क्या आपको ऑफर दिया जा रहा है? कांग्रेस विधायक बोले- 'यह गोपनीय बात है, यह मैं नहीं बता सकता हूं'
बिहार विधानसभा सत्र के दौरान खेला होगा?, क्या 28 फरवरी से पहले कांग्रेस के कई विधायक पाला बदलेंगे?, पढ़ें

Published : February 14, 2026 at 9:37 PM IST
पटना : ''कांग्रेस पार्टी चट्टानी एकता के साथ मजबूत है. पार्टी के विधायकों को ना कोई खरीद सकता है ना प्रलोभन दे सकता है. मेरे जैसे लोगों को कोई 50 करोड़ भी देगा तो हम पार्टी नहीं बदलेंगे.'' यह कहना है कांग्रेस पार्टी विधायक आबिदुर रहमान का.
जब ईटीवी भारत ने पूछा कि क्या आपको ऑफर दिया जा रहा है? आबिदुर रहमान ने कहा कि यह गोपनीय बात है, यह मैं नहीं बता सकता हूं. दरअसल एक बार फिर से बिहार कांग्रेस में 28 फरवरी से पहले टूट की खबर जोर पकड़ रही है.
बिहार विधानसभा का बजट सत्र चल रहा है और बजट सत्र के दौरान राजनीतिक उलटफेर भी होते रहे हैं. आम तौर पर नीतीश कुमार सत्र के दौरान ही दूसरे दलों में सेंधमारी करते हैं. वर्तमान में कांग्रेस पार्टी पर टूट का खतरा मंडरा रहा है. राजनातिक चर्चा है कि चार विधायक पाला बदलने की तैयारी में है. शायद इसी वजह से मंत्रिमंडल विस्तार को भी होल्ड पर रखा गया है.
बिहार कांग्रेस में टूट की अटकलें : बिहार की सियासत में एक बार फिर उलट फेर के संकेत मिल रहे हैं. कांग्रेस को लेकर कयासों का दौर शुरू हो गया है. पार्टी के कुछ विधायक नेतृत्व और रणनीति को लेकर असंतुष्ट हैं और पाला बदलने की तैयारी में है. फिलहाल आधिकारिक तौर पर कोई खुलकर सामने नहीं आया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में 'विधायक टूट' की संभावना को लेकर हलचल तेज है. एनडीए के घटक दलों के द्वारा डोरे डाले जा रहे हैं.
वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक के के लाल का कहना है कि कांग्रेस पार्टी बिहार में कमजोर हो चुकी है और पार्टी के विधायकों में असंतोष है. उन्हें अपना राजनीतिक भविष्य भी बेहतर नजर नहीं आ रहा है.

''मिल रही जानकारी के मुताबिक 6 में से चार विधायक पाला बदलने की तैयारी में है. बजट सत्र के दौरान ही राजनीति में उथल-पुथल होते हैं. कांग्रेस पार्टी में टूट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है.''- के के लाल, वरिष्ठ पत्रकार
बजट सत्र के दौरान खेला होने के आसार : संगठनात्मक निर्णय, क्षेत्रीय मुद्दों की अनदेखी और महागठबंधन में कांग्रेस की भूमिका को लेकर कुछ विधायकों में नाराजगी है. कुछ विधायक अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर भी असमंजस में हैं. मिल रही जानकारी के मुताबिक पार्टी के 6 विधायकों में से 4 एनडीए के संपर्क में है और बजट सत्र के दौरान ही खेला होने के आसार हैं.
पार्टी के अंदर डैमेज कंट्रोल की कोशिश : बिहार में कांग्रेस के कुल 6 विधायक हैं. मनोहर प्रसाद सिंह (मनिहारी), सुरेंद्र प्रसाद (वाल्मीकिनगर), आबिदुर रहमान (अररिया), अभिषेक रंजन (चनपटिया), मो. कमरूल होदा (किशनगंज) और मनोज विश्वास (फारबिसगंज) से विधायक हैं. पिछले 23 जनवरी को कांग्रेस की टॉप लीडरशिप ने इन विधायकों से दिल्ली में भी मुलाकात की थी, ताकि किसी तरह टूट को टाला जा सके.

''हमारी पार्टी पूरे तौर पर एकजुट है. बार-बार यह हवा उड़ाया जाता है कि कांग्रेस पार्टी में टूट हो सकती है लेकिन हमारे विरोधी अपने मंसूबे में कामयाब नहीं होते हैं. हाल के कुछ वर्षों में लगातार यह मुहिम चलाई जाती रही है लेकिन विरोधियों को नाकामी हासिल हुई है. कांग्रेस पार्टी के तमाम विधायक इंटैक्ट हैं और किसी तरह के टूट की कोई संभावना नहीं है.''- राजेश राम, प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस
मंत्रिमंडल विस्तार है अधर में : बिहार में कैबिनेट का विस्तार होना है, खरमास के बाद कैबिनेट विस्तार के आसार थे. भाजपा और जदयू इस इंतजार में है कि पार्टी के नेता अगर कांग्रेस छोड़ते हैं तो उन्हें भी मंत्रिमंडल में जगह देनी पड़ेगी. सूत्रों के अनुसार जनता दल यूनाइटेड और भाजपा दोनों दल कांग्रेस पार्टी विधायकों पर डोरे डाल रहे हैं.
दोनों खुद को मजबूत करना चाहते हैं : भाजपा और जनता दल यूनाइटेड दोनों ही दल विधायकों की संख्या में इजाफा करना चाहते हैं. बिहार विधानसभा में भाजपा के जहां 89 विधायक हैं, वहीं जनता दल यूनाइटेड के 85 विधायक हैं. अगर चार विधायक भाजपा के खेमे में शामिल होते हैं तो भाजपा के विधायकों की संख्या 93 हो जाएगी इसके उलट अगर चार विधायक जदयू में जाते हैं तो जदयू के 89 विधायक हो जाएंगे और विधानसभा में जदयू और भाजपा बराबरी पर आ जाएगी.
भाजपा प्रवक्ता भूपेंद्र यादव ने कहा है कि कांग्रेस पार्टी का अस्तित्व बिहार से खत्म हो चुका है और कोई भी नेता दल में रहना नहीं चाहता है. नेतृत्व भी कमजोर हो चुकी है. अगर पार्टी के विधायक पीएम मोदी की नीतियों में भरोसा करते हैं तो उनका स्वागत है. पार्टी के कई विधायक राष्ट्रीय जनता दल से भी नाराज हैं और महागठबंधन के अंदर वह खुश नहीं है.

बजट सत्र के दौरान होता रहा है खेल : महत्वपूर्ण यह है कि अतीत में बजट सत्र के दौरान ही दलों में टूट हुई है. असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी में टूट भी बजट सत्र के दौरान हुई थी और चार विधायक राष्ट्रीय जनता दल में चले गए थे. विश्वास मत के दौरान कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल के विधायक टूट गए थे वह भी बजट सत्र के दौरान ही हुआ था.
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