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हिमाचल के इस शहर में 20.37 लाख की लागत से बना भीमराव अंबेडकर का स्मारक, जानें क्या है इसकी खासियत

स्मारक के निर्माण में मौसम प्रतिरोधी स्टेनलेस स्टील का इस्तेमाल किया गया है, ताकि ये शिमला की कठिन मौसमी परिस्थितियों में भी सुरक्षित रहे.

डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा का लोकार्पण
डॉ. भीमराव अंबेडकर के स्मार्क का लोकार्पण (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : April 14, 2026 at 3:30 PM IST

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शिमला: राजधानी शिमला में संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जहां मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने डॉ. अंबेडकर के एक भव्य स्मारक का लोकार्पण किया. यह स्मारक आधुनिक तकनीक और शिल्प का बेहतरीन नमूना है, जिसके निर्माण में मौसम प्रतिरोधी स्टेनलेस स्टील का विशेष रूप से इस्तेमाल किया गया है, ताकि यह शिमला की कठिन मौसमी परिस्थितियों में भी सुरक्षित रहे.

लगभग 20.37 लाख रुपये की लागत से तैयार इसकी ऊंचाई 15 फीट और चौड़ाई 10 फीट है. इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने बाबा साहेब के योगदान को याद करते हुए कहा कि इस स्मारक को स्थापित करने का मुख्य उद्देश्य संवैधानिक अधिकारों के प्रति जनता को जागरूक करना और युवाओं को न्याय व समानता के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करना है. उन्होंने इसे एक सांस्कृतिक पहचान और नागरिक गर्व का प्रतीक बताते हुए कहा कि आने वाले समय में यह स्थान एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक स्थल के रूप में उभरेगा.

डॉ. भीमराव अंबेडकर के स्मार्क का लोकार्पण (ETV Bharat)

सरकाघाट में हुए मर्डर पर जताया दुख

स्मारक के लोकार्पण के उपरांत मुख्यमंत्री ने सरकाघाट में हुए दुखद हत्या मामले पर भी प्रतिक्रिया दी. मुख्यमंत्री ने कहा कि ये समाज के लिए शर्मसार करने वाली घटना है. प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य आरोपी को पहले ही गिरफ्तार कर लिया है. डीजीपी को इस मामले में कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके. मुख्यमंत्री ने जनता को आश्वस्त करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश में महिलाएं और बेटियां पूरी तरह सुरक्षित हैं और सरकार इस तरह के अपराधों के खिलाफ अत्यंत संवेदनशील है.

वहीं, शिमला के ऐतिहासिक कमला नेहरू अस्पताल (केएनएच) को शिफ्ट करने के संबंध में चल रही अफवाहों पर भी मुख्यमंत्री ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी. उन्होंने कहा कि पूरे अस्पताल को कहीं भी स्थानांतरित नहीं किया जा रहा है और न ही वहां एमएलए हॉस्टल बनाने की सरकार की कोई योजना है. मुख्यमंत्री ने बताया कि केवल मरीजों की सुविधा और बेहतर चिकित्सा प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए गायनी विभाग को स्थानांतरित करने की प्रक्रिया चल रही है. उन्होंने साफ किया कि केएनएच एक पुराना और प्रतिष्ठित संस्थान है और सरकार का मुख्य ध्येय केवल वहां आने वाले मरीजों को आधुनिक और सुगम सुविधाएं प्रदान करना है.

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