विश्व धरोहर फूलों की घाटी में स्नो लेपर्ड कैमरे में कैद, कई दुर्लभ प्रजातियां भी मौजूद
विश्व धरोहर फूलों की घाटी का निरीक्षण कर वापस लौटा विशेष गश्ती दल, दुर्लभ वन्यजीवों की सक्रियता को लेकर वन विभाग और पार्क प्रशासन गदगद

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : February 22, 2026 at 10:23 PM IST
चमोली: विश्व धरोहर फूलों की घाटी का विशेष गश्त दल निरीक्षण कर वापस लौटा आया है. यह दल अपने साथ उत्साहजनक खबर भी ले आया है. गश्त दल के कैमरा ट्रैप्स में दुर्लभ वन्यजीवों की सक्रियता कैद हुई है. जिसमें हिम तेंदुआ (Snow Leopard), कस्तूरी मृग (Musk Deer), राज्य पक्षी मोनाल, गुलदार (Common Leopard), लेपर्ड कैट, भालू, हिमालयन सेरो, हिमालयन थार, येलो थ्रोटेड मार्टन और रेड फॉक्स कैमरे में कैद हुए हैं. जिसे देखकर वन विभाग और पार्क प्रशासन काफी गदगद हैं.
नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क में चलाया गया 6 दिवसीय सघन गश्त अभियान: बता दें कि नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क के अंतर्गत विश्व प्राकृतिक धरोहर फूलों की घाटी रेंज की टीम ने उच्च हिमालयी क्षेत्रों की सुरक्षा और वन्यजीवों की निगरानी के लिए 6 दिवसीय सघन गश्त अभियान चलाया. यह अभियान मुख्य रूप से शीतकाल के दौरान अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने और वन्यजीवों के पारिस्थितिकी तंत्र का अध्ययन करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था.

वन्यजीव संरक्षण और सुरक्षा के उद्देश्य से चलाए गए इस विशेष अभियान में पैदल गश्त के साथ ड्रोन और कैमरा ट्रैप का सहारा लिया गया. यह गश्ती दल गोविंदघाट रेंज कार्यालय से रवाना हुआ. जो पुलना, जंगल चट्टी, भ्यूंडार होकर घांघरिया और फूलों की घाटी तक गया. जहां दल ने मुख्य क्षेत्रों का सघन भ्रमण कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया.

इस दल ने भ्यूंडार घाटी के दुर्गम क्षेत्र सिमर टोली तक पहुंचकर निरीक्षण किया. वहीं, 6 दिनों का कार्य पूरा कर टीम सुरक्षित रेंज कार्यालय वापस पहुंची. नंदा देवी नेशनल पार्क के प्रभागीय वनाधिकारी IFS अभिमन्यु ने बताया कि इस महत्वपूर्ण अभियान में गश्त टीम की ओर से लगाए गए कैमरा ट्रैप में उत्साहजनक परिणाम प्राप्त हुए हैं. जिसमें कई दुर्लभ वन्यजीवों की सक्रियता देखी गई है.
अतिक्रमण या शिकार के नहीं मिले सबूत: निरीक्षण के दौरान फूलों की घाटी, घांघरिया और भ्यूंडार क्षेत्रों में ड्रोन के जरिए हवाई सर्वेक्षण किया गया. ड्रोन से उन दुर्गम क्षेत्रों की भी निगरानी संभव हो पाई, जहां मानवीय पहुंच कठिन है. वहीं, गश्त और ड्रोन सर्वे के दौरान पार्क क्षेत्र के भीतर किसी भी प्रकार की अवैध मानवीय गतिविधि (अतिक्रमण या शिकार) के साक्ष्य नहीं मिले.

वहीं, आईएफएस अभिमन्यु ने जून महीने से फूलों की घाटी में यात्रा सीजन को लेकर पार्क प्रशासन की तैयारियों के बारे में भी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि इस बार बृहद योजना बनाई जा रही है, जिसके तहत व्याख्या केंद्र का नवीनीकरण कर घाटी की सैर करने आने वाले प्रकृति प्रेमी और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करना शामिल है.
इसके अलावा ऑनलाइन बुकिंग प्रणाली, रचनात्मक और विषयगत साइन बोर्ड लगाना और ईडीसी की क्षमता निर्माण के साथ प्रचार-प्रसार पर जोर देना प्रमुख है. ताकि, फूलों की घाटी आने वाले पर्यटकों को सुविधाएं उपलब्ध हो सके और उन्हें कोई दिक्कतों का सामना न करना पड़े.
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