Holi 2026 : 16,133 किमी दूर विदेश में गूंजी होली की धूम, इक्वाडोर में पहली बार रंगों का महोत्सव
देसी बहू ने एक बार फिर सात समंदर पार रंगों के जरिए भारतीय संस्कृति को साकार किया है.

Published : March 2, 2026 at 3:44 PM IST
जयपुर: दक्षिण अमेरिकी देश इक्वाडोर में पहली बार होली का रंगारंग उत्सव मनाया गया, जिसने भारतीय संस्कृति की वैश्विक पहुंच का अनोखा उदाहरण पेश किया. राजधानी क्विटो स्थित ऐतिहासिक स्थल राष्ट्रीय पुस्तकालय यूजेनियो एस्पेजो में आयोजित इस भव्य समारोह ने रंग, संगीत और परंपराओं का ऐसा संगम रचा कि विदेशी मेहमान भी भारतीय रंगों में सराबोर नजर आए. विदेशी जमीन पर रंगों की यह बौछार सिर्फ त्योहार नहीं, बल्कि संस्कृति, कूटनीति और भावनात्मक जुड़ाव का उत्सव बन गई. यह आयोजन दिखाता है कि भारतीय परंपराएं दुनिया के किसी भी कोने में नई ऊर्जा के साथ खिल सकती हैं.
दौसा की बहू की पहल से सजा अंतरराष्ट्रीय मंच : यह ऐतिहासिक आयोजन धोली मीणा की विशेष पहल और प्रयासों से संभव हो पाया. मूल रूप से दौसा से संबंध रखने वाली धोली मीणा ने विदेश में रहते हुए भारतीय त्योहारों को जीवंत रखने और सांस्कृतिक रिश्तों को मजबूत करने का संकल्प लिया. उनकी पहल पर भारतीय दूतावास ने इस कार्यक्रम को भव्य स्वरूप दिया.
समारोह में 200 से अधिक खास मेहमान शामिल हुए, जिनमें कई देशों के राजदूत, राजनयिक, सरकारी अधिकारी और स्थानीय नागरिक मौजूद थे. परिसर को पारंपरिक सजावट, फूलों, रंगोलियों और भारतीय थीम से सजाया गया था. गुलाल-अबीर, फाग गीत, भजन, राजस्थानी लोकनृत्य और ढोल-नगाड़ों की धुन ने माहौल को पूरी तरह भारतीय बना दिया. भारतीय व्यंजनों और मिठाइयों का स्वाद भी मेहमानों को खूब भाया.

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सांस्कृतिक सेतु बना आयोजन : भारतीय दूतावास के कार्यकारी राजदूत लोकेश कुमार मीना ने कार्यक्रम में कहा कि भारत और इक्वाडोर के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव लगातार मजबूत हो रहा है. यह पहला होली समारोह दोनों देशों के रिश्तों में यादगार मील का पत्थर बनेगा. उन्होंने यह भी बताया कि दूतावास की स्थापना के बाद से स्थानीय लोगों का स्नेह और सहयोग उल्लेखनीय रहा है, जिससे ऐसे आयोजनों का रास्ता आसान हुआ.

धोली मीणा ने कहा कि राजस्थान से हजारों किलोमीटर दूर विदेशी धरती पर होली मनाना भावनात्मक रूप से बेहद गर्व का क्षण है. उन्होंने बताया कि इक्वाडोरवासियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने साबित कर दिया कि भारतीय संस्कृति सीमाओं में बंधी नहीं है, बल्कि वैश्विक पहचान बन चुकी है.
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क्यों खास रहा यह आयोजन
- इक्वाडोर में पहली बार आधिकारिक स्तर पर होली उत्सव
- 16वीं सदी की ऐतिहासिक इमारत में आयोजन
- बहुराष्ट्रीय राजनयिकों की उपस्थिति
- भारतीय लोक संस्कृति की लाइव झलक
- भारत-इक्वाडोर मैत्री का प्रतीक
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