ETV Bharat / state

JNVU : ओल्ड कैंपस में 133 साल बाद लगी संस्थापक जसवंत सिंह की प्रतिमा, परिसर का नाम बदलने की मांग

इस परिसर का नाम कभी जसवंत कॉलेज था. पूर्व महाराजा जसवंत सिंह द्वितीय की प्रतिमा का अनावरण.

Statue of founder Jaswant Singh II installed at the JNVU Old Campus.
जेएनवीयू ओल्ड कैंपस में लगी संस्थापक जसवंत सिंह द्वितीय की प्रतिमा (ETV Bharat Jodhpur)
author img

By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : July 6, 2026 at 5:40 PM IST

3 Min Read
Choose ETV Bharat

जोधपुर: जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय का ओल्ड कैंपस, जिसे कभी जसवंत कॉलेज कहा जाता था. 133 साल पहले इसकी स्थापना करने वाले पूर्व महाराजा जसवंत सिंह द्वितीय की प्रतिमा का सोमवार को अनावरण किया गया. पूर्व महाराजा जसवंत सिंह ने उस समय इस परिसर की स्थापना की थी, जब मारवाड़ में पढ़ाई को लेकर जागरूकता बिलकुल नहीं थी. सोमवार को प्रतिमा अनावरण समारोह में पूर्व सांसद एवं राजपरिवार के सदस्य गजसिंह ने कहा कि बरसों बाद उनकी मूर्ति लगी है. अब इस परिसर का नाम जसवंत परिसर होना चाहिए. उन्होंने जोधपुर एयरपोर्ट का नाम भी महाराजा उम्मेद सिंह के नाम पर रखने की मांग की.

प्रतिमा अनावरण समारोह के मुख्य अतिथि सिक्किम के राज्यपाल ओम माथुर ने समारोह में मौजूद राज्यसभा सांसद सतीश पूनिया, पूर्व मंत्री राजेंद्र राठौड़, विधायक बाबूसिंह राठौड़ से कहा कि वे इस परिसर को जसवंत परिसर के नाम से करवाएं. राज्यपाल ने आह्वान किया कि हमें हमारे इतिहास को खोजना चाहिए ताकि ऐसे काम याद रख सकें. 100 साल पहले इस तरह का कैंपस बनाना आसान नहीं था. यहां से कितने ही विद्वान निकले हैं.जेएनवीयू छात्रसंघ के निवर्तमान अध्यक्ष अरविंद सिंह भाटी ने कहा कि इस प्रतिमा के लिए भामाशाहों का अटूट सहयोग रहा है. 'मैंने यहां 12 साल निकाले हैं, यह कार्य मेरे काम का अंतिम बिंदु है'. भाटी ने आगुंतकों का धन्यवाद दिया. कुलगुरु पवन कुमार शर्मा ने भी संबोधित किया.

ओममाथुर, राज्यपाल सिक्किम (ETV Bharat Jodhpur)

पढ़ें:टीकाराम जूली बोले, जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय का स्थापना दिवस भूलना महापुरुषों का अपमान

राठौड़ के उद्बोधन पर माथुर की टिप्पणी: सिक्किम के राज्यपाल ओम माथुर ने राजेंद्र राठौड़ के उद्बोधन पर टिप्पणी की. माथुर ने कहा, हमारे यहां पुष्प खिलते ही रहते हैं, मैं तो उस प्रदेश मेंं हूं जहां पत्थर पर पुष्प खिल रहे हैं. लगातार थोड़ा राजनीति में रहने के बाद उतार चढ़ाव देखना मुश्किल हो जाता हैं, लेकिन उतार चढ़ाव आने से ही व्यक्ति सक्षम बनता हैं. राजेंद्र राठौड़ ने कहा था कि यहां कुछ पुष्प खिल चुके हैं, कुछ खिलने वाले हैं. उनके इस व्यक्तव्य को राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा था.

1893 का अपना अलग महत्व: सांसद पूनिया ने कहा कि यह लोहे और धातु का प्रतिनिधित्व नहीं करती हैं. उस समय का आखर उजास ने आज की शिक्षा की नींव रखी. 1893 में जब यह परिसर शुरू हुआ था. उस अंधकार में प्रकाश की अलख जगाई थी. उस समय क्या चल रहा था, पता किया तो सामने आया कि जिस समय जसवंत कॉलेज की स्थापना हुई उस समय स्वामी विवेकानंदजी 1893 में भारत का प्रतिनिधित्व अमेरिका के शिकागो में कर रहे थे. 1893 सन अपने आप में बहुत महत्व रखता है.

पढ़ें:JNVU में शुल्क बढ़ोतरी के खिलाफ छात्र संगठनों का प्रदर्शन, कहा- जारी रहेगा आंदोलन

लुप्त इतिहास को जागृत किया: राजेंद्र राठौड़ ने अरविंद सिंह भाटी की सराहना करते हुए कहा, आपने जसवंत सिंह द्वितीय की प्रतिमा अनावरण से लुप्त हुए इतिहास को जागृत किया है. यह केवल धातु से बनी प्रतिमा नहीं हैं. इसमें इतिहास छुपा है. लोकतंत्र में सच्चे प्रजापालक का इतिहास है. 133 साल पहले मारवाड़ में काला अक्षर भैंस बराबर माना जाता था, शासन के लिए तलवार उठाने के समय में पूर्व महाराजा ने शिक्षा का महत्व समझा और इस परिसर में शिक्षा की मशाल परिसर में जलाई. जो 1962 में जोधपुर विश्वविद्यालय बना और आज का जेएनवीयू, लेकिन इस पौधे का रोपण जसवंतसिंह द्वितीय ने किया था.

पढ़ें:केंद्रीय मंत्री शेखावत बोले- आजादी के बाद 60-65 वर्षों में संस्कृति को सबसे अधिक नुकसान हुआ