संकल्प बजट से विजन 2047 की तैयारी, बलौदाबाजार जिले के लिए बड़े प्रावधान, राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
बीजेपी के संकल्प बजट में बलौदाबाजार भाटापारा जिले के लिए कई प्रावधान किए गए हैं.वहीं इस बजट को लेकर मिलीजुली प्रतिक्रिया भी आ रही है.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : February 24, 2026 at 8:21 PM IST
बलौदाबाजार/सरगुजा : छत्तीसगढ़ के संकल्प बजट में बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के विकास के लिए बड़े प्रावधान किए गए हैं. 1 लाख 76 हजार करोड़ रुपये के राज्य बजट में जिले के लिए अधोसंरचना, शिक्षा, धार्मिक पर्यटन, सड़क संपर्क और प्रशासनिक सुविधाओं से जुड़ी कई घोषणाएं हुईं हैं. बजट घोषणाओं से साफ है कि आने वाले सालों में जिले की तस्वीर और दिशा दोनों बदलेगी. सबसे खास बात ये है कि शिक्षा और सड़क संपर्क को केंद्र में रखकर योजनाएं बनाई गई हैं, जिससे युवाओं और ग्रामीण क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलेगा.
डी.के. कॉलेज बनेगा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस
बलौदाबाजार का डी.के. कॉलेज अब सिर्फ एक डिग्री कॉलेज नहीं रहेगा. इसे सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने का प्रावधान है. इसका मतलब ये है कि यहां उच्च गुणवत्ता वाली पढ़ाई, आधुनिक प्रयोगशालाएं, डिजिटल संसाधन और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित होंगी.
मिनीमाता कन्या महाविद्यालय बनेगा स्नातकोत्तर कॉलेज
भाटापारा स्थित मिनीमाता शासकीय कन्या महाविद्यालय को स्नातकोत्तर महाविद्यालय में उन्नत करने का प्रावधान किया गया है. इससे छात्राओं को अब पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा.
भाटापारा में भी नालंदा परिसर
भाटापारा में नालंदा परिसर निर्माण का प्रावधान भी बजट में शामिल है.नालंदा परिसर को आधुनिक अध्ययन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, पुस्तकालय और अध्ययन कक्ष जैसी सुविधाएं होंगी. यह परिसर युवाओं के लिए एक शैक्षणिक हब की तरह काम करेगा. इससे स्थानीय स्तर पर शिक्षक प्रशिक्षण की सुविधा विकसित होगी. आने वाले समय में शिक्षकों की गुणवत्ता और उपलब्धता दोनों में सुधार देखने को मिल सकता है.
कसडोल से गरियाबंद तक नई सड़क
द्रुतगामी सड़क संपर्क योजना के तहत कसडोल से गरियाबंद तक, बागबहरा मार्ग से होकर नई सड़क निर्माण का प्रावधान किया गया है. यह सड़क निर्माण क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत करेगा और व्यापार आवागमन को गति देगा. ग्रामीण इलाकों से जिला मुख्यालय तक पहुंच आसान होगी. किसानों, व्यापारियों और विद्यार्थियों को सीधा लाभ मिलेगा.
बलौदाबाजार-भाटापारा सड़क चौड़ीकरण
बलौदाबाजार-भाटापारा मुख्य मार्ग के चौड़ीकरण के लिए 25 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है. यह सड़क जिले की जीवनरेखा मानी जाती है. ट्रैफिक दबाव और बढ़ते वाहनों के कारण लंबे समय से चौड़ीकरण की मांग उठ रही थी. सड़क चौड़ी होने से दुर्घटनाओं में कमी आएगी, यात्रा समय घटेगा और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा.व्यापारिक दृष्टि से यह फैसला अहम माना जा रहा है.
औद्योगिक क्षेत्र स्थापना के साथ ई ट्रैक का निर्माण
कसडोल के मटिया में औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना का प्रावधान जिले के औद्योगिक विकास की दिशा में बड़ा कदम है. इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे. युवा वर्ग को बाहर पलायन करने की आवश्यकता कम होगी और छोटे उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा. भाटापारा में मॉडल उप पंजीयन कार्यालय भवन के लिए भी बजटीय प्रावधान किया गया है. वहीं जिले में ई-ट्रैक के रूप में ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक निर्माण का प्रावधान भी किया गया है. इससे ड्राइविंग लाइसेंस की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और तकनीकी रूप से सुदृढ़ होगी. यह सुविधा सड़क सुरक्षा के लिहाज से भी अहम मानी जा रही है.
गिरौदपुरी मेले की राशि दोगुनी
गिरौदपुरी मेले के लिए राशि 25 लाख से बढ़ाकर 50 लाख रुपए कर दी गई है. इससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बल मिलेगा. मड़वा में सतनाम धर्मशाला निर्माण के लिए 50 लाख रुपए का प्रावधान किया गया है. इससे श्रद्धालुओं और सामाजिक आयोजनों के लिए बेहतर सुविधा उपलब्ध होगी.
