय शौर्य, त्याग, बलिदान और मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए उनके संघर्ष को कभी भुलाया और बिसराया नहीं जा सकता है. भारतीय जनता पार्टी ने ऐसे तमाम आजादी के मतवालों और नायकों को उचित सम्मान देने का काम किया है जबकि विपक्षी पार्टियों ने उनका उपहास उड़ाने का काम किया है. प्रधान, मानकी, मुंडा को जो सुविधाएं भाजपा सरकार द्वारा दी गईं, राज्य सरकार द्वारा उस अधिकार से उन्हें वंचित कर अपनी मानसिकता जाहिर करने का काम किया गया है.
भोगनाडीह में राज्य सरकार के रवैए पर भाजपा की नाराजगी
भोगनाडीह में राज्य सरकार के रवैए पर प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने नाराजगी जताते हुए कहा कि इसमें प्रशासन के द्वारा अनावश्यक हस्तक्षेप हुआ है. उन्होंने कहा कि क्या अब आदिवासियों को अपने ही पूर्वजों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए सरकार और प्रशासन की अनुमति लेनी होगी और बॉन्ड भरना पड़ेगा? उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार का यह रवैया अंग्रेजी मानसिकता और हिटलरशाही नहीं तो क्या है? प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि सूचना मिल रही है कि भोगनाडीह को पुलिस छावनी में तब्दील कर 50 से अधिक मजिस्ट्रेट नियुक्त किए गए हैं, यह आदिवासियों को डराने का प्रयास नहीं तो क्या है. पिछले साल भी हूल दिवस के अवसर पर पुलिस द्वारा लाठीचार्ज और आंसू गैस चलाए गए थे.
हूल उलगुलान स्वतंत्रता और स्वाभिमान का प्रतीक- बाबूलाल मरांडी
इस दौरान नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि संथाल परगना की वीरभूमि से वर्ष 1855 में ब्रिटिश शासन की दमनकारी और शोषणकारी नीतियों के विरुद्ध हूल आंदोलन का ऐतिहासिक बिगुल फूंका गया. सिद्धो-कान्हू, चांद मुर्मु, भैरव मुर्मु तथा वीरांगनाएं फूलो मुर्मु और झानो मुर्मु के नेतृत्व में संथाल समाज ने जल, जंगल, जमीन और अपनी अस्मिता की रक्षा के लिए अभूतपूर्व संघर्ष का परिचय दिया. अंग्रेजी सत्ता को चुनौती देने वाला यह आंदोलन स्वतंत्रता, स्वाभिमान और अधिकारों के लिए जनजागरण का प्रतीक बना. हूल दिवस के अवसर पर उन सभी अमर शहीदों को विनम्र श्रद्धांजलि, जिनका त्याग, पराक्रम और राष्ट्रभाव आज भी हम सभी को अन्याय के विरुद्ध डटकर खड़े होने की प्रेरणा देता है.
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि 1855 के हूल उलगुलान के माध्यम से सिद्धू-कान्हू, चांद-भैरव ने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष कर उन्हें अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए बाध्य किया था. इसके बाद संताल परगना क्षेत्र में भूमि बंदोबस्ती की जिम्मेदारी स्थानीय प्रधान व्यवस्था को सौंपने की परंपरा स्थापित हुई, जो लंबे समय से चली आ रही है लेकिन दुर्भाग्यवश, पिछले कुछ वर्षों में कथित अबुआ सरकार के कार्यकाल में आदिवासी भूमि को लूटा जा रहा है.
इतिहास से सीख ले सरकार- अर्जुन मुंडा
इधर पूर्व सीएम अर्जुन मुंडा ने श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक है और इससे हमें सीख लेना चाहिए जो कुछ भी कमियां हैं उसे सरकार दूर करें.
हूल दिवस अन्याय के विरुद्ध संघर्ष का संकल्प दिवस- कांग्रेस
हूल दिवस के अवसर पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष केशव महतो कमलेश के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने स्वतंत्रता संग्राम के महानायक सिद्धो-कान्हू, चांद-भैरव तथा वीरांगनाओं फूलो-झानो को नमन करते हुए उनके बलिदान को याद किया.
इस अवसर पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा कि 30 जून 1855 भारतीय इतिहास का वह गौरवशाली दिन है, जब संथाल परगना के भोगनाडीह से सिद्धो-कान्हू ने अंग्रेजी हुकूमत, महाजनी शोषण और जमींदारी अत्याचार के विरुद्ध शंखनाद किया. यह केवल एक विद्रोह नहीं था, बल्कि भारत की स्वतंत्रता के लिए संगठित जनआंदोलन की पहली बड़ी क्रांति थी, जिसने अंग्रेजी सत्ता की नींव हिला दी. उन्होंने कहा कि इतिहासकारों के अनुसार इस महान आंदोलन में सिद्धो कान्हू, चांद, भैरव, फूलो और झानो सहित हजारों आदिवासी वीरों ने मातृभूमि और अपने स्वाभिमान की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया.
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