विवादों में आया श्रीदेव सुमन विवि का ये आदेश, शासन के भी संज्ञान में नहीं मामला
श्रीदेव सुमन यूनिवर्सिटी का उपनल कर्मचारियों को समान काम के लिए समान वेतन देने का आदेश जारी है. ये आदेश कैबिनेट मंजूरी से उलट है.

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : August 20, 2026 at 7:26 PM IST
देहरादून: उत्तराखंड के श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय से एक ऐसा आदेश सामने आया है, जिसने पूरे प्रदेश में उपनल कर्मचारियों के बीच असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है. मामला उपनल कर्मचारियों को समान काम के बदले समान वेतन देने से जुड़ा हुआ है. जिसके पहले चरण में 10 साल की सेवा पूरी करने वालों को इसका लाभ दिया जाना था. लेकिन विश्वविद्यालय ने कर्मचारियों की एक लंबी चौड़ी लिस्ट जारी करते हुए 2024 तक के सेवा में आने वाले कर्मचारियों को भी पात्रता निर्धारण सूची में शामिल कर लिया.
उत्तराखंड में यूं तो तमाम विभागों के ऐसे आदेश सामने आते रहे हैं, जो न केवल हैरान करने वाले होते हैं. बल्कि नियम कानूनों को भी दरकिनार करते हैं. फिलहाल ताजा मामला श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय का है. जहां विश्वविद्यालय के कुल सचिव दिनेश चंद्रा ने एक ऐसा आदेश जारी किया जिसे पढ़कर हर कोई हैरान हो रहा है.

पूरा मामला उपनल कर्मचारियों को समान काम के बदले समान वेतन देने से जुड़ा हुआ है. इसमें कैबिनेट की मंजूरी के बाद शासन की तरफ से भी आदेश जारी हुए हैं, जिसमें राज्य भर में उपनल कर्मचारियों को समान काम के बदले समान वेतन देने की तय तारीख (15 अक्टूबर 2024) से लेकर नियम तय किए गए हैं.
हैरत की बात यह है कि श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय के कुलसचिव दिनेश चंद्रा ने इस आदेश के उलट 2024 तक विश्वविद्यालय में उपनल के माध्यम से नौकरी पाने वाले कर्मचारियों को भी समान काम के बदले समान वेतन देने का आदेश जारी कर दिया.
चौंकाने वाली बात यह है कि आदेश में साफ कहा गया कि विश्वविद्यालय द्वारा इसके लिए एक समिति गठित की गई थी जिसने इस पर निर्णय लिया. यही नहीं, विश्वविद्यालय के कुलपति ने भी इसका अनुमोदन किया और इसके बाद कुलसचिव ने इससे जुड़ा आदेश कर दिया. इस आदेश के साथ पात्रता निर्धारण सूची भी जारी की गई, जिसमें 2015, 2019, 2020, 2022, 2023 और यहां तक की 2024 में उपनल के माध्यम से विश्वविद्यालय में नियुक्ति लेने वाले कर्मचारियों को भी शामिल किया गया. इस सूची में कुल करीब 46 कर्मचारियों के नाम शामिल कर लिए गए.
चौंकाने वाली बात यह है कि जब इस मामले में ईटीवी भारत में उच्च शिक्षा सचिव बीवीआरसी पुरुषोत्तम से बात की तो उन्होंने, इस संदर्भ में विश्वविद्यालय द्वारा शासन को कोई जानकारी नहीं देने की बात कही.
दरअसल, यदि 2024 तक के कर्मचारियों को समान काम के बदले समान वेतन देने का लाभ दिया जाता है तो इसे पूरे प्रदेश में बाकी विभागों के कर्मचारी भी इसी आधार पर खुद को लाभ देने की मांग कर सकते हैं. जाहिर है कि यह स्थिति सरकार के लिए बेहद असमंजस भरी हो सकती है.
इस मामले में कैबिनेट की मुहर के बाद शासन ने आदेश किया था जिसमें समान काम के बदले समान वेतन के लिए 15 अक्टूबर 2024 तक की कट ऑफ डेट तय की गई थी. इसके अलावा यह भी साफ किया गया था कि पहले चरण में 10 साल की सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों को ही इसका लाभ दिया जाएगा. इसलिए आज से फिलहाल 2016 या इससे पहले की नियुक्ति पाने वाले उपनल कर्मचारियों को ही समान काम के बदले समान वेतन का लाभ दिया जा सकता है.
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