बिहार में उफान पर सोन नदी, टीले पर खेती करने वाले किसानों की बढ़ी मुश्किलें
सोन नदी में उफान आने से रोहतास में सोन टीले पर खेती करने वाले किसानों के लिए मुसीबत बढ़ गई है. रिपोर्ट- रवि कुमार

Published : August 19, 2026 at 1:56 PM IST
रोहतास : बिहार में लगातार बढ़ रहे सोन नदी के जलस्तर ने नदी के टीले पर खेती करने वाले किसानों और मवेशी पालकों की चिंता बढ़ा दी है. सोन नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद प्रशासन ने नदी के टीले पर जाने वाले किसानों और पशुपालकों को तत्काल वहां नहीं जाने की सलाह दी है.
सोन नदी उफान पर : सोन नदी के आसपास बसे इलाकों में प्रशासन की ओर से विशेष सतर्कता बरती जा रही है. वहीं, लोगों को खतरे से आगाह करने के लिए माइकिंग कराई जा रही है और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की जा रही है. दरअसल सोन नदी के टीले पर इलाके के 300 से अधिक लोग हजारों एकड़ जमीन पर खेती करते हैं.
''सोन नदी के बढ़ते जलस्तर ने सोचने पर मजबूर कर दिया है. दाने-दाने को मोहताज हो गए हैं टीले पर खेती से परिवार की जीविका चलती है. पानी बढ़ता है तो सब कुछ खत्म हो जाता है. हर साल यही होती है.''- सरोज कुमार, स्थानीय ग्रामीण
सोन नदी के टीले पर खेती करने वाले किसान परेशान : टीले पर खेती करने वाले इन किसानों की बड़ी आबादी वर्षों से धान, गेहूं और विभिन्न प्रकार की सब्जियों की खेती कर अपनी आजीविका चलाती आ रही है. खेती के साथ-साथ कई पशुपालक टीले पर ही अस्थायी आशियाना बनाकर मवेशियों का पालन करते हैं. उनके लिए यही जमीन और मवेशी परिवार की रोजी-रोटी का मुख्य सहारा हैं.
''टीले पर धान गेहूं सब्जी की खेती कर हम सभी अपने परिवार का पेट पालते है. यह त्रासदी हमें झेलना पड़ता है सरकार और प्रशासन से मांग है कि हमारे बारे में सोचें.''- रेशमी देवी, स्थानीय ग्रामीण
सोन नदी के बढ़ते जलस्तर से चुनौती : सोन नदी के बढ़ते जलस्तर ने इन लोगों के सामने दोहरी चुनौती खड़ी कर दी है. एक तरफ प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर टीले पर जाने से रोक दिया है, तो दूसरी तरफ किसान अपनी फसल और खेती की देखभाल नहीं कर पा रहे हैं. पशुपालकों को अपने मवेशियों की सुरक्षा की चिंता सता रही है. लोगों का कहना है कि अगर पानी का स्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो उनके सामने आर्थिक संकट और गहरा सकता है.
प्रशासन कर रहा अलर्ट : प्रशासन के अलर्ट के बाद फिलहाल लोगों ने टीले पर जाना बंद कर दिया है.इसके बावजूद किसानों को अपनी फसल, घर और मवेशियों की चिंता बनी हुई है. स्थानीय लोगों का कहना है कि वे वर्षों से सोन के टीले पर खेती और पशुपालन कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं.
सरकारी मदद का इंतजार : ऐसे में यदि नदी का पानी और बढ़ता है तो उन्हें अपने मवेशियों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने और परिवार के लिए जरूरी इंतजाम करने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ेगा. प्रभावित किसानों और पशुपालकों को अब प्रशासन से सरकारी मदद और उचित व्यवस्था की उम्मीद है.

इंद्रपुरी बराज से छोड़ा जा चुका है 1 लाख क्यूसेक पानी : इधर, सोन नदी में बढ़ते जलस्तर को देखते हुए इंद्रपुरी बराज के 25 गेट खोलकर 93,811 क्यूसेक से अधिक पानी सोन नदी में छोड़े जाने की बात सामने आई है. पानी छोड़े जाने और नदी के बढ़ते जलस्तर को लेकर सिंचाई विभाग तथा स्थानीय प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है. नदी के आसपास के इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है.
सोन टीले को प्रशासन ने कराया खाली : प्रशासन की ओर से सोन टीले को खाली कराया गया है. वहीं नदी किनारे बसे गांवों में मुनादी कराकर लोगों को नदी के आसपास नहीं जाने की सलाह दी जा रही है. लोगों से अपील की जा रही है कि वे नदी की स्थिति को देखते हुए किसी भी तरह का जोखिम न उठाएं और प्रशासन द्वारा बताए गए सुरक्षित स्थानों पर रहें.
''सोन टीले पर जाने वालो को अलर्ट किया गया है आस पास के तटीय इलाकों में भी माइकिंग कराई जा रही है. पैनिक होने की आवश्यकता नहीं है विभाग पूरी तरह से नजर बनाये हुए है लोगों से अपील है कि सतर्कता बरते.''- अजय कुमार सिंह, मुख्य अभियंता, सिंचाई विभाग
आजीविका पर संकट : दरअसल, सोन नदी के किनारे रहने वाले लोगों के लिए यह सिर्फ बाढ़ या जलस्तर बढ़ने का खतरा नहीं है, बल्कि उनकी आजीविका का भी सवाल है. टीले पर खेती करने वाले किसानों के लिए खेत तक पहुंचना बंद होने का मतलब फसल की देखभाल प्रभावित होना है. वहीं पशुपालकों के लिए मवेशियों को चारा और सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती बन सकता है.
प्रशासन से मांग : स्थानीय लोगों की मांग है कि प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखे और अगर जलस्तर बढ़ता है तो किसानों और पशुपालकों के लिए सुरक्षित स्थान, मवेशियों के लिए चारा-पानी तथा आवश्यक राहत की व्यवस्था की जाए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में उन्हें परेशानी का सामना न करना पड़े.
सोन नदी पर प्रशासन की नजर : फिलहाल प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है. साथ ही स्पष्ट किया है कि सोन नदी की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है. लोगों से कहा गया है कि वे प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और बढ़ते जलस्तर को देखते हुए नदी या टीले की ओर जाने से पूरी तरह बचें.
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