उत्तराखंड में पीएम राहत योजना सिर्फ कागजों तक सीमित! अभी तक मात्र 29 लोगों को ही मिला लाभ
उत्तराखंड में पीएम राहत योजना के तहत अभी तक मात्र 29 लोगों को ही मिला लाभ! जानिए क्या है पीएम राहत योजना? रिपोर्ट- रोहित सोनी

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : June 3, 2026 at 9:02 PM IST
|Updated : June 3, 2026 at 9:10 PM IST
देहरादून: भारत सरकार ने सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों को तत्काल उपचार कराए जाने को लेकर पीएम राहत योजना (PM RAHAT) शुरू की है. जिसका उद्देश्य यही था कि सड़क हादसों के घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पताल में निशुल्क इलाज का लाभ मिल सके. हालांकि, इस योजना के लागू होने के बाद उत्तराखंड में मात्र 29 लोगों को ही इस योजना का लाभ मिल पाया है. जबकि, इस योजना के शुरू होने के बाद से अब तक सैकड़ों लोग सड़क हादसे में घायल हो चुके हैं.
उत्तराखंड में लगातार बढ़ रही सड़क दुर्घटनाएं एक बड़ी चुनौती बनी हुई है. हालांकि, सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम लगाए जाने को लेकर परिवहन विभाग की ओर से लगातार पहल किए जा रहे हैं. बावजूद इसके सड़क दुर्घटनाओं और उससे होने वाला मौतों का आंकड़ा साल दर साल बढ़ता जा रहा है.
हालांकि, ये स्थिति सिर्फ उत्तराखंड राज्य की नहीं है, बल्कि देशभर में सड़क दुर्घटनाएं एक बड़ी चुनौती बनी हुई है. इसके साथ ही सड़क दुर्घटनाओं के दौरान समय पर इलाज न मिल पाने की वजह से घायलों की मौत भी हो जाती है. जिसको देखते हुए भारत सरकार ने 13 फरवरी 2026 को पीएम राहत (PM RAHAT) योजना को लॉन्च किया.
पीएम राहत योजना को जानिए पीएम राहत योजना (PM-RAHAT) का पूरा नाम 'रोड एक्सीडेंट विक्टिम हॉस्पिटलाइजेशन एंड अस्योर्ड ट्रीटमेंट' (Road Accident Victim Hospitalisation and Assured Treatment) है. जो सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की ओर से शुरू की गई एक राष्ट्रीय पहल है. जिसमें सड़क दुर्घटना के घायलों को 1.5 लाख रुपए तक का कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया जाता है. इसका मकसद सड़क हादसों में घायलों को गोल्डन ऑवर (दुर्घटना के बाद का पहला घंटा) में उपचार की सुविधा मुहैया कराना है. ताकि, सड़क हादसों में होने वाली मौतों को रोका जा सके. |
इस योजना के तहत सड़क दुर्घटना में पीड़ितों को अधिकतम 1.5 लाख रुपए का कैशलेस इलाज 7 दिनों तक मिलेगा. जबकि, कुछ मामलों में 24 घंटे तक स्टेबलाइजेशन केयर और जीवन-घातक स्थिति में 48 घंटे तक की व्यवस्था है. खास बात ये है कि घायलों का अस्पतालों में इलाज के बाद खर्च का भुगतान मोटर व्हीकल एक्सीडेंट फंड, बीमा योगदान या फिर सरकार के बजट से किया जाएगा. देश में पीएम केयर योजना लागू होने के साथ ही उत्तराखंड में भी 13 फरवरी 2026 को लागू हो गई है.

उत्तराखंड में इतने लोगों को उठाया लाभ: इस योजना के लागू होने के बाद उत्तराखंड में करीब 400 सड़क दुर्घटनाएं हुई है, जिसमें करीब 250 लोगों की मौत और 450 लोग घायल हुए हैं. बावजूद इसके उत्तराखंड में इस योजना के लागू होने के बाद यानी 13 फरवरी से 3 जून 2026 तक मात्र 29 लोगों को ही इस योजना का मिला है या फिर इस योजना का लाभ उठा पाए हैं.

