सांपों का घर जिला जामताड़ा! आज भी यहां काफी संख्या में पाए जाते हैं सांप, ग्रामीण होते हैं इसके शिकार
जामताड़ा में सबसे अधिक सांप पाए जाते हैं. यही वजह है कि यहां सर्पदंश के मामले ज्यादा आते हैं.

Published : June 28, 2026 at 2:56 PM IST
जामताड़ा: कभी सांपों के घर के नाम से जाना जाता था जामताड़ा जिला, आज भी काफी संख्या में सांप इस क्षेत्र में पाए जाते हैं, जिसमें विषैला और विषहीन दोनों तरह के सांप शामिल होते हैं. खासकर बरसात के मौसम में काफी संख्या पर सांप यहां निकलते हैं, जिसका शिकार लोग होते हैं.
जामताड़ा में पाए जाते हैं सबसे अधिक सांप
जाम मतलब 'सांप' ताड़ा मतलब 'घर' जामताड़ा अर्थात सांपों का घर. कभी जामताड़ा को सांपों का घर के नाम से जाना जाता था, आज भी यहां की स्थिति यही है. जंगली क्षेत्र होने के कारण यहां कई तरह के विषैला और विषहीन सांप पाए जाते हैं. हालांकि अधिकतर जंगल की कटाई और बढ़ती आबादी के कारण भले ही सांप की संख्या में कमी आई हो, लेकिन आए दिन सांप यहां निकालते रहते हैं.
खासकर बारिश के मौसम में, शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों में बिल में पानी भर जाने या अपने भोजन की तलाश में बड़ी संख्या में सांप बाहर निकल आते हैं. जिसका शिकार लोग होते है. रेस्क्यू टीम की मदद से सांप पकड़ा भी जाता है, लेकिन बारिश के दिनों में लोगों के लिए खतरा बना रहता है.
ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा लोग होते हैं सांप का शिकार
ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोग सबसे ज्यादा सांप काटने का शिकार होते हैं. अक्सर किसान जब खेतों में काम कर रहे होते हैं तो सांप वहां आ जाते हैं, या फिर शाम के समय खाने की तलाश में घरों में घुस आते हैं, जिससे लोगों का उनसे सामना होता है और वे सांप के काटने का शिकार हो जाते हैं. जिसमें कई लोगों की मौत भी हो जाती है. कुछ लोग मेडिकल इलाज कराने के बजाय झाड़-फूंक या अंधविश्वास पर भरोसा करते हैं और अपनी जान गंवा बैठते हैं.
कितने तरह के पाए जाते हैं यहां सांप
जानकारी के अनुसार इस क्षेत्र में विषैला और विषहीन दोनों तरह के सांप पाए जाते हैं. विषहीन सांप में ग्रास स्नेक जिसे हरूआ सांप कहा जाता है और दूसरा रेड स्नेक जिसे ढोड सांप कहा जाता है. ये दोनों सांप बरसात में काफी पाए जाते हैं. विषैले सांप के रूप में चिट्ठी सांप जिसे करैत कहा जाता है, पताड सांप और धामिन सांप इसके अलावे अजगर सांप भी पाए जाते हैं.
क्या कहते हैं सांपों के जानकार
सांपों के जानकार और इस क्षेत्र के विशेषज्ञ स्थानीय समाजसेवी विनोद मंडल बताते हैं कि जामताड़ा क्षेत्र सांपों का क्षेत्र रहा है. यहां काफी संख्या में सांप पाए जाते हैं, जिसमें पताड सांप (करैत सांप) और अजगर जैसे सांप शामिल हैं. इसके अलावा जो विषैला नहीं होते हैं, वे भी काफी संख्या में पाए जाते हैं.
इनका मानना है कि झाड़-फूंक के चक्कर में अज्ञानता के कारण सांपों के विष का शिकार अधिकतर लोग हो जाते हैं, जो जानकार हैं, जागरूक हैं वह अपना इलाज करा लेते हैं. उनके अनुसार, हर साल सांप के काटने से लगभग 8 से 10 लोगों की मौत हो जाती है.
क्या कहते हैं सिविल सर्जन
इसे लेकर सिविल सर्जन का कहना है कि सभी स्वास्थ्य केंद्र में एंटी स्नेक की दवा उपलब्ध है, कोई कमी नहीं है. दो-तीन विषैला सांप है, जो बरसात के समय घर में प्रवेश कर जाते हैं या जाने अनजाने में लोग इसके शिकार हो जाते हैं. सिविल सर्जन का कहना है यदि किसी व्यक्ति को सांप काटता है तो तुरंत नजदीकी हेल्थ सेंटर पर जाएं और इसका इलाज काराए. 99% इसका इलाज संभव है.
यदि समय पर हॉस्पिटल आ जाए तो मरीज की जान बच सकती है. सिविल सर्जन के अनुसार अब तक एक व्यक्ति की मौत सांप काटने से हुई है, जो झाड़-फूंक के कारण लेट से अस्पताल पहुंचा.
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