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चंडीगढ़ के स्पेशल बच्चों ने बनाई 'आत्मनिर्भरता' की राखियां, अब भाई की कलाई पर सजेगा हुनर का धागा

चंडीगढ़ के विशेष बच्चों ने राखियां तैयार की है. इन राखियों की बिक्री से इनको आर्थिक सहयोग मिलेगा.इनके हुनर को खास पहचान मिलेगी.

Chandigarh Special Children Rakhi
स्पेशल बच्चों ने बनाई आत्मनिर्भरता की राखियां (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Haryana Team

Published : August 26, 2026 at 12:20 PM IST

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Updated : August 26, 2026 at 4:10 PM IST

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चंडीगढ़: रक्षाबंधन का त्योहार इस बार सेक्टर-36 स्थित सोरम संस्था के करीब 25 विशेष विद्यार्थियों के लिए खास है. दरअसल, इन बच्चों ने अपने हाथों से रंग-बिरंगी और आकर्षक राखियां तैयार की हैं. रेशम, मोती, धागे, बीड्स, कुंदन और अन्य सजावटी सामान से बनी इन राखियों को अब बिक्री के लिए तैयार कराया जा रहा है. बच्चों की मेहनत से तैयार राखियों को लोगों का भी अच्छा प्रोत्साहन मिल रहा है.

Chandigarh Special Children Rakhi
स्पेशल बच्चों ने बनाई राखियां (ETV Bharat)

कई दिनों की मेहनत से तैयार राखियां: इन स्पेशल बच्चों ने अलग-अलग रंगों और डिजाइन की राखियां तैयार की हैं. किसी राखी में मोतियों की सजावट है तो किसी में कुंदन और बीड्स का इस्तेमाल किया गया है. साधारण डिजाइन से लेकर हस्तशिल्प वाली विशेष राखियों तक कई विकल्प तैयार किए गए हैं. रक्षाबंधन नजदीक आने के साथ इनकी मांग भी बढ़ रही है.

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राखी तैयार करते स्पेशल चाइल्ड (ETV Bharat)

राखियों की बिक्री से मिलेगा सहयोग: संस्था का उद्देश्य केवल बच्चों को राखी बनाना सिखाना नहीं, बल्कि उनके हुनर को आर्थिक अवसर से जोड़ना भी है. राखियों की बिक्री से मिलने वाली राशि बच्चों के लिए आर्थिक सहयोग के रूप में इस्तेमाल की जाएगी. इससे उन्हें अपनी क्षमता के अनुसार काम करने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा.

Chandigarh Special Children Rakhi
स्पेशल बच्चों की बनाई राखियां (ETV Bharat)

20 रुपये से 800 रुपये तक कीमत: संस्था की ओर से बनाई साधारण राखियां 20 से 50 रुपये, रेशम और डिजाइनर राखियां 80 से 200 रुपये, बीड्स वाली राखियां 100 से 250 रुपये और कुंदन डिजाइनर राखियां 150 से 350 रुपये तक उपलब्ध हैं. वहीं, गिफ्ट पैक की कीमत करीब 150 से 800 रुपये तक रखी गई है. हस्तशिल्प वाली विशेष राखियों की कीमत उनके डिजाइन के अनुसार तय की गई है.

अब भाई की कलाई पर सजेगा हुनर का धागा (ETV Bharat)

राखी बनाने में दिखी बच्चों की रुचि: बच्चों ने राखियां तैयार करने के दौरान अपनी रचनात्मकता और रुचि भी दिखाई. संस्था से जुड़े लोगों के अनुसार इसे महज एक गतिविधि के तौर पर नहीं कराया गया, बल्कि बच्चों की रुचि और क्षमता को पहचानकर उन्हें रचनात्मक काम से जोड़ने की कोशिश की गई. कई दिनों की मेहनत के बाद तैयार राखियां अब बाजार में लोगों तक पहुंच रही हैं.

बच्चों को कला से जोड़ने की कोशिश: संस्था प्रमुख संगीता जैन ईटीवी भारत को बताया कि, "मैंने साल 2009 में इस संस्था को ज्वाइन किया था. मेरा बेटा भी ऑटिज्म से प्रभावित है और उसे धागों से बहुत प्यार है. उसकी रुचि को देखते हुए हमने इन खास बच्चों को भी कला की तरफ प्रेरित किया. आज इन बच्चों को उनके परिवार और कुछ खास संस्थाओं का सहयोग मिल रहा है." वहीं, संस्था की सदस्य किरण कौशल ने कहा कि, "बच्चों ने बहुत मेहनत और रुचि के साथ राखियां तैयार की हैं. लोगों का प्रोत्साहन उनके आत्मविश्वास को बढ़ाता है. इनकी बनाई राखियां खरीदना इनके हुनर को आगे बढ़ाने में सहयोग देना है."

Chandigarh Special Children Rakhi
चंडीगढ़ के विशेष बच्चों ने राखियां तैयार की है (ETV Bharat)

राखियों में छिपा आत्मनिर्भरता का संदेश: इन राखियों की खासियत सिर्फ उनका रंग और डिजाइन नहीं है, बल्कि इनके साथ उन बच्चों की मेहनत जुड़ी है, जो अपनी क्षमता को पहचानकर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं. संस्था का मानना है कि लोगों की ओर से मिलने वाला प्रोत्साहन बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ उन्हें भविष्य में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे ले जा सकता है.

भाई की कलाई के साथ बच्चों का सपना भी सजेगा: इस रक्षाबंधन इन राखियों को खरीदकर लोग भाई-बहन के रिश्ते को तो खास बना ही सकते हैं, साथ ही विशेष बच्चों के हुनर को भी प्रोत्साहन दे सकते हैं.

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Last Updated : August 26, 2026 at 4:10 PM IST