हिमाचल में नगर निकाय चुनावों पर बड़ा बखेड़ा, 'बहुमत हमारा फिर भी कब्जा करने की साजिश'
सोलन नगर निगम और स्थानीय निकायों में अध्यक्ष-उपाध्यक्ष चुनाव को लेकर बीजेपी हमलावर. सरकार पर जनादेश चोरी करने का आरोप

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : June 30, 2026 at 7:20 PM IST
शिमला: हिमाचल प्रदेश में नगर निकायों के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनावों को लेकर छिड़ा सियासी संग्राम अब और तेज हो गया है. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस सरकार पर सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करने, नियमों को मनमाने ढंग से बदलने और जनता के जनादेश को हाईजैक करने का बड़ा आरोप लगाया है. भाजपा के राज्यसभा सांसद हर्ष महाजन और प्रदेश मुख्य प्रवक्ता एवं विधायक राकेश जमवाल ने अलग-अलग बयानों में सुक्खू सरकार की कार्यशैली पर तीखे सवाल खड़े किए हैं.
विधायक राकेश जमवाल ने आरोप लगाया कि सोलन नगर निगम में भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत होने के बावजूद कांग्रेस सरकार प्रशासनिक दबाव और नियमों में हेरफेर कर महापौर व उपमहापौर पदों पर अनैतिक कब्जा करना चाहती है. जमवाल ने कहा, "सरकार ने 23 जून को नियमों में अचानक संशोधन कर व्यापक अधिकार एक स्तर पर केंद्रित कर दिए हैं, ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित कर राजनीतिक लाभ लिया जा सके."
उन्होंने आरोप लगाया कि बहुमत का गणित बदलने के लिए भाजपा समर्थित पार्षदों को निशाना बनाया जा रहा है और उन्हें अयोग्य घोषित कराने की साजिश रची जा रही है. सोलन नगर निगम में जनता ने स्पष्ट रूप से भाजपा के पक्ष में जनादेश दिया है, लेकिन कांग्रेस सरकार प्रशासन पर दबाव डालकर, नियमों में बदलाव कर और सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करके इस जनादेश को पलटने का प्रयास कर रही है. यह न केवल लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला है बल्कि संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है.
चुनावों को जानबूझकर लटकाया गया: हर्ष महाजन
दूसरी ओर, राज्यसभा सांसद हर्ष महाजन ने कहा कि हिमाचल के इतिहास में पहली बार ऐसी स्थिति बनी है जब नगर निगमों, नगर परिषदों और जिला परिषदों में अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के चुनाव इतने लंबे समय तक जानबूझकर लटकाए जा रहे हैं. महाजन ने कहा, "जहां कांग्रेस के पास बहुमत है, वहां चुनाव तुरंत हो रहे हैं, लेकिन जहां भाजपा समर्थित प्रतिनिधि बहुमत में हैं, वहां प्रक्रिया को टाला जा रहा है. कांग्रेस सरकार का उद्देश्य जनता के जनादेश को स्वीकार करना नहीं, बल्कि सत्ता के दुरुपयोग के माध्यम से उसे हाईजैक करना है."
जानबूझकर किए नियमों में संशोधन
उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान सरकार ने बार-बार नियमों में संशोधन किए, ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित किया जा सके. कभी आरक्षण व्यवस्था में बदलाव किए गए तो कभी नए-नए नोटिफिकेशन जारी कर चुनावी प्रक्रिया को नियंत्रित करने का प्रयास किया गया. हाल ही में किए गए संशोधनों से जिलाधीशों और एसडीएम को ऐसे अधिकार दिए गए हैं, जिनका दुरुपयोग राजनीतिक दबाव में किया जा सकता है और चुनावों को अनिश्चितकाल तक टालने की स्थिति पैदा हो सकती है.
राज्यसभा सांसद ने कहा कि पूरे प्रदेश में भाजपा समर्थित निर्वाचित प्रतिनिधियों पर दबाव बनाया जा रहा है. उनके परिवारों को प्रताड़ित किया जा रहा है, झूठे मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं और प्रशासनिक एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक प्रतिशोध के लिए किया जा रहा है. यह लोकतंत्र के लिए अत्यंत खतरनाक प्रवृत्ति है.
प्रशासनिक अधिकारियों से अपील
दोनों भाजपा नेताओं ने प्रदेश के प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों से विशेष अपील की है. उन्होंने कहा कि अधिकारी किसी भी राजनीतिक दबाव में आए बिना संविधान, कानून और अपने विवेक के अनुसार निष्पक्ष कार्य करें, क्योंकि उनकी जवाबदेही किसी सरकार के प्रति नहीं बल्कि कानून और लोकतंत्र के प्रति है.