विकास की नई पटकथा
कुल मिलाकर यह बजट बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के लिए विकास की नई पटकथा लिखता दिख रहा है. शिक्षा, सड़क, औद्योगिक विकास, धार्मिक पर्यटन और प्रशासनिक सुधार जैसे लगभग हर क्षेत्र को छुआ गया है. यदि घोषणाएं तय समय-सीमा में जमीन पर उतरती हैं, तो जिले में बुनियादी ढांचे का स्तर काफी ऊंचा हो सकता है.
बजट को लेकर मिली जुली प्रतिक्रिया
छत्तीसगढ़ सरकार का बजट आज वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने विधान सभा में पेश किया. इस बजट को समावेशी बनाने की कोशिश दिखती है. हर क्षेत्र और हर वर्ग को साधने का प्रयास दिखता है, बजट पर हमने भाजपा और कांग्रेस की प्रतिक्रिया ली है.बीजेपी ने बजट के प्रावधानों को बेहतर बताया तो वहीं कांग्रेस ने बजट को आंकड़ों की बाजीगरी बताया है.
सरगुजा और बस्तर का विशेष ध्यान रखा गया है. सभी स्थानों पर 15 नए स्टेडियम प्रदेश में बनाए जाने हैं, उसमें एक सरगुजा को भी हिस्सेदारी मिली. जिला चिकित्सालय का नया भवन बनना स्वीकृत किया गया है. बस्तर और सरगुजा के नए मेडिकल मेडिकल कॉलेज के लिए 50 करोड़ का अलग से भी बजट रखा गया है. अभी कुछ दिन पहले ही हम लोगों को 10 करोड़ मिला था. नए मेडिकल कॉलेज कुनकुरी और मनेद्रगढ़ सहित नए मेडिकल कॉलेज खुलने का की बात कही गई है. अंबिकापुर से कोरबा तक रेल लाइन के लिए भी प्रावधान किया गया है- भारत सिंह सिसोदिया,जिलाध्यक्ष बीजेपी
कांग्रेस ने बजट पर साधा निशाना
कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता जेपी श्रीवास्तव ने बताया कि "इस बजट में ऐसा कुछ नहीं है कि इसे बजट कहा जा सके क्योंकि ना तो नए कोई प्रावधान रखे गए हैं और केवल और केवल आंकड़ों का खेल खेला गया है. इसमें ऐसी कोई स्थिति नहीं बनी है जो नया विकास के लिए कुछ हो. किसी के किसी वर्ग विशेष के लिए कुछ हितकारी हो। ऐसा कुछ भी नहीं है. सिर्फ आंकड़ों का खेल दिखाकर यह दिखाया गया है कि उन्होंने बहुत सारा बजट दूसरी बात यह बजट के आय के स्रोत नहीं दिखाए गए हैं. कहीं बजट में बजट में कहां से ये राशि आएगी ये कहीं नहीं दिखाया गया है. सिर्फ व्यय दिखाया गया है.
आय का कोई स्रोत इनके पास नहीं है. कर्जे में छत्तीसगढ़ सरकार डूबी जा रही है और इन्होंने जो बजट में दिखाए हैं नए बिंदु वह पिछले बजट में जो इन्होंने किया था सबसे पहले तो इस बात की आवश्यकता है कि पिछले बजट के जो योजनाएं थी वो पूरी हुई क्या. एक साल में क्या प्रारंभ हुई कि शुरू ही नहीं हुई वो योजनाएं और इन्होंने ये अगला बजट बना दिया- जेपी श्रीवास्तव,प्रवक्ता कांग्रेस
बजट नहीं आंकड़ों की बाजीगरी
जेपी श्रीवास्तव की माने तो सरगुजा को कोई विशेष चीज नहीं मिल पा रही है. पर्यटन के नाम पर 5 करोड़ कितना हास्यास्पद स्थिति है. पर्यटन और मेनपाट का विकास 5 करोड़ में, 5 करोड़ में तो एक बिल्डिंग नहीं बनती है. आज के युग में मेडिकल कॉलेज के लिए 50 करोड़ का प्रावधान किया है, तो 50 करोड़ भी मेडिकल कॉलेज जैसे यदि पीजी की कक्षाएं नई कक्षाएं है, इनकी क्लासेस बनती है तो वो भी बजट कोई पर्याप्त बजट नहीं है. मनरेगा में 4000 करोड़ जो बता रहे हैं यदि प्रति गांव इस बात को देखा जाए प्रतिमाह के हिसाब से तो डेढ़ लाख ही आ रहा है. एक गांव में एक माह में मनरेगा के लिए डेढ़ लाख में क्या होता है. ऊंट के मुंह में जीरा भी नहीं होता, यह सिर्फ 4000 करोड़ बता रहे हैं. यह यह तो बताएं कि प्रति गांव कितना दिया जा रहा है. प्रति ब्लॉक कितना प्रति नागरिकों के हिसाब से जितने मनरेगा के मजदूर हैं उसमें रेशियो निकाला जाए तो कुछ बजट है ही नहीं. यह सिर्फ बाजीगरी कर रहे हैं जबकि आंकड़ों की वास्तविकता कुछ नहीं है.
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