ट्रिपल इंजन सरकार के एक साल, राजधानी के चौक बेहाल, महापुरुषों का नाम, लेकिन बदहाल पहचान, स्मार्ट सिटी पर बड़ा सवाल
रायपुर नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने राजधानी के चौकों का निरीक्षण किया और आरोप लगाए.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : February 24, 2026 at 8:06 AM IST
रायपुर: जिसे स्मार्ट सिटी बनाने का वादा किया गया था, एक साल बीत गया, दावे हुए, योजनाएं गिनाई गईं, बैठकों में जयकारे लगे. लेकिन जब रात होती है और राजधानी के प्रमुख चौक-चौराहों पर अंधेरा उतरता है, तो सवाल भी उठते हैं. क्या यही है विकास का मॉडल? नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने शहर के प्रमुख चौकों का निरीक्षण किया और तस्वीरें साझा की. जहां बुझी लाइटें, बदहाल सफाई और उपेक्षा का सन्नाटा नजर आया.
महतारी चौक: प्रशासनिक क्षेत्र में ही अंधेरा
कलेक्ट्रेट परिसर का महतारी चौक. जहां से जिला प्रशासन की गतिविधियां संचालित होती हैं. दिन में यहां हलचल रहती है, लेकिन रात में लाइट तक नहीं जलती.अगर प्रशासनिक केंद्र का यह हाल है, तो बाकी इलाकों का अंदाजा सहज लगाया जा सकता है.

मिनीमाता चौक: पहली महिला सांसद के नाम पर उपेक्षा?
मिनी माता चौक-छत्तीसगढ़ की प्रथम महिला सांसद. उनके नाम से जुड़े चौक की बदहाली पर सवाल उठ रहे हैं. नेता प्रतिपक्ष का कहना है कि यह सिर्फ अव्यवस्था नहीं, बल्कि सम्मान से जुड़ा मुद्दा है.

संत कबीर चौक: वीआईपी एरिया में भी रोशनी का संकट
संत कबीर के नाम से मशहूर संत कबीर चौक, जो सिविल लाइन क्षेत्र में स्थित है. यहां से प्रशासनिक अधिकारियों का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन रात में रोशनी की व्यवस्था कमजोर बताई जा रही है. क्या स्मार्ट सिटी में ऐसा अंधेरा स्वीकार्य है?
शास्त्री चौक: सादगी के प्रतीक की पहचान पर सवाल
लाल बहादुर शास्त्री के नाम से प्रसिद्ध शास्त्री चौक की स्थिति भी चर्चा में है.राजधानी के प्रमुख चौराहों में शामिल यह स्थान भी पर्याप्त रोशनी और साफ-सफाई के अभाव का सामना कर रहा है.

भारत माता चौक और गढ़वा नवा छत्तीसगढ़ चौक: नारों से आगे क्या?
कटोरा तालाब स्थित गढ़वा नवा छत्तीसगढ़ चौक और भारत माता चौक भी बदहाल स्थिति में बताए गए. नेता प्रतिपक्ष का तर्क है. बैठकों में जयकारे लगाने से ज्यादा जरूरी है कि चौकों की हालत सुधारी जाए.

"हमने बनाया है, हम ही संवारेंगे" — जमीनी हकीकत क्या कहती है?
भाजपा सरकार और महापौर का नारा—“हमने बनाया है, हम ही संवारेंगे.” लेकिन विपक्ष का आरोप है कि यह नारा फाइलों में ज्यादा और सड़कों पर कम दिखाई देता है. राजधानी के चौक-चौराहे सिर्फ यातायात के केंद्र नहीं होते, वे शहर की पहचान होते हैं.बाहर से आने वाला हर व्यक्ति इन्हीं स्थानों से रायपुर की तस्वीर अपने मन में बनाता है.

अब बड़ा सवाल यही है कि क्या ट्रिपल इंजन सरकार अपने दूसरे साल में राजधानी के चौकों को रोशनी और सम्मान लौटा पाएगी?या फिर “स्मार्ट सिटी” का सपना सिर्फ नारों तक ही सिमट कर रह जाएगा?