इसके अलावा हैरानी की बात की है कि जिन 29 लोगों को सड़क दुर्घटना के बाद जिन नजदीकी अस्पतालों में चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध हुई है, उन अस्पतालों को अभी तक कोई भी भुगतान नहीं हो पाया है. उत्तराखंड राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण की मानें तो भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना पीएम राहत के लागू होने के बाद से अभी 29 लोगों को लाभ मिला है.

उत्तराखंड में इतने लोगों ने उठाया पीएम राहत योजना का लाभ-

इन सभी 29 घायलों के इलाज में खर्च कुल 8,11,189 रुपए का बिल अस्पतालों की ओर से तैयार कर उत्तराखंड राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण को भेजा गया है, लेकिन अभी तक किसी भी अस्पताल को भुगतान नहीं हो पाया है.
"पीएम राहत योजना भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है. जिसके तहत सड़क दुर्घटना के घायलों को गोल्डन पीरियड के भीतर नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया जाना है. ऐसे में आयुष्मान भारत योजना में रजिस्टर्ड अस्पताल इस पीएम राहत योजना में भी शामिल है."- रीना जोशी, सीईओ, राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण, उत्तराखंड
"इसके अलावा जो अन्य अस्पताल हैं, उन अस्पतालों में भी सड़क दुर्घटना के घायलों को निशुल्क इलाज का प्रावधान इस योजना में की गई है. अगर इंश्योर्ड वहां से सड़क दुर्घटना होता है, तो फिर घायलों के इलाज का खर्च इंश्योरेंस कंपनी वहन करेगी. अगर वहां इंश्योर्ड नहीं है, तो उसका खर्च भारत सरकार की ओर से वहन किया जाएगा."- रीना जोशी, सीईओ, राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण, उत्तराखंड
"उत्तराखंड राज्य में ये योजना लागू है. ऐसे राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण की भूमिका यही है कि घायलों के इलाज में खर्च धनराशि की भुगतान के लिए अस्पतालों की ओर से बिल बनाकर स्वास्थ्य प्राधिकरण को भेजा जाता है. उसके बाद उसके भुगतान के लिए भारत सरकार से बजट की डिमांड की जाती है."- रीना जोशी, सीईओ, राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण, उत्तराखंड
"ये योजना लाभ उठाने जैसा नहीं है, बल्कि यह योजना लागू की गई है कि गोल्डन पीरियड के दौरान ही मरीजों को अस्पताल में इलाज का लाभ मिल सके. इसके साथ ही धन के अभाव में किसी की मौत ना हो. ऐसे में प्राधिकरण की भी कोशिश है कि इस योजना की जानकारी सभी लोगों को हो. ताकि, वो इसका लाभ उठा सके."- रीना जोशी, सीईओ, राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण, उत्तराखंड
पीएम राहत योजना के मुख्य बिंदु-
- सड़क पर होने वाली दुर्घटना में शामिल हर पीड़ित को दुर्घटना की तिथि से अधिकतम 7 दिनों तक, प्रति पीड़ित 1.5 लाख तक के उपचार का प्रावधान किया गया है.
- यह उपचार सुविधा मोटर वाहन के उपयोग से होने वाली सड़क दुर्घटनाओं के सभी पीड़ितों के लिए है.
- हर सड़क दुर्घटना पीड़ित को निर्धारित अस्पतालों में गैर-जीवन-घातक मामलों में 24 घंटे तक या जीवन-घातक मामलों में 48 घंटे तक स्थिरीकरण उपचार प्रदान किया जाएगा.
- यह वैधानिक योजना किसी भी अन्य केंद्रीय या राज्य स्तर की योजनाओं पर प्राथमिकता रखेगी.
- अस्पतालों को प्रतिपूर्ति मोटर वाहन दुर्घटना निधि (MVAF) के जरिए की जा रही है. यह निधि उन मामलों में सामान्य बीमा कंपनियों के योगदान से संचालित होती है, जहां दोषी मोटर वाहन बीमित होता है.
- बिना बीमा वाले और हिट-एंड-रन मामलों में बजटीय सहायता के जरिए वित्त पोषित होती है.
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