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SMS अस्पताल: रिनोवेशन के लिए करोड़ों का बजट, JEN-AEN तैनात, फिर भी मरीजों का जीवन खतरे में

बारिश के दौरान अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग में सीलन और पानी के रिसाव की समस्या बढ़ जाती है.

Road missing outside the PWD office
PWD ऑफिस के बाहर सड़क गायब (ETV Bharat Jaipur)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : August 26, 2026 at 6:22 PM IST

4 Min Read
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जयपुर: बीते दिन प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल सवाई मानसिंह में एक हादसा हुआ. इसमें अपने एक परिचित से मिलने आई महिला के सिर पर पंखा गिर गया. जिसके बाद महिला के सिर में 10 से अधिक टांके आए. इस तरह का अस्पताल में यह पहला हादसा नहीं है. इससे पहले भी अस्पताल में फाल सीलिंग और प्लास्टर गिरने की घटनाएं हो चुकी हैं. इससे अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों के साथ चिकित्सकों और कर्मचारियों में भी हादसे का डर बना रहता है. अस्पताल में सार्वजनिक निर्माण विभाग से JEN-AEN के साथ-साथ कर्मचारी तैनात किए गए है, लेकिन हादसों पर लगाम नहीं लग पा रही. इतना ही नहीं अस्पताल में सड़कें तक गायब हो चुकी हैं और लोग कीचड़ से निकलने को मजबूर हैं.

हर साल अस्पताल के रखरखाव और मेंटेनेंस पर करोड़ों रुपए खर्च किए जाने के बावजूद हालात में सुधर नहीं पा रहे. बारिश के दौरान अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग में सीलन और पानी के रिसाव की समस्या बढ़ जाती है. इसके चलते कई जगह प्लास्टर कमजोर होकर गिर जाता है, वहीं फॉल सीलिंग भी क्षतिग्रस्त होने लगती है.

एसएमएस में सड़कों के हालात और प्रिंसिपल का जवाब, देखें वीडियो (ETV Bharat Jaipur)

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करोड़ों का मेंटेनेंस फिर भी समस्या बरकरार: सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ दीपक माहेश्वरी का कहना है कि अस्पताल में भवन के रखरखाव और मेंटेनेंस का काम PWD करता है और फंड अस्पताल उपलब्ध करवाता है. इसके बाद भी परेशानी आती है, तो PWD विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े होते हैं. हाल ही में मुख्यमंत्री भी अस्पताल में अपनी जांचे करवाने पहुंचे थे और टूटी सड़क देख नाराज हुए. इसके बाद उन्होंने अस्पताल प्रशासन को सड़क बनाने के निर्देश दिए. डॉ माहेश्वरी का कहना है कि जब अस्पताल प्रशासन ने JDA से बात कि तो उन्होंने PWD पर काम टाल दिया और PWD ने JDA का नाम लिया.

Manhole chambers damaged due to lack of maintenance
मेंटेनेंस के अभाव में उधड़े पड़े फेरो कवर (ETV Bharat Jaipur)

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JEN-AEN की तैनाती भी बेअसर: अस्पताल की भवन संबंधी समस्याओं की निगरानी और मेंटेनेंस के लिए सिविल और इलेक्ट्रिक डिपार्टमेंट से JEN और AEN स्तर के अधिकारियों की नियुक्ति भी की गई है. इसके बावजूद जर्जर हिस्सों की समय पर पहचान और मरम्मत को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं. कई बार शॉर्ट सर्किट होने से आगजनी की घटना भी हो चुकी है. अस्पताल परिसर में जहां हर समय हजारों मरीज, परिजन और कर्मचारी मौजूद रहते हैं, वहां किसी भी तरह की लापरवाही गंभीर हादसे का कारण बन सकती है.

Road not visible due to no maintenance
सड़क ढूंढ़ते रह जाओगे... (ETV Bharat Jaipur)

अस्पताल के लिए करोड़ों का बजट:

  • अस्पताल के रिनोवेशन के लिए 10 करोड़ का बजट
  • बीते साल इसे बढ़ाकर 20 करोड़ से अधिक किया गया
  • लेकिन सड़क और रिनोवेशन पर 7 करोड़ भी खर्च नहीं हुए
  • PWD विभाग ने बचा हुआ पैसा अस्पताल प्रशासन को लौटा दिया
  • अस्पताल में सड़के उधड़ चुकी हैं
  • फेरो कवर टूटे हुए, बिल्डिंग कई जगह से है जर्जर

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अधिकारियों की फौज:

  • अस्पताल मेंटेनेंस के लिए कई अधिकारी तैनात
  • अस्पताल में डेडिकेटेड ऑफिस
  • सिविल के तीन JEN, दो AEN
  • इलेक्ट्रिक से भी इतने ही अधिकारी
  • सिविल पर हर साल 7 करोड़ से अधिक का बजट
  • जबकि इलेक्ट्रिक के लिए 3 करोड़ से अधिक का बजट

हजारों मरीजों का इलाज: डॉ माहेश्वरी का कहना है कि सवाई मानसिंह अस्पताल में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं. ऐसे में अस्पताल प्रशासन के सामने चुनौती सिर्फ इलाज की सुविधाएं बढ़ाने की नहीं, बल्कि पुराने भवन को सुरक्षित बनाए रखने की भी है. उनका कहना है कि बारिश से पहले निर्देश दिए जाते हैं कि भवन के संवेदनशील हिस्सों का व्यापक स्ट्रक्चरल और इलेक्ट्रिकल ऑडिट कराया जाए, ताकि किसी बड़े हादसे से पहले कमियों को दूर किया जा सके.