शूलिनी मेले में बड़ा हादसा टला, जंपिंग झूले से अचानक निकली हवा, बच्चों के दबने से मची चीख पुकार
अभिभावकों ने आरोप लगाया कि हादसे के बाद झूला ऑपरेटर और कर्मचारी बच्चों की मदद करने के बजाय मौके से फरार हो गए.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : June 29, 2026 at 5:25 PM IST
|Updated : June 29, 2026 at 5:34 PM IST
सोलन: हिमाचल प्रदेश के सोलन में चल रहे ऐतिहासिक शूलिनी मेले में बच्चों की सुरक्षा को लेकर बड़ा गंभीर मामला सामने आया है. मेले में लगे एक हवा वाले झूले (जंपिंग झूले) की अचानक हवा निकल गई, जिसके बाद झूला देखते ही देखते गिर गया. इस दौरान झूले पर खेल रहे करीब 10 से 12 बच्चे उसके नीचे दब गए. हालांकि मौके पर मौजूद अभिभावकों और स्थानीय लोगों की सूझबूझ से सभी बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया और एक बड़ा हादसा टल गया.
झूला गिरते ही मची चीख-पुकार
दरअसल, रविवार शाम करीब 6:30 बजे शूलिनी मेले में बच्चों के लिए लगाए गए विशाल हवा वाले झूले में अचानक तकनीकी खराबी आ गई. हवा निकलने के कारण झूला कमजोर होकर नीचे बैठ गया और उसमें मौजूद बच्चे भारी सिंथेटिक मटीरियल के नीचे दब गए. हादसे के बाद मेले में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया. ऊना से मेले में पहुंचे राहुल कुमार ने बताया कि उनका चार साल का बेटा भी उस समय झूले पर था. झूला गिरते ही बच्चों की चीखें सुनाई देने लगीं. इसके बाद राहुल कुमार और स्थानीय व्यक्ति प्रदीप कुमार ने तुरंत मौके पर पहुंचकर झूले के भारी हिस्से हटाए और बच्चों को बाहर निकाला.
अभिभावकों ने उठाए सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
अभिभावकों का कहना है कि अगर बच्चों को समय पर बाहर नहीं निकाला जाता तो बड़ी अनहोनी हो सकती थी. उन्होंने आरोप लगाया कि हादसे के बाद झूला ऑपरेटर और कर्मचारी बच्चों की मदद करने के बजाय मौके से फरार हो गए. पीड़ित परिवारों ने मांग की है कि झूला संचालक और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए. साथ ही मेले में लगे सभी झूलों की सुरक्षा जांच करवाने की भी मांग उठाई गई है, ताकि भविष्य में किसी बच्चे की जान खतरे में न पड़े.
पुलिस और प्रशासन से कार्रवाई की मांग
घटना के बाद राहुल कुमार ने पुलिस अधिकारियों को इसकी शिकायत भी दी. उन्होंने कहा कि मामले में तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए और झूला मालिक की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए. उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि मेले में लगाए गए सभी मनोरंजन साधनों की तकनीकी जांच की जाए और नियमों का पालन नहीं करने वालों पर कार्रवाई की जाए.
आस्था और संस्कृति के बीच सुरक्षा बनी बड़ी चुनौती
गौरतलब है कि शूलिनी मेला सोलन का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व रखने वाला आयोजन है. इस साल भी मेले में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे. मेले के दौरान माता शूलिनी अपनी बहन से मिलने गंज बाजार पहुंची थीं और अंतिम दिन वापस अपने गर्भगृह में लौटीं. रविवार को शूलिनी मेले के समापन समारोह की अध्यक्षता हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने की. इस दौरान स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल और अन्य जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे. राज्यपाल ने मेले को हिमाचल की संस्कृति, परंपराओं और आस्था का प्रतीक बताया. अंतिम सांस्कृतिक संध्या में पहाड़ी कलाकार कपिल शर्मा और पंजाबी कलाकार जस्सी गिल व बब्बल राई ने प्रस्तुति देकर दर्शकों का मनोरंजन किया. हालांकि मेले के दौरान हुए झूला हादसे ने बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं.
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