अब घर के अंदर सांप घुसना Impossible, बिहार के वैज्ञानिकों का डिवाइस करेगा उनका इंतजाम
बिहार में सर्पदंश से मौत के कई मामले आते हैं. ऐसे में BRABU के वैज्ञानिकों ने ऐसा उपकरण बनाया है जिससे सांपों को भागना पड़ेगा.

Published : January 6, 2026 at 7:22 PM IST
मुजफ्फरपुर: अब घरों, गोदामों और भंडारण क्षेत्रों तक सांपों की पहुंच को प्रभावी ढंग से रोका जा सकेगा. बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने एक स्नेक डिटेक्टर बैरियर (सर्प निवारक अवरोध) विकसित किया है, जो सर्पदंश से मानव सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ सांपों के संरक्षण में भी सहायक होगा.
स्नेक डिटेक्टर बैरियर को मान्यता: इस नवाचार को बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के विज्ञान संकाय के पूर्व डीन प्रो. मनेंद्र कुमार और पीजी जूलॉजी विभाग के डॉ. ब्रज किशोर प्रसाद सिंह ने विकसित किया है. इस उपकरण के डिजाइन को यूके इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टीज ऑफिस से पेटेंट मिल चुका है, जिससे इसे अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त हुई है.
BRA बिहार विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों का कमाल: पूर्व डीन प्रो. मनेंद्र कुमार ने बताया कि स्नेक डिटेक्टर बैरियर जंग-रोधी माइल्ड स्टील से बने डुअल-लेयर रिपेलेंट स्टेशन पर आधारित है. प्रत्येक स्टेशन एक स्व-नियंत्रित यूनिट की तरह कार्य करता है. इसके ऊपरी चेंबर में करीब 300 ग्राम कंकड़ या रेत और 20 एमएल कार्बोलिक एसिड अथवा पर्यावरण-अनुकूल तेल (जैसे लौंग और सिट्रोनेला) भरे जाते हैं.
"रासायनिक अभिक्रिया से निकलने वाली तीखी गंध स्टेशन में बने दो-तीन छिद्रों के माध्यम से नियंत्रित रूप से बाहर निकलती है, जिससे तय सीमा के आगे सांप प्रवेश नहीं कर पाते. गंध की तीव्रता कम होने पर सिस्टम में लगी एलईडी और वायरलेस सिग्नल के जरिए अलर्ट मिल जाता है. ठंड के मौसम में गंध के बेहतर प्रसार के लिए वैकल्पिक सोलर हीट प्लेट की सुविधा भी दी गई है. इसे कंक्रीट सतह पर बोल्ट या स्टैंड-माउंटेड फ्रेम के जरिए जमीन में मजबूती से स्थापित किया जा सकता है."- प्रो. मनेंद्र कुमार, विज्ञान संकाय के पूर्व डीन, बीआरए बिहार विश्वविद्यालय

कितनी है स्नेक डिटेक्टर बैरियर की कीमत?: इस उपकरण की अनुमानित लागत लगभग 2000 रुपये है. एक बार मिश्रण भरने के बाद करीब 15 दिनों में रिफिल की आवश्यकता होती है, जिसपर मात्र 40 से 50 रुपये का खर्च आता है. प्राकृतिक रसायनों पर आधारित होने के कारण यह प्रणाली पर्यावरण-अनुकूल, टिकाऊ और दूरदराज के इलाकों में भी आसानी से स्थापित की जा सकती है.

मानव सुरक्षा और सर्प संरक्षण के लिए उपयोगी: प्रो. मनेंद्र कुमार के अनुसार, भारत में सांपों की करीब 300 प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से केवल 70 विषैले हैं. इसके बावजूद देश में हर साल सर्पदंश से करीब 60 हजार मौतें होती हैं, जो विश्व में होने वाली कुल मौतों का आधे से अधिक है. डर के कारण लोग विषहीन सांपों को भी मार देते हैं, जिससे पर्यावरण संतुलन पर प्रतिकूल असर पड़ता है. ऐसे में स्नेक डिटेक्टर बैरियर मानव सुरक्षा और सर्प संरक्षण दोनों को एक साथ सुनिश्चित करने वाला एक महत्वपूर्ण और उपयोगी नवाचार माना जा रहा है.
ये भी पढ़ें
थाने में घुसा 5 फीट का विषधर सांप, कई दिनों तक नहीं सोए पुलिसवाले, देखें रेस्क्यू का VIDEO
बिहार में एक-दो नहीं एक साथ निकले 60 से अधिक कोबरा सांप, घर बना 'नागलोक'
बिहार में 1 साल के बच्चे के काटने से सांप की मौत, हैरत में डॉक्टर
बारिश में ज्यादा दिखते हैं ये जहरीले सांप, कोबरा सबसे खतरनाक, डसने से हो सकती है मौत
छप्पर में रखी कंघी से लिपटकर बैठा था विषधर सांप, महिला के हाथ डालते ही डसा, हुई दर्दनाक मौत

