स्मार्टफोन की लत बना रही हिंसक; बेटियों की शिकायत लेकर मां-बाप पहुंच रहे राज्य महिला आयोग
आयोग की सदस्य मीना कुमारी ने बताया- जनसुनवाई में आए ऐसे मामले, मारपीट तक की जा रही.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : November 15, 2025 at 1:40 PM IST
|Updated : November 15, 2025 at 2:37 PM IST
लखनऊ: स्मार्टफोन अब परिवारों के लिए परेशानी का कारण बनता जा रहा है. फोन के अत्यधिक इस्तेमाल से किशोरियों का स्वभाव आक्रामक हो रहा है. इससे परेशान अभिभावक राज्य महिला आयोग की जन सुनवाई में परामर्श के लिए पहुंच रहे हैं. आयोग की सदस्य मीना कुमारी के मुताबिक, यूपी की राजधानी लखनऊ से लेकर विभिन्न जिलों में होने वाली जन सुनवाई में हर बार 3-4 मामले ऐसे सामने आ रहे हैं, जिनमें मां अपनी बेटियों के फोन अधिक इस्तेमाल करने से परेशान होकर मदद मांगने आती हैं. कई मामलों में नाबालिग बेटियां फोन चलाने से रोकने पर मां पर हिंसक व्यवहार तक कर रही हैं.
फोन से बढ़ रहा है बच्चों का आक्रोश: बलरामपुर अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ देवाशीष शुक्ला बताते हैं कि बच्चों में आक्रामकता के मामले तेजी से बढ़े हैं. जब बच्चे फोन पर ज्यादा निर्भर हो जाते हैं तो उनकी मांगें बढ़ जाती हैं. जब ये पूरी नहीं होती हैं तो वे चिड़चिड़े और झगड़ालू हो जाते हैं. अगर अभिभावक थोड़ी समझदारी और अनुशासन अपनाएं तो बिना मनोवैज्ञानिक सहायता के भी बच्चों को फोन की लत से छुड़ाया जा सकता है.
फोन चलाने से रोका तो मुंह नोचा: आयोग की सदस्य मीना कुमारी ने बताया कि हाल ही में एक महिला अपनी नाबालिग बेटी को लेकर आयोग पहुंचीं. महिला ने बताया कि जब उन्होंने बेटी को फोन चलाने से रोका तो उसने नाखून से उनका मुंह नोच लिया. चेहरा जख्मी होने के बावजूद मां रोती रही और बेटी हंसती रही. किशोरी ने कहा कि यह उसकी जिंदगी है, वह जैसा चाहे, वैसे जिएगी, यह कोई और तय नहीं करेगा.
बेटी देती है धमकी: आयोग पहुंची पत्रकारपुरम निवासी एक महिला ने बताया कि उसकी बेटी पूरे दिन फोन चलाती रहती है. जब उसे ऐसा करने से मना किया और डांट दिया तो वह चीखने-चिल्लाने लगी बोली कि वह अभिभावक के खिलाफ उत्पीड़न का केस कर देगी. अगर उसकी कोई मांग पूरी नहीं होती है, तो वह मां-बाप दोनों के लिए अभद्र भाषा का इस्तेमाल करती है. आए दिन खुद की जान लेने की धमकी देती रहती है.
लिवइन रिलेशन में फंस रहीं किशोरियां: महिला आयोग में पहुंचने वाले कई मामलों में यह बात भी सामने आई है कि लिवइन रिलेशनशिप से जुड़े विवादों में अधिकांश किशोरियां फोन और सोशल मीडिया के अधिक इस्तेमाल से प्रभावित हैं. डिजिटल दुनिया से जुड़ने के बाद वे वास्तविक जीवन से कटने लगी हैं. परिणामस्वरूप, सही और गलत का अंतर समझे बिना भ्रमित रिश्तों में उलझकर धोखे का शिकार हो रही हैं.
ऐसे छुड़ाएं बच्चों की फोन की लत
- अभिभावक खुद बच्चों के सामने फोन का अधिक उपयोग न करें.
- बच्चों को अलग डिवाइस न दें.
- सोने से पहले और बिस्तर पर फोन इस्तेमाल करने से रोकें.
- सुबह उठने के दो घंटे बाद ही फोन दें.
- फोन उपयोग का निर्धारित समय तय करें.
- बच्चों द्वारा देखे जा रहे कंटेंट पर नजर रखें.
- परिवार के साथ सकारात्मक बातचीत और समय बिताने की आदत बढ़ाएं.
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