SMS की टीम ने किया दुर्लभ एक्स्ट्रा हेपेटिक हाइडेटिड सिस्ट का सफल ऑपरेशन
ऑपरेशन के दौरान पाया गया कि गांठ गर्भाशय के पीछे तथा बड़ी आंत के सामने फंसी हुई थी

Published : February 26, 2026 at 7:13 PM IST
जयपुरः कांवटिया अस्पताल में SMS मेडिकल कॉलेज की सर्जन टीम ने एक अत्यंत दुर्लभ और जटिल एक्स्ट्रा हेपेटिक हाइडेटिड सिस्ट का सफल ऑपरेशन कर महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है. एसएमएस के सर्जन डॉ. पंकज पोरवाल ने बताया कि यह बीमारी सामान्यतः लीवर (यकृत) में पाई जाती है, लेकिन जब सिस्ट लीवर के बाहर विकसित होती है तो उसे एक्स्ट्रा हेपेटिक हाइडेटिड सिस्ट कहा जाता है. ऐसे मामले कुल हाइडेटिड सिस्ट के 10 प्रतिशत से भी कम पाए जाते हैं, जिससे इनका निदान और उपचार दोनों ही चुनौतीपूर्ण हो जाते हैं.
डॉक्टर ने बताया कि कोटा निवासी 35 वर्षीय महिला लंबे समय से पेट दर्द से पीड़ित थी. विस्तृत जांच में गर्भाशय के पीछे लगभग 15×12 सेंटीमीटर की बड़ी गांठ पाई गई. प्रारंभिक आकलन के आधार पर हाइडेटिड सिस्ट मानते हुए सर्जरी की योजना बनाई गई. ऑपरेशन के दौरान पाया गया कि गांठ गर्भाशय के पीछे तथा बड़ी आंत के सामने फंसी हुई थी और आसपास की महत्वपूर्ण धमनियों एवं यूरेटर से चिपकी हुई थी. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सर्जन टीम ने अत्यंत सावधानी और विशेषज्ञता के साथ बिना किसी कॉम्प्लिकेशन के सिस्ट को सफलतापूर्वक निकाल दिया. ऑपरेशन के दौरान और बाद में मरीज पूरी तरह सुरक्षित रही तथा वर्तमान में स्वस्थ है.
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क्या है हाइडेटिड सिस्टः हाइडेटिड सिस्ट एक परजीवी संक्रमण है, जो प्रायः Echinococcus नामक टेपवर्म से होता है. यह संक्रमण संक्रमित श्वानों या पशुओं के संपर्क से फैल सकता है. शरीर में प्रवेश करने के बाद यह परजीवी लीवर, फेफड़ों या अन्य अंगों में तरल से भरी थैली (सिस्ट) बना सकता है. यह सिस्ट पेट के अंदर असामान्य स्थान- जैसे गर्भाशय के पीछे, आंतों के आसपास या पेल्विक क्षेत्र में विकसित हो जाए, तो यह अत्यंत जटिल स्थिति बन जाती है. सर्जरी के दौरान सिस्ट फटने का खतरा रहता है, जिससे गंभीर एलर्जिक रिएक्शन (एनाफिलेक्सिस) या संक्रमण फैलने की आशंका होती है.
सर्जिकल टीम का योगदानः इस जटिल सर्जरी को एसएमएस के सर्जन डॉ. पंकज पोरवाल एवं उनकी टीम ने सफलतापूर्वक अंजाम दिया. टीम में डॉ. डी.पी. मौर्य, डॉ. सुनील शर्मा, डॉ. हेमेन्द्र पाटीदार, डॉ. महेंद्र और डॉ. ईशान का महत्वपूर्ण योगदान रहा. एनेस्थीसिया टीम में डॉ. प्रशांत एवं उनकी टीम का विशेष सहयोग रहा. साथ ही स्टाफ में कमल एवं मनोज का भी सराहनीय योगदान रहा.

